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फोटोग्राफर रॉनी सेन ने ज़ी मीडिया पर किया 18 करोड़ का कॉपीराइट केस
फिल्म मेकर और फोटोग्राफर सौम्यजीत सेन ने ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड के खिलाफ 18.11 करोड़ रुपये के कॉपीराइट उल्लंघन का केस दायर किया है. सेन का आरोप है कि ज़ी ने उनके द्वारा ली गई चीतों की फुटेज का इस्तेमाल किया और इसे "सुपर एक्सक्लूसिव" बताते हुए पेश किया.
पश्चिम बंगाल की एक अदालत में दायर मुकदमे में सौम्यजीत सेन उर्फ़ रॉनी सेन ने दावा किया है कि ज़ी न्यूज़ ने उनके उस फुटेज को प्रसारित किया, जो उन्होंने साल 2022 में अफ्रीका से भारत में चीतों के एक ऐतिहासिक अंतर-महाद्वीपीय स्थानांतरण के समय रिकार्ड की गई थी.
विमान के अंदर से रिकार्ड करने की अनुमति लेकर ऐसा करने वाले रॉनी एकमात्र फ़ोटोग्राफ़र थे. उनका दावा है कि ने उन्हें ना तो इस फुटेज के लिए कोई क्रेडिट दिया, ना ही उनकी सहमति ली गई और ना ही इसके इस्तेमाल के बदले उन्हें कोई भुगतान हुआ. चैनल ने करीब 12 सेकंड का क्लोज़-अप वीडियो दिखाया, जिसमें एक चीता एक ट्रांसपोर्ट क्रेट के अंदर दिखाई दे रहा था.
रॉनी का कहना है कि यह फुटेज नेशनल ज्योग्राफिक चैनल के लिए लिया गया था और इसकी साइट पर 13 सितंबर, 2022 को प्रकाशित किया गया था. लेकिन सेन ने इस पर कॉपीराइट और किसी भी तीसरे पक्ष को इसका लाइसेंस देने का अधिकार अपने पास ही रखा.
दायर किए गए मुकदमे के अनुसार, यह फुटेज “भारत लाए जाने वाले उन चीतों में से एक का था, जिस समय दक्षिण अफ्रीका के त्सवालु गेम रिजर्व से दक्षिण अफ्रीका के मिडरैंड में स्थित ग्रैंड सेंट्रल एयरपोर्ट तक एक ट्रांसपोर्ट क्रेट में ले जाया जा रहा था.” सेन ने आरोप लगाया कि ज़ी न्यूज़ ने इस फुटेज को गलत तरीके से अपना “सुपर एक्सक्लूसिव” फुटेज बताते हुए पब्लिश किया.
मुकदमे के अनुसार, चैनल ने कथित तौर पर 16 और 17 सितंबर, 2022 को अपने चैनल पर इस फुटेज को प्रसारित किया और इसे अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीम भी किया, जिसके बाद इसे बिना किसी बातचीत, बिना इसके राइट के लिए अनुरोध किए या बिना मंजूरी के ही स्टैंड-अलोन वीडियो की एक सीरीज़ के रूप में भी अपलोड किया गया.
गौरतलब है कि नामीबिया से लाए गए इन आठ चीतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन पर कूनो मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में छोड़ा था.
कमर्शियल वैल्यू की कमी और सही इस्तेमाल पर सवाल
मुकदमे में कहा गया है कि जी मीडिया द्वारा फुटेज को अनाधिकृत तरीके से दिखाए जाने के कारण सेन पर आर्थिक प्रभाव पड़े हैं. उनका काम लाइसेंस्ड होता है और उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया की मार्केट में जाता है.
मुकदमे के अनुसार, रॉनी के वकीलों ने कथित तौर पर पहले एक 'सीज़-एंड-डिसिस्ट' नोटिस जारी किया था, जिसमें वीडियो को तुरंत हटाने की मांग की गई थी, और जब ज़ी मीडिया ने कोई जवाब नहीं दिया, तो उन्होंने कानूनी कार्रवाई की तरफ कदम बढाया. कमर्शियल कोर्ट में केस दायर करने से पहले की अनिवार्य शर्त के चलते उनकी कानूनी टीम ने पहले मध्यस्थता के लिए आवेदन किया, जिसके दौरान अदालत के मध्यस्थता केंद्र ने ज़ी को एक नोटिस भेजा. हालांकि, सेन ने आरोप लगाया कि ज़ी ने ना तो कोई जवाब दिया और ना ही पेश हुआ.
दायर मुकदमे के अनुसार, "ज़ी ने कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत कॉपीराइट के अधिकार का उल्लंघन किया है. इसके अलावा, किसी अन्य के कॉपीराइट किए गए कार्य को जानबूझकर गलत तरीके से अपना बताने और विशिष्टता का झूठ बोल इसे प्रसारित करना भी धारा 63 के तहत अपराध है."
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, "ऐसे मामलों में मीडिया संस्थान आमतौर पर कॉपीराइट अधिनियम की धारा 52(1)(ए)(iii) का सहारा लेते हैं, जो 'निष्पक्ष व्यवहार' को कवर करती है. यह करंट घटनाओं की रिपोर्टिंग के उद्देश्य से कॉपीराइट किए गए कार्य के उपयोग की अनुमति देता है. हालांकि, निष्पक्ष व्यवहार का कानून सख्त है. इसमें आम तौर पर स्रोत की जानकारी देना ज़रूरी होता है, जो कि मुकदमे की बातों को सही मानें तो ज़ी ने नहीं किया है.”
न्यूज़लॉन्ड्री ने सेन के आरोपों पर प्रतिक्रिया जानने के लिए ज़ी मीडिया से संपर्क किया है, प्रतिक्रिया मिलते ही इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा. इस मुकदमे की पहली सुनवाई 16 जनवरी, 2026 को निर्धारित की गई है.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ
सेन ने कहा, "यह कोई अकेला विवाद नहीं है. यह एक कानूनी मिसाल कायम करने की लड़ाई है. बड़ी कंपनियों को किसी कलाकार के काम को लूटने, उसका दुरुपयोग करने, उसे अपनी तथाकथित 'सुपर एक्सक्लूसिव' सामग्री के रूप में पुनः ब्रांड करने और बेखौफ होकर उसका व्यावसायिक शोषण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. यह मुकदमा जवाबदेही तय करने, कानून को लागू करने और एक निश्चित सीमा तय करने के बारे में है, जिसे दशकों पहले लागू किया जाना चाहिए था. मुझे भारतीय न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और मुझे पूरा विश्वास है कि अदालत न्याय करेगी."
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब ज़ी मीडिया ने बिना पूर्व सहमति या स्रोत बताए उनके काम का इस्तेमाल किया है. नेटवर्क की बंगाली समाचार वेबसाइट ज़ी 24 घंटा ने कथित तौर पर 2014 के जादवपुर विश्वविद्यालय विरोध प्रदर्शन के दौरान सेन द्वारा खींची गई तस्वीरों को बिना स्रोत बताए या उनकी सहमति के पब्लिश किया था. सेन ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने नेटवर्क से सीधे तौर पर इस बारे में बात की, तभी नेटवर्क ने उल्लंघन स्वीकार किया और उन्हें भुगतान करने का फैसला किया.
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