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सूत्रों के हवाले से अटकलों को ‘कूटनीतिक जीत’ बताता मीडिया
एक बार फिर से कव्वा कान ले उड़ा. कम से कम देश के मीडिया की तो आज की हालत यही रही. मुद्दा था ईरान के साथ अमेरिकी टकराव के बीच देशभर में बढ़ती ईंधन की किल्लत का. मीडिया ने सूत्रों के जरिए बताया कि ईरान ने भारत के झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) से सुरक्षित गुज़रने की अनुमति दे दी है.
बीते कई दिनों से होरमुज स्ट्रेट में फंसे तेल के जहाजों की ख़बरों के बीच यह एक बहुत बड़ा दावा था, क्योंकि इस संकरे से समुद्री मार्ग से भारत करीब 40 फीसदी आयात करता है. इसके अलावा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पहले एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत का 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं.
जहां भारतीय मीडिया ने ‘सूत्रों के जरिए’ दावा किया है कि ईरान ने सुरक्षित मार्ग की अनुमति दे दी है, वहीं ईरानी ‘सूत्रों’ ने तुरंत इस दावे का खंडन कर दिया.
बुधवार दोपहर बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है. आखिरी बातचीत में जहाज़ों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. इससे आगे कुछ कहना मेरे लिए अभी जल्दबाज़ी होगी.”
इस तरह एक बार फिर, सरकार की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई लेकिन मीडिया जरूर सूत्रों के हवाले से ख़बर चलाने पर खुद ख़बर बन कर रह गया.
यह सब शुरू कैसे हुआ?
संभवतः सूत्रों के जरिए ख़बर के नाम मीडिया की बेखबरी की वजह आज के अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट है.
रिपोर्ट में दावा किया गया कि “विदेश मंत्री स्तर की बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है, ताकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखा जा सके.”
अनाम “लोगों” का हवाला देते हुए लेख में यह भी कहा गया कि भारतीय टैंकर पुष्पक और परिमल “सुरक्षित रूप से” जलडमरूमध्य से गुजर रहे हैं जबकि अमेरिका, यूरोप और इज़राइल के जहाज़ों पर अब भी प्रतिबंध बने हुए हैं.”
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अब भी 28 भारतीय-ध्वज वाले जहाज़ जलडमरूमध्य में या उसके आसपास मौजूद हैं.
सूत्र बनाम सूत्र: कौन देगा सही उत्तर?
घटनाक्रम के हिसाब से देखें तो इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के बाद सुबह मीडिया संस्थानों में सूत्रों के जरिए यह ख़बर आने लगी कि ईरान ने भारतीय जहाजों को इजाजत दे दी है.
रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें दो स्रोतों ने एक-दूसरे का खंडन किया. रिपोर्ट में कहा गया, “एक भारतीय सूत्र ने गुरुवार को बताया कि ईरान भारत-ध्वज वाले टैंकरों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देगा, जिसके रास्ते भारत के 40 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात होता है. हालांकि देश के बाहर स्थित एक ईरानी सूत्र ने कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है.”
इसके बाद एएनआई ने भी ‘सूत्रों’ का हवाला देते हुए रिपोर्ट किया कि “ईरानी अधिकारियों ने जलडमरूमध्य से भारत-ध्वज वाले जहाज़ों को सुरक्षित रूप से गुजरने देने का फैसला किया है. यहां समुद्री यातायात लगभग पूरी तरह रुक गया है, जब से अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया है.”
टीवी ने घोषित कर दी जीत
इसके बाद तो समाचार चैनलों ने इस कदम को ‘बड़ी कूटनीतिक जीत’ के रूप में पेश करना शुरू कर दिया.
आज तक ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के ‘कूटनीतिक प्रयासों’ की तारीफ करते हुए इसे एक बड़ी सफलता बताया. अनाम ‘सूत्रों’ का हवाला देते हुए चैनल ने दावा किया कि ईरान भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित मार्ग देगा, ऐसा ही कहानी सहयोगी चैनल इंडिया टुडे पर भी दिखाई दी. उसने भाजपा का हवाले से दावा किया कि “युद्ध के बीच भारत के लिए यह बड़ी कूटनीतिक जीत है.”
इसी तरह ‘सूत्रों’ के हवाले से एनडीटीवी इंडिया ने भी इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. चैनल ने इस कथित फैसले को जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई चर्चाओं से जोड़ते हुए उसे इस बात का प्रमाण बताया कि भारत ईरान के साथ संबंधों को संतुलित रखते हुए अमेरिका और इज़राइल के साथ अपने रिश्तों को भी संभाल सकता है.
वहीं, लोकसभा के पटल पर भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि ईरान ने भारत के जहाज़ों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग दे दिया है. हालांकि, सरकार की ओर से अब तक किसी सरकारी अधिकारी ने आधिकारिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है. भारत और ईरान के बीच बातचीत जरूर हुई है लेकिन उस बातचीत के फैसले पर कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
क्या सच में समझौता हुआ है?
इस बीच ब्लूमबर्ग ने एक बार फिर ‘मामले के जानकार लोगों’ यानि सूत्रों का हवाला देते हुए यह रिपोर्ट किया कि भारत, दरअसल 20 से अधिक टैंकरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है, न कि यह कि कोई समझौता पहले ही हो चुका है.
उधर, ‘सूत्रों’ का हवाला देते हुए सीएनएन न्यूज़18 ने रिपोर्ट किया है कि सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधानों की समीक्षा के लिए एक तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया है. इस पैनल का नेतृत्व गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं और इसमें विदेश मंत्री जयशंकर तथा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी शामिल हैं.
समुद्र में भारतीयों के लिए बढ़ता खतरा
यह उच्च स्तरीय समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा का माहौल और अधिक गंभीर होता जा रहा है.
गौरतलब है कि भारतीय अधिकारियों ने आज पुष्टि की कि इराक के बसरा के पास तेल टैंकर सेफसी विष्णु पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई. हालांकि, शिपिंग मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में जिम्मेदार पक्षों की पहचान नहीं की.
ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों और समुद्र में भारतीय नागरिकों के जीवन से जुड़े इस संकट में जनता पारदर्शिता और स्पष्टता की हकदार है. लेकिन इसके बजाय उसे जो मिला है, वह है सूत्रों के हवाले से परोसी गई भ्रामक जानकारी और अटकलों पर जश्न मनाता 'बेख़बर' मीडिया.
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