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पंजाब केसरी ग्रुप ने लगाया पंजाब सरकार पर उत्पीड़न का आरोप, राज्यपाल से जांच की मांग
पंजाब केसरी ग्रुप ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया है कि वह उनके मीडिया समूह को निशाना बनाकर उत्पीड़न कर रही है. ग्रुप के प्रकाशकों ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को लिखे एक पत्र में दावा किया है कि सरकार द्वारा उनके प्रेस और संबंधित कारोबार पर लगातार छापेमारी और कार्रवाई की जा रही है, जिसका उद्देश्य मीडिया को डराना और स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाना है.
पत्र में कहा गया है कि यह सिलसिला 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित एक समाचार से शुरू हुआ, जिसमें विपक्ष के खिलाफ आरोपों पर संतुलित रिपोर्टिंग की गई थी. इसके बाद नवंबर, 2025 से पंजाब सरकार ने उनके हिंदी और पंजाबी दैनिक अखबारों में सरकारी विज्ञापनों को रोक दिया. ग्रुप का दावा है कि यह आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश है और पिछले कुछ दिनों में उनके खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जा रहा है.
पंजाब केसरी ग्रुप ने अपने पत्र में हफ्तेभर के भीतर समूह से जुड़ी करीब 9 कार्रवाइयों का उल्लेख किया है, जिन्हें वे लक्षित हमला मानते हैं.
एफ़एसएसएआई, जीएसटी और आबकारी विभाग की ओर से उनके होटलों पर की गई विभिन्न छापेमारी के अलावा पंजाब केसरी समूह ने लुधियाना और जालंधर स्थित अपने प्रिंटिंग प्रेसों पर अलग-अलग विभागों द्वारा की गई तीन छापेमारियों का भी ज़िक्र किया है. समूह का कहना है कि इन कार्रवाइयों के चलते जालंधर, लुधियाना और बठिंडा के प्रेसों का संचालन बाधित होने या पूरी तरह ठप हो जाने की आशंका है. पत्र में यह भी दावा किया गया है कि उनके प्रेस परिसरों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.
समूह के मालिकों ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता में किसी भी तरह का हस्तक्षेप “पंजाब में लोकतंत्र को गंभीर रूप से कमजोर करेगा.” उन्होंने राज्यपाल से इस पूरे मामले की जांच कराने और “आवश्यक कार्रवाई” करने की मांग की है.
वहीं, इन आरोपों पर पंजाब सरकार ने सोमवार शाम जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में प्रतिक्रिया देते हुए इसे “प्रतिशोध की कहानी” करार दिया. सरकार ने दावा किया कि सभी कार्रवाइयां वैधानिक एजेंसियों द्वारा पाई गई ठोस अनियमितताओं के आधार पर की गई हैं. विज्ञप्ति में जालंधर स्थित समूह के एक होटल में आबकारी नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया, जहां बिना अनुमति वाले स्थानों पर करीब 800 शराब की बोतलें पाए जाने का दावा किया गया. इसके अलावा, बिना शोधन किए गए अपशिष्ट जल को सीवर लाइन में छोड़ने जैसे पर्यावरणीय उल्लंघनों का भी ज़िक्र किया गया.
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, राज्य सरकार ने यह भी कहा कि 'प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ आबकारी, पर्यावरण या श्रम कानूनों के उल्लंघन की छूट नहीं हो सकता.'
वहीं, विपक्षी दलों भाजपा और कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी सरकार की कार्रवाइयों की निंदा करते हुए इसे 'प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर हमला' बताया है.
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