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महाराष्ट्र: चुनाव आयोग के एप के जरिए ‘फर्जी मतदाता’ जोड़ने की कोशिश, 18 महीने बाद भी जांच अटकी
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले किसी ने चुनाव आयोग के अपने वोटर हेल्पलाइन एप का इस्तेमाल करके एक ही विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों फर्जी मतदाता पंजीकरण आवेदन भेज दिए. इन आवेदनों में नकली आधार कार्ड, फर्जी पते और मुंबई के कॉलेज छात्रों के चुराए गए डाटा का इस्तेमाल किया गया था.
बाद में एक चुनाव अधिकारी ने इस गड़बड़ी को पकड़ा, सभी आवेदन खारिज किए और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया कि चुनाव आयोग को ‘धोखा दिया गया’ और चुनाव में ‘धांधली की कोशिश’ की गई. लेकिन इस शिकायत पर दर्ज एफआईआर को अब करीब 18 महीने हो चुके हैं और अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है.
नवंबर, 2025 में इस मामले में आखिरी अपडेट तब आया जब पुलिस ने आरोपियों का पता लगाने के लिए आईपी एड्रेस से जुड़ी तकनीकी जानकारी मांगी. यह जानकारी जिला कार्यालय के पास नहीं थी, इसलिए इसे भारत के चुनाव आयोग और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेज दिया गया. अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इन संस्थाओं ने पुलिस को यह जानकारी दी है या नहीं. जिला अधिकारियों का कहना है कि वे हर तीन महीने में पुलिस को याद दिलाने वाले पत्र भेजते रहे हैं, लेकिन जांच लगभग ठहर सी गई है.
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह पहली आधिकारिक घटना मानी जा सकती है जिसमें चुनाव आयोग के अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर चुनावी धोखाधड़ी की कोशिश की गई. यह इसीलिए भी अहम है क्योंकि 2024 के इन चुनावों के नतीजों को कांग्रेस ने वोटरों की संख्या में बढ़ोतरी के आधार पर चुनौती दी थी, जिसे चुनाव आयोग ने युवाओं की अच्छी भागीदारी बताकर खारिज कर दिया था.
तुलजापुर में क्या हुआ?
मतदाताओं के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वोटर हेल्पलाइन एप लॉन्च किया था.
इस एप के जरिए 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण कर सकता है. इसके लिए कई तरह की सेफ्टी प्रोसेस का इस्तेमाल किया गया. जैसे कि मोबाइल नंबर से अकाउंट बनाना, ओटीपी के जरिए सत्यापन, आवेदन जमा करने से पहले दूसरा ओटीपी और जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा अंतिम सत्यापन आदि.
लेकिन 2 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2024 के बीच यानि मतदान से लगभग दो हफ्ते पहले, एक ही अकाउंट से करीब 1000 आवेदन पचोरा तहसील कार्यालय को भेजे गए.
इन आवेदनों में दिए गए मोबाइल नंबर, नाम और पते संदिग्ध नजर आए. जब बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने मौके पर जाकर जांच की तो पता चला कि दिए गए पते पर ऐसे कोई लोग मौजूद ही नहीं थे.
पूरे तुलजापुर विधानसभा क्षेत्र में ऐसे लगभग 4,000 से 5,000 आवेदन मिले. सभी को खारिज कर दिया गया.
पुलिस में दर्ज हुआ मामला
17 अक्टूबर 2024 को धाराशिव (उस्मानाबाद) जिले के सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी अरविंद शंकराव ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज कराई.
शिकायत में कहा गया कि नकली आधार कार्ड का इस्तेमाल करके वोटर हेल्पलाइन एप के जरिए बड़ी संख्या में फर्जी मतदाता पंजीकरण के आवेदन भेजे गए.
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराएं लगाई गईं. जिनमें धारा 172 – चुनाव के दौरान प्रतिरूपण (पर्सोनेशन), धारा 318(2) और 336(3) – धोखाधड़ी और जालसाजी, धारा 335 – फर्जी दस्तावेज बनाना, धारा 340(2) – जाली दस्तावेज का इस्तेमाल, धारा 61(2) – आपराधिक साजिश और धारा 62 – जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, जैसी धाराएं शामिल हैं.
जिला उप निर्वाचन अधिकारी शिशिर यादव के मुताबिक इन फर्जी आवेदनों में मुंबई के कॉलेज छात्रों के पते और पहचान पत्रों का भी दुरुपयोग किया गया. उन्होंने कहा, “कोई असली मतदाता अपने ही पते का इस्तेमाल करके फर्जी आवेदन क्यों करेगा और खुद को मुसीबत में डालेगा? इससे साफ लगता है कि किसी और के डाटा का दुरुपयोग किया गया है.”
एफआईआर में दर्ज चार मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे.
डिजिटल चुनाव प्रणाली की दूसरी समस्याएं
चुनाव आयोग ने अब तक मतदाताओं और अधिकारियों के लिए करीब 15 एप लॉन्च किए हैं. हाल ही में शुरू किया गया ईसीआईनेट एप भी लॉन्च के एक महीने के भीतर विवाद में आ गया जब पश्चिम बंगाल के कई मतदाताओं ने शिकायत की कि वे अपने वोटर स्टेटस की जांच नहीं कर पा रहे थे.
इसी तरह बीएलओ एप, जिसे बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन के लिए इस्तेमाल करते हैं, को भी करीब 30 बार अपडेट करना पड़ा. चेन्नई में कई अधिकारियों ने शिकायत की कि एप के कारण फोन बार-बार फ्रीज हो जाता था और डेटा खो जाता था.
लेकिन तुलजापुर का मामला तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि सिस्टम की डिजाइन में कमी का संकेत देता है.
एक ही अकाउंट से सैकड़ों आवेदन भेजे गए और तब तक कोई अलर्ट नहीं आया. ओटीपी सत्यापन और अन्य प्रक्रियाएं भी इस संभावित दुरुपयोग को रोक नहीं पाईं.
जांच क्यों नहीं बढ़ रही?
फिलहाल तुलजापुर पुलिस स्टेशन इस मामले की जांच कर रहा है. जिला अधिकारी शिशिर यादव के मुताबिक, उनका कार्यालय हर तीन महीने में पुलिस को रिमाइंडर भेजता रहा है क्योंकि यह जानना जरूरी है कि इन फर्जी आवेदनों के पीछे कौन था.
नवंबर, 2025 में पुलिस अधीक्षक ने जांच के लिए आईपी एड्रेस और तकनीकी विवरण मांगे थे.
यादव ने कहा, “यह जानकारी हमारे पास तहसील स्तर पर नहीं थी, इसलिए हमने इसे चुनाव आयोग और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेज दिया. हमें नहीं पता कि उन्होंने पुलिस को यह जानकारी दी है या नहीं.”
जांच अधिकारी निलेश देशमुख ने सिर्फ इतना कहा कि मामला अभी भी जांच के अधीन है. जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी जांच में सहयोग कर रहे हैं, तो उन्होंने रिपोर्टर का फोन काट दिया.
व्यापक संदर्भ
महाराष्ट्र चुनाव परिणाम घोषित होने के पांच दिन बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सिर्फ पांच महीनों में राज्य में 40 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जबकि पिछले पांच वर्षों में इससे कम मतदाता जुड़े थे.
चुनाव आयोग ने इसे युवा मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी का संकेत बताते हुए खारिज कर दिया था. लेकिन धाराशिव की यह एफआईआर उस बहस को एक ठोस आधार देती है कि क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाता सूची से छेड़छाड़ की कोशिशें हुई थीं.
तुलजापुर की राजनीतिक पृष्ठभूमि
तुलजापुर विधानसभा क्षेत्र मराठवाड़ा क्षेत्र में स्थित है, जहां लंबे समय तक कांग्रेस और वामपंथी दलों का प्रभाव रहा है. 1957 से 2014 के बीच हुए 13 चुनावों में से यहां कांग्रेस ने 10 बार जीत हासिल की है. वहीं, किसान और मजदूर पार्टी ने 3 बार जीत दर्ज की है. बीजेपी ने यहां 1980 में पहली बार चुनाव लड़ा और केवल 1.86 प्रतिशत वोट मिले. इसके बाद पार्टी ने कई वर्षों तक यहां चुनाव नहीं लड़ा. 2019 में बीजेपी ने पहली बार यह सीट जीती.
2024 में बीजेपी के राणाजगजितसिंह पद्मसिंह पाटील ने कांग्रेस के कुलदीप धीरज पाटिल को 36,879 वोटों से हराया.
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