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अखलाक हत्याकांड: यूपी सरकार न्याय के पक्ष में या अन्याय के
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा की अदालत में 2015 में हुए मोहम्मद अखलाक हत्याकांड के सभी अभियुक्तों के खिलाफ केस को वापस लेने की अर्जी दाखिल की है. इसके बाद से यह केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है. दरअसल, 28 सितंबर 2015 की रात में दादरी के बिसाहड़ा गांव में यह अफ़वाह फैली कि 50 वर्षीय अखलाक ने अपने घर में गोमांस रखा है. इसके बाद दूसरे समुदाय के लोगों की एक भीड़ लाठी, डंडे व अन्य हथियार लेकर उनके घर में घुस गया. यह भीड़ गाय को मारने और उसका मांस खाने का आरोप लगाकर अखलाक और उनके बेटे को पीटने लगी. इस घटना में अखलाक की मौत हो गई और बेटे दानिश को गंभीर चोटें आईं.
केस की पैरवी कर रहे वकील यूसुफ सैफी का कहना है कि वह कोर्ट में परिवार की लड़ाई जारी रखेंगे.
हम अखलाक के घर बिसाहड़ा भी पहुंचे, जहां अखलाक और उनके भाई का घर फिलहाल बंद है और लगभग खंडहर में तब्दील हो चुका है. इस बीच हमारी बात इस मामले 24 महीने जेल में रहे एक अभियुक्त के पिता से भी हुई. हालांकि, उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया. लेकिन वो हमें बताते हैं कि कैसे इस घटना के बाद से उनके बेटे की पढ़ाई और करियर सब तबाह हो गया.
बता दें कि 2015 की इस घटना के 3 महीने बाद यानी दिसंबर, 2015 में पुलिस ने चार्जशीट दायर की. मामले में 28 सितंबर 2015 को अखलाक की पत्नी इकरामन की शिकायत पर रुपेंद्र, विवेक, सचिन, हरिओम, श्रीओम, विशाल, शिवम, संदीप, सोरभ, गोरव और 4-5 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी. बाद में अन्य नाम जोड़े गए. जिसमें 15 लोगों को आरोपी बनाया गया. बाद में इस मामले में अभियुक्तों की संख्या 19 हो गई. साल 2016 में एक अभियुक्त की मौत हो गई. वर्तमान में सभी 18 आरोपी जमानत पर बाहर हैं.
इस बारे में अखलाक के छोटे भाई जान मोहम्मद कहते हैं कि अगर इस तरह से हत्या के केस वापस होने लगे तो देश में अराजकता फैल जाएगी, सरकार का यह निर्णय अफसोसजनक है.
तब दिल्ली से करीब 50 किलोमीटर दूर हुई इस घटना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए. इस घटना को 'मॉब लिंचिंग' का नाम दिया गया. घटना का असर इतना व्यापक था कि कई बुद्धिजीवियों ने सरकार से मिले सम्मान वापस लौटा दिए. इनमें से एक अशोक वाजपेयी से हमने बात की. साथ ही परिवार के वकील युसूफ सैफी, बरामद मांस, अखलाक के परिवार के खिलाफ गोवध क़ानून के तहत दर्ज हुआ केस और वर्तमान में परिवार की स्थिति कैसी है, इस पर विस्तार से बात की.
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला पूर्व के बयानों से एकदम अलग है, जब सरकार का यह दावा था कि कानून अपना काम करेगा और दोषियों को सजा मिलेगी. लेकिन अब इस फैसले के बाद यह संदेश जा रहा है कि सरकार अब इस मामले में एक पक्ष के साथ खड़ी है. केस से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है. देखते हैं कि अदालत इस पर क्या निर्णय लेती है. अब सबकी नजरें इस मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर पर टिकी हैं.
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