सांसद निशिकांत दुबे ने अपने ट्वीट में एक 'महान पत्रकार' के कथित आईटीआर दस्तावेज को शामिल किया है.
Khabar Baazi

भाजपा सांसद दुबे ट्वीट कर रहे एक के बाद एक आईटीआर, निशाना हैं पत्रकार

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे ने हाल ही में कई ट्वीट के माध्यम से कथित रूप से कुछ पत्रकारों के आयकर रिटर्न (आईटीआर) दस्तावेजों को सार्वजनिक किया है. उनका दावा है कि इन पत्रकारों की आय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को "गाली देने" से करोड़ों में बढ़ गई. फिलहाल, दुबे के इन ट्वीट्स ने राजनीतिक और मीडिया जगत में हलचल मचा दी है. जहां सांसद के इस कदम को गोपनीयता का उल्लंघन और संसदीय आचरण के खिलाफ बताया जा रहा है.

मालूम हो कि दुबे झारखंड के गोड्डा से सांसद हैं. उन्होंने बीते दिन अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक पोस्ट में आईटीआर दस्तावेज की तस्वीर साझा की, जिसमें किसी के नाम का उल्लेख नहीं था. उन्होंने लिखा, "बूझो तो जानें, यह किस महान पत्रकार का इनकम टैक्स रिटर्न है, नौकरी में 18 लाख, नौकरी छोड़ते ही यानि मोदी जी/ भाजपा को गली गली में घूमकर गाली देते ही करोड़ों में. यही है असली सच्चाई." 

दस्तावेज के अनुसार, कर योग्य आय 2019 में 18.9 लाख रुपये से बढ़कर 2021-22 में 1.2 करोड़ रुपये हो गई और फिर 2022-23 में 62.7 लाख रुपये पर सिमट गई. सांसद ने इस दौरान लोगों से पत्रकार के नाम का अनुमान लगाने को कहा, लेकिन स्पष्ट रूप से किसी का नाम नहीं लिया.

दुबे यहीं नहीं रुके हैं, वो कल से लगातार कथित तौर पर पत्रकारों की आईटीआर ट्वीट कर रहे हैं. एक अन्य ट्वीट में उन्होंने एक और पत्रकार को निशाना बनाया और कहा, “झूठे दूसरे के करोड़ों के आईटीआर रिटर्न को अपना कह रहा है, रिटर्न लाख में लेकिन मकान 4 करोड़ का?” 

आज सुबह फिर दुबे ने एक ट्वीट किया. जिसमें  उन्होंने कहा, "बड़े ईमानदार पत्रकार हैं, वैसे भाई कांग्रेसी है, बैंक का एक खाता संभालना मुश्किल है, साहब का एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, दूसरा खाता कोटक महिंद्रा और स्टेट बैंक में खाता है, नौकरी छोड़ो पांचों उंगली घी में.”

दुबे के इन पोस्ट्स पर गुरुवार से ही पत्रकारिता जगत से तीखा प्रतिक्रिया देखने को मिली. पत्रकार अभिसार शर्मा ने दुबे के पोस्ट को कोट करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को टैग किया और कहा, "जो गोपनीय दस्तावेज़ और टैक्सपेयर्स की डिटेल्स सरकार के पास भरोसे (fiduciary capacity) में होती हैं, वही अब सार्वजनिक मंच पर ट्वीट की जा रही हैं और वो भी किसी और के जरिए नहीं बल्कि एक सांसद द्वारा."  उन्होंने आयकर विभाग को भी टैग किया और दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की बात कही. 

वहीं, वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने इस ट्वीट को चिंताजनक बताते हुए कहा, "बहुत परेशान करने वाली खबर है. क्या अब बीजेपी सबके आईटीआर निकाल कर टारगेट करने वाली है? किसी की मेहनत की कमाई को इस तरह से क्रिमिनलाइज किया जाएगा? क्या सीबीडीटी का बीजेपी में विलय हो गया है? आखिर निशिकांत दुबे के पास ये जानकारी कहां से आई? वे किसी भी नागरिक का आईटीआर कैसे सार्वजनिक कर सकते हैं? प्रधानमंत्री की डिग्री प्राइवेट हो जाती है और एक पत्रकार का आईटीआर पब्लिक? निर्मला जी बताइये आपका मंत्रालय कौन चला रहा है? आप या निशिकांत दुबे?”

पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने लिखा, “जब कोई सत्तारूढ़ सांसद मनमानी करने लगे. अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सामान्य नागरिक को सार्वजनिक मंच पर परेशान करने लगे. मीडिया और समर्थकों का एक वर्ग इसपर वाह वाह करने लगे तो चिंतित हो जाना चाहिए. आप आक्रोश को और बढ़ा रहे हैं. यह कतई ठीक नहीं है. जो इतिहास भूलता है वह उसे दोहराने का अभिशाप भोगता है!.”

पत्रकार अरविंद गुणसेकर ने लिखा, “क्या इसी भाजपा सरकार ने चुनावी बॉन्ड मामले में सर्वोच्च न्यायालय में यह तर्क नहीं दिया था कि आयकर रिटर्न (आईटीआर) को सार्वजनिक करना निजता के अधिकार का उल्लंघन है? आईटीआर को सार्वजनिक करना आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 138 का उल्लंघन है.” 

वरिष्ठ पत्रकार नितिन सेठी ने लिखा, “सत्तारूढ़ भाजपा का एक सांसद सरकारी रिकॉर्ड से एक पत्रकार की निजी जानकारी अवैध रूप से निकालता है, ताकि उसके खिलाफ माहौल बनाया जा सके. वहीं, प्रधानमंत्री खुद उस तथ्य को उजागर होने से रोकते हैं, जो पहले से ही शपथपत्र में दर्ज है. और वह भी किसलिए? एक ऐसी वैध आमदनी के लिए, जिस पर बाकायदा टैक्स चुकाया गया है.  याद रखिए, यही सरकार डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट भी पास कर चुकी है, जिसके जरिए पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को आरटीआई या अन्य माध्यमों से जानकारी हासिल कर सरकार को जवाबदेह ठहराने से रोका जाएगा. यानी हमारे सार्वजनिक सेवक अब खुद को मालिक समझने लगे हैं.”

वहीं, पत्रकार सर्वप्रिया सांगवान ने लिखा, “क्या लोगों का डेटा सरकार के पास सुरक्षित रहता है? स्पष्ट है..” 

पत्रकार मनीष ने लिखा, "आपने बिना नाम लिए जिस भी पत्रकार का आयकर रिटर्न सार्वजनिक किया हैं उससे साबित हैं कि इस देश में हर भारतीय का इनकम टैक्स रिटर्न सुरक्षित और अब गोपनीय नहीं और इस लीक और ग़ैर क़ानूनी काम के पीछे सत्तारुढ़ दल के एक सांसद हैं."

कानूनी प्रावधान

भारत में किसी का आयकर रिटर्न (आईटीआर) लीक करना बड़ा अपराध है, जो कि निजता और गोपनीयता का उल्लंघन है. आयकर कानून की धारा 138 और 280 के तहत बिना अनुमति आईटीआर साझा करने पर 6 महीने जेल और जुर्माना हो सकता है. IT एक्ट की धारा 72 और 72A में डिजिटल लीक पर 3 साल कैद व 5 लाख जुर्माना. वहीं, डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में भी 250 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है. इसके अलावा ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट में भी 3 साल तक जेल का प्रावधान है कानूनी रूप से ये सवाल जरूर है कि दुबे जिस तरह से ट्वीट कर रहे हैं वो कौन से कानून के कौन-कौन से प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं. 

लेकिन दुबे के लगातार ट्वीट्स से यह सवाल भी उठता है कि एक सांसद, जो संविधान की शपथ लेते हैं, कैसे ऐसी गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक कर सकते हैं? दुबे के इस कदम से न केवल गोपनीयता के अधिकार पर सवाल उठे हैं, बल्कि यह राजनीतिक विरोधियों या आलोचकों को डराने का माध्यम भी लगता है. 

सांसद के रूप में दुबे की जिम्मेदारी है कि वे सार्वजनिक पद का सम्मान करें और कानून का पालन करें. लेकिन इस घटना से लगता है कि राजनीतिक लाभ के लिए व्यक्तिगत जानकारी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है. क्या संसद या संबंधित विभाग इस पर कार्रवाई करेंगे? यह देखना बाकी है, लेकिन इस विवाद ने मीडिया स्वतंत्रता और गोपनीयता के मुद्दे को फिर से बहस का विषय बना दिया है.

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