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मुस्लिम दुकानदार को बचाने के लिए ‘मोहम्मद’ दीपक का साथ देने वाले विजय बोले- मैं भी हिंदू ही हूं
उत्तराखंड के कोटद्वार में 26 जनवरी को स्थानीय जिम मालिक दीपक कुमार कश्यप के साथ उनके दोस्त विजय रावत भी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का सामना करने पहुंच गए. ये कार्यकर्ता एक 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार को परेशान कर रहे थे और उससे उसकी दुकान के नाम से 'बाबा' शब्द हटाने की मांग कर रहे थे. पार्किंसन रोग से पीड़ित इस दुकानदार को बचाने के लिए विजय और दीपक ने हस्तक्षेप किया, जिसका वीडियो बाद में वायरल हो गया.
न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में 38 वर्षीय विजय ने बताया, 'मैं उस दुकानदार को व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानता था, लेकिन उसकी दुकान 30–35 साल से है और मेरे करीबी दोस्त की दुकान बगल में है. हमें उसकी तबीयत की चिंता थी. हमें पता था कि पहले भी ऐसे लोग उसे निशाना बना चुके हैं, इसलिए हमने इंसानियत के नाते उन्हें वहां से भगा दिया.'
विजय ने साफ किया कि 26 जनवरी को उनका कदम उनके हिंदू धर्म की ही सीख से प्रेरित था. उल्लेखनीय है कि विजय कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे हैं. हालांकि, बीते साल उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया गया था.
उन्होंने कहा, 'दीपक और मुझे लगा कि हमने अच्छा काम किया. शायद हमने किसी की जान बचा ली. हमारा धर्म इंसानियत का धर्म है. मैं हिंदू हूं और अपने धर्म का पालन करता हूं, लेकिन सभी धर्मों को बराबर मानता हूं. हमारा धर्म किसी को परेशान करना नहीं सिखाता. ये लोग किस अधिकार से उस बुजुर्ग को दुकान का नाम बदलने को मजबूर कर रहे थे?'
विजय ने कहा, 'हम सिद्धबली बाबा के अनुयायी हैं, हम उन्हें उतना ही मानते हैं, जितना ये लोग मानते हैं.' दरअसल, कार्यकर्ताओं को आपत्ति थी कि एक मुस्लिम दुकानदार 'बाबा' शब्द का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि हिंदू सिद्धबली बाबा को मानते हैं, जिन्हें हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त एक संत माना जाता है. विजय ने कहा, 'यह धर्म के नाम पर लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश है.'
वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने कानूनी मोड़ ले गया. बजरंग दल के सदस्यों ने दीपक और विजय के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया कि दोनों ने उन पर हमला किया, पैसे लूट लिए और जातिसूचक गालियां दीं, जबकि वे 'घर-घर जनसंपर्क अभियान' चला रहे थे.
विजय ने कहा, 'वीडियो वायरल होने के बाद 28 जनवरी को हमारे खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई. पुलिस ने दबाव में आकर इसे दर्ज किया. आप खुद वीडियो देख लीजिए, यहां कोई जनसंपर्क नहीं हो रहा था. चार–पांच महीने पहले भी वे उसी दुकानदार के साथ ऐसा करने आए थे.'
अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले संगठनों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'कोई धर्म गलत नहीं होता, लोग गलत होते हैं. हमारे धर्म में भी गलत लोग हैं और दूसरे धर्मों में भी. अंकिता भंडारी की हत्या करने वाले भी हिंदू थे. तब ऐसे संगठन कहां थे?'
विजय का यह भी आरोप है कि उत्तराखंड सरकार बजरंग दल जैसे संगठनों को संरक्षण और समर्थन दे रही है.
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