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लखनऊ में दो पत्रकारों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज
लखनऊ में दो पत्रकारों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज की गई हैं. पहली एफआईआर 8 सितंबर को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, लखनऊ में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर विकास श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज की गई है, जबकि दूसरी एफआईआर 16 सितंबर को हजरतगंज थाने में अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज की गई है. पहली शिकायत एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी द्वारा की गई है, जबकि दूसरी एफआईआर धर्मपाल नामक व्यक्ति द्वारा कराई गई है.
7 सितंबर को दैनिक भास्कर डिजिटल पर रिपोर्टर विकास श्रीवास्तव की बाइलाइन से एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी, जिसका शीर्षक था, "भास्कर एक्सक्लूसिव: 'साहब हाथ पकड़ते हैं, कमरे में ले जाते हैं': ACS के खिलाफ PMO तक शिकायतें, डायरेक्टर का CS को पत्र – यह छवि खराब करने की कोशिश".
इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बीएल मीणा (1991 बैच) पर महिला कर्मचारियों द्वारा यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. बीएल मीणा वर्तमान में अपर मुख्य सचिव– उद्यान, खाद्य प्रसंस्करण एवं रेशम विभाग के पद पर कार्यरत हैं. रिपोर्ट प्रकाशित होने के एक दिन बाद अधिकारी ने विकास श्रीवास्तव के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज करवाई. शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें दैनिक भास्कर के माध्यम से ब्लैकमेल किया गया, विकास श्रीवास्तव द्वारा उनके खिलाफ भ्रामक और झूठी सूचनाएं प्रसारित की गई हैं. रिपोर्ट में जिन महिला कर्मचारी का हवाला दिया गया है, वह विभाग में कार्यरत ही नहीं है. इस शिकायत में दैनिक हंट एप पर प्रसारित सामग्री को भी तुरंत हटाने की मांग की गई है.
इसके बाद विकास श्रीवास्तव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 356(3), 352(3) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इस मामले में हमने विकास श्रीवास्तव से भी बात करने की कोशिश की. हालांकि, उनसे संपर्क नहीं हो सका.
16 सितंबर को दर्ज दूसरी एफआईआर
दूसरी एफआईआर यूट्यूब चैनल टॉप सीक्रेट चलाने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ हजरतगंज थाने में दर्ज की गई है. एफआईआर में शिकायतकर्ता धर्मपाल ने आरोप लगाया है कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत उनके ट्विटर हैंडल से झूठे एवं भ्रामक तथ्यों के आधार पर आम जनमानस और नवयुवकों को सरकार के विरुद्ध भड़काने, वर्ग विद्वेष फैलाने तथा दंगा कराने की सोची-समझी साजिश की गई है. साथ ही अभिषेक ने यह सामग्री तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत की, जिससे सरकार एवं पुलिस की छवि आमजन के बीच खराब की जा सके और कानून-व्यवस्था को असफल तथा पुलिस को लापरवाह एवं संवेदनहीन दिखाने का कुत्सित प्रयास किया. इसका उद्देश्य जनता के मन में उनके प्रति रोष उत्पन्न करना है, जिससे तनाव और सनसनी का माहौल बन रहा है.
इस एफआईआर में बीएनएस की धारा 61(2)(B), 353(1)(b) और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
दरअसल, गोरखपुर में कथित पशु तस्करों द्वारा नीट की तैयारी कर रहे 19 वर्षीय छात्र की हत्या कर दी गई थी. इस घटना को लेकर इलाके में पहले से ही तनाव है. अभिषेक उपाध्याय ने इस मामले पर एक वीडियो शेयर की, जिसमें वह मृतक के पिता का इंटरव्यू लेते हुए नजर आते हैं. साथ ही उन्होंने कुछ समाचार रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट्स और टेक्स्ट पोस्ट भी साझा किए, जिन्हें लेकर यह एफआईआर दर्ज की गई है.
वहीं, एफआईआर को लेकर अभिषेक उपाध्याय ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत से कहा, "यह मेरे खिलाफ हजरतगंज थाने में दर्ज तीसरी एफआईआर है. मेरी रिपोर्ट्स का असर होता है, इसीलिए मुझे लगातार टारगेट किया जा रहा है. मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कई करीबी अधिकारियों पर स्टोरी की है, जिसके बाद उन्हें पद से हटाना पड़ा. ऐसा करके अब मुझे चुप कराने की कोशिश हो रही है."
बता दें कि अभिषेक उपाध्याय पर यह हजरत गंज थाने में तीसरी एफआईआर दर्ज की गई है. सबसे पहले उन पर 4 सितंबर 2023 को दूसरी एफआईआर 20 सितंबर 2024 और जबकि ताजा अखबार बीते 8 सिंतबर को दर्ज हुई है. तीनों एफआईआर थाना हजरतगंज में दर्ज की गई हैं.
क्या कहती है पुलिस?
इस पर हजरतगंज के थाना प्रभारी विक्रम सिंह कहते हैं कि यह हमारे यहां अभिषेक के खिलाफ तीसरी एफआईआई दर्ज हुई है. दो मेरे कार्यकाल में और एक मुझसे पहले. यह एफआईआर किसी धर्मपाल नामक शख्स ने दर्ज कराई है. गोरखपुर में कोई कांड हुआ था इन्होंने उसका फर्जी वीडियो पोस्ट किया था. जिसमें कोई वीडियो है और घटना का जिक्र है गोरखपुर की, उस संबंध में मुकदमा लिखा गया है. इसी से संबंधित शिकायत पर हमने एफआईआर दर्ज की है. आगे वह यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह एफआईआर वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर लिखी गई है.
वहीं, दैनिक भास्कर के रिपोर्टर विकास श्रीवास्तव के मामले में दर्ज हुई एफआईआर की जांच कर रहे थाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर दीपक पांडेय कहते हैं कि हम इस मामले में जांच कर रहे हैं. अभी पत्रकार विकास श्रीवास्ताव का बयान दर्ज करना बाकी है.
पांडेय बताते हैं कि आईएएस अधिकारी की शिकायत के आधार पर अभी तक जो भी जांच की गई है, उसमें ऐसा कुछ भी नहीं मिला है जैसा कि शिकायत में दावा किया गया है. हमने इस बारे में आईएएस अधिकारी से तो बात कर ली है. साथ ही विकास से बात होने पर जांच पूरी होगी.
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