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यमुना में तैरते मृत जानवर, गिरते नाले और दिल्ली सरकार की ‘नकली’ सफाई
दिल्ली की भाजपा सरकार दावा कर रही है कि उसने छठ महापर्व के मौके पर यमुना से प्रदूषण को कम कर दिया है. अब पानी पीने लायक भले न हो लेकिन छठ व्रतियों के नहाने और आचमन लायक जरूर हो गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से लेकर तमाम मंत्रियों तक का यही दावा है. दूसरी ओर विपक्षी दल आम आदमी पार्टी है. जो इन दावों की लगातार अपने तरीके से पोल खोल रही है. कभी वह ‘नकली’ घाट को सामने लाती है तो कभी पानी की बोतलें भर मुख्यमंत्री को चैलेंज देती है.
इस बीच हमने यमुना की इस सफाई वाले दावे की पड़ताल की. हमने पाया कि हजारों लीटर अनुपचारित सीवेज का पानी नालों के जरिए यमुना में लगातार मिल रहा है. वहीं, दूसरी तरफ मरे हुए जानवरों की लाशें भी इसी यमुना में सड़ती नजर आईं.
वजीराबाद के रहने वाले अरविंद कुमार छठ मनाने से पहले नदी के हालात का जायजा लेने आए थे. हमसे बातचीत में उन्होंने कहा, “एक तरफ सरकार कह रही है कि हमने यमुना को साफ कर दिया है और दूसरी तरफ यहीं वजीराबाद की कॉलोनी से निकला हुआ नाले का पानी इसमें मिल रहा है. सोचिए अगर हमारा परिवार इस प्रदूषित पानी में पूजा करेगा तो यह कितना बड़ा अनर्थ हो जाएगा.”
वजीराबाद में नियमित तौर पर यमुना किनारे मछली पकड़ने का काम करने वाले मछुआरों का कहना है कि गंदगी में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि पानी के साफ दिखने की वजह पीछे से यमुना में ज्यादा पानी का छोड़ा जाना है. जैसे ही छठ का त्योहार बीतेगा तो पानी का बहाव कम होगा और यमुना फिर से काली हो जाएगी.
हमने अपनी पड़ताल और सरकारी आंकड़ों के जरिए तस्दीक में पाया कि हथिनिकुंड बैराज से बीते दिनों में काफी मात्रा में पानी छोड़ा गया है. सवाल है कि आखिर दिल्ली सरकार ऐसा दावा क्यों कर रही है?
देखिए इस दावे की पड़ताल पर हमारी ये खास रिपोर्ट.
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