हवा का हक़
पाल्यूशन हॉटस्पॉट: सरकारी दावा और ग्राउंड रियलिटी में जमीन आसमान का अंतर
दिल्ली में वायु प्रदूषण गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है जिसको देखते हुए ग्रैप-3 लागू कर दिया गया है. वहीं कक्षा एक से लेकर पांच तक के बच्चों की क्लासेज़ हाइब्रिड मोड में चल रही हैं. वहीं दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के दावे कर रही है. सरकार ने दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए कुल 800 करोड़ का बजट बनाया है, जिसके अनुसार शॉर्ट टर्म एक्शन प्लान के रूप में दिल्ली के सभी 13 पॉल्यूशन हॉटस्पॉट पर पानी का छिड़काव, सड़कों की मरम्मत और कूड़े के निस्तारण जैसे कुल 9 पॉइंट का एक्शन प्लान भी बनाया गया है.
इस रिपोर्ट में हमने दिल्ली सरकार द्वारा पॉल्यूशन हॉटस्पॉट पर बनाए गए एक्शन प्लान का ज़मीनी जायज़ा लिया. हमने इसके लिए आनंद विहार और वजीरपुर का दौरा किया. आनंद विहार में हमें पानी का छिड़काव देखने को मिला लेकिन इसके बावजूद वहां पर धूल उड़ती नजर आई और लोग वायु प्रदूषण से काफी परेशां नज़र आए. वहीं वजीरपुर एक इंडस्ट्रियल एरिया है. हम वहां पहुंचे तो उस पूरे क्षेत्र में धुल के कारण चारों तरफ धुंध छाई थी. साथ ही सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर और सड़कों पर गड्ढे बने हुए थे.
स्थानीय लोगों ने बातचीत में बताया कि वहां पर न पानी के टैंकर द्वारा कोई छिड़काव किया जाता है और न ही सड़को की नियमित रूप से सफाई होती है. हमने दिल्ली के नो एक्शन पॉइंट्स में से सभी की एक-एक करके जांच की तो पता चला कि सरकारी दावे, ज़मीनी हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाते. हमने ग्राउंड पर क्या देखा जानने के लिए देखिए यह रिपोर्ट-
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