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गाजियाबाद: गर्ल्स हॉस्टल से डिटेंशन सेंटर और तालाबंदी तक, सरकारी दावों का बदहाल नमूना
जहां सरकार एक तरफ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि बेटियों के लिए बनाया गया सरकारी हॉस्टल कागज़ों से बाहर कभी ठीक से निकल ही नहीं पाया. गाजियाबाद के नंदग्राम में स्थित यह राजकीय अनुसूचित जाति–जनजाति छात्रावास इसका बड़ा उदाहरण है. इस हॉस्टल का उद्घाटन 15 जनवरी 2011 को बहुजन समाज पार्टी की सरकार के दौरान किया गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल के आखिरी दिनों में कुछ महीनों के लिए यहां छात्राएं रहने जरूर आईं, लेकिन जल्द ही उन्हें साहिबाबाद स्थित एक अन्य छात्रावास में शिफ्ट कर दिया गया.
छात्रावास के अधीक्षक धर्म सिंह नेगी के मुताबिक, यहां सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते छात्राएं अधिक समय तक नहीं रह सकीं. इसके बाद से यह इमारत लगातार खाली पड़ी रही. राज्य में 2012 में बनी समाजवादी पार्टी की सरकार और 2017 से अब तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार दोनों ही इस छात्रावास को चालू कराने में नाकाम रहीं. हालात इतने बिगड़े कि 2020-21 में इस इमारत को डिटेंशन सेंटर में तब्दील करने का फैसला हुआ. केयर टेकर के अनुसार, इसके लिए यहां सात बड़े हॉल बनाए गए, जिनमें लोगों को रखने की व्यवस्था की गई थी.
हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सहित छात्रों और दलित संगठनों के विरोध के बाद इस योजना को रोक दिया गया और इमारत को जैसे का तैसा छोड़ दिया गया. मौजूदा स्थिति की बात करें तो यह भवन अब झाड़-झंखाड़ से घिरा खंडहर बन चुका है. दरवाजों पर लगे ताले जंग खा चुके हैं. बगल में बने बॉयज हॉस्टल के छात्रों का कहना है कि अब इस इमारत में छात्र नहीं, सिर्फ सांप पल रहे हैं.
सिर्फ गर्ल्स हॉस्टल ही नहीं, बल्कि बॉयज हॉस्टल की हालत भी बेहद खराब है. छात्रों का कहना है कि यहां की समस्याओं से उन्हें खुद ही निपटना पड़ता है. सफाई हो या किसी तरह की मरम्मत अधिकतर काम छात्र अपने पैसे और अपने स्तर पर कराते हैं. बुनियादी जरूरतों के लिए भी छात्र आपस में पैसे इकट्ठा कर व्यवस्थाएं करते हैं.
छात्रों के मुताबिक, उन्होंने लाइब्रेरी के लिए 44 हजार रुपये का इन्वर्टर, 5,656.92 रुपये का वाई-फाई कनेक्शन, और 2,720 रुपये साफ-सफाई व अन्य जरूरी सामानों पर खर्च किए. इन सभी खर्चों से जुड़े बिल भी मौजूद हैं.
हैरानी की बात यह है कि इसी छात्रावास के गेट पर लगे बोर्ड के अनुसार, हाल ही में बॉयज हॉस्टल पर 299.91 लाख रुपये, यानी करीब 3 करोड़ रुपये, मरम्मत और सौंदर्यीकरण के नाम पर खर्च किए गए हैं. इस खर्च पर भी छात्र सवाल उठाते हैं कि अगर करोड़ों रुपये खर्च हुए, तो ज़मीनी हालत इतनी बदतर क्यों है?
देखिए पूरी वीडियो रिपोर्ट-
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