Khabar Baazi
ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ पर हिंदी अख़बारों की सुर्खियां
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक बार फिर तनाव की लहर दौड़ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है. यह फैसला न केवल आर्थिक रूप से झटका देने वाला है, बल्कि कूटनीतिक रूप से भी एक चुनौती बनकर सामने आया है.
इस खबर ने भारतीय मीडिया, में खास जगह बनाई है. हिंदी के प्रमुख अखबार दैनिक भास्कर ने तो बेहद तीखे अंजाद में लिखा है “टैरिफ 50 फीसदी, धोखा 100 फीसदी.” देश के अन्य बड़े अखबारों ने भी इस फैसले को अपने अपने तरीके से प्रकाशित किया है.
हमने हिंदी के पांच प्रमुख अखबारों में ट्रम्प और टैरिफ को लेकर क्या क्या छपा है इसका विश्लेषण किया है.
इस खबर को दैनिक जागरण ने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया है. खबर का शीर्षक है- ट्रंप ने भारत पर लगाया 25% अतिरिक्त शुक्ल.
राजीव कुमार के नाम से छपी इस खबर में लिखा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी धमकी पर अमल करते हुए बुधवार को भारतीय वस्तुओं के अमेरिका में प्रवेश पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया. अखबार ने ट्रंप की चेतावनी को भी प्रमुखता से छापा है कि अगर भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने का कदम उठाता है, या अगर मास्को यूक्रेन के साथ युद्धविराम पर सहमत हो जाता है, तो वह आदेश में संशोधन कर सकते हैं. साथ ही यह चेतावनी भी दी की अगर रूस या भारत ने जवाबी कार्रवाई की तो अमेरिका और भी कठोर कार्रवाई करेगा.
इसी से संबंधित खबरों को अखबार ने पेज नंबर 18 पर भी जगह दी है. जिसका का शीर्षक है- अमेरिका और यूरोपीय संघ खरीद रहे रूस से एलएनजी, भारत को दे रहे हैं उपदेश.
लिखा है कि पश्चिमी देशों खासतौर पर अमेरिका व यूरोपीय संघ (ईयू) की तरफ से रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत को लगातार उपदेश दिया जा रहा है और आर्थिक दंड लगाने की भी धमकी दी जा रही है लेकिन हकीकत यह है कि ये देश अभी भी रूस से लगातार अपनी जरूरत की चीजें खूब खरीद रहे हैं.
हिन्दुस्तान अखबार ने भी इस खबर को पहले पन्ने पर जगह दी है. खबर का शीर्षक है- ट्रंप का टैरिफ 50% तक पहुंचा.
अखबार ने राहुल गांधी के बयान को भी जगह दी है जिसमें उन्होंने कहा है- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने को ट्रंप का आर्थिक ब्लैकमेल करार दिया. राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत को एक अनुचित व्यापार समझौते के लिए धमकाने का प्रयास है.
इसके अलावा उन पांच देशों की भी सूची जारी की है जो अमेरिकी दबाव में नहीं झुके. इनमें भारत, चीन, ब्राजील, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका का जिक्र किया है.
अमर उजाला अखबार लिखता है कि ट्रंप ने पूर्व में घोषित 25 फीसदी टैरिफ लागू होने से 14 घंटे से भी कम समय में अतिरिक्त टैरिफ लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए.
इस खबर का शीर्षक है- अमेरिका ने भारत पर थोपा 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ.
खबर के मुताबिक ब्राजील को छोड़कर भारत पर अमेरिकी टैरिफ अब दुनिया में सबसे ज्यादा है. ब्राजील पर भी 50 फीसदी टैरिफ है. चीन पर 30 फीसदी और पाकिस्तान पर 19 फीसदी टैरिफ लगाया है. ट्रंप ने अपने प्रशासन को यह पता लगाने के लिए कहा है कि क्या अन्य देश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूसी तेल खरीद रहे हैं. ट्रंप ने इन देशों पर भी दंडात्मक शुल्क लगाने की धमकी दी है.
दैनिक भास्कर अखबार ने सबसे मजेदार शीर्षक दिया है- टैरिफ 50%... धोखा 100%
अखबार ने उन सामनों की सूची जारी की है जिन पर सबसे ज्यादा टैरिफ का असर होगा. इस मुद्दे पर एक्सपर्ट की राय को भी प्रमुखता से छापा है. दैनिक भास्कर ने अपने संपादकीय पेज पर इस मुद्दे पर कोलंबिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नीरज कौशल के एक लेख को जगह दी है. जिसका शीर्षक है- ट्रंप को टैरिफ थोपने का अधिकार नहीं हैं! साथ ही लिखा है अमेरिकी संविधान जिन हालात में इसके अधिकार देता है, वो मौजूदा मामले में लागू नहीं होते.
वे लिखती हैं कि कानून में टैरिफ शब्द का उल्लेख तक नहीं… अमेरिकी जजों ने ट्रंप- टैरिफ को आपात शक्तियों का दुरुपयोग बताया है. अपने टैरिफ को न्यायोचित ठहराने के लिए ट्रंप ने 1977 में जिस आईईईपीए कानून का सहारा लिया, उसमें 'टैरिफ' शब्द का उल्लेख तक नहीं है.
जनसत्ता ने अपने पहले पृष्ठ पर यह प्रमुख खबर प्रकाशित की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महज 24 घंटे के भीतर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा कर दी है. अखबार ने इसकी हेडलाइन दी है- "चौबीस घंटे के भीतर ट्रंप ने लगाया 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क; भारत ने कहा - दुर्भाग्यपूर्ण".
इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह निर्णय "अत्यंत अनुचित और अविवेकपूर्ण" है, और भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा.
अखबार ने राहुल गांधी के बायन को भी जगह दी है- उन्होंने कहा कि "अमेरिका आर्थिक ब्लैकमेल का प्रयास कर रहा है, जिसे भारत स्वीकार नहीं करेगा.
Also Read
-
Behind JNU’s latest ‘media trial’: What happened on the night of January 5?
-
‘Disastrous’: Modi govt allows commercial plantations in forests, drops safeguards
-
Hostel for SC/ST girls in Ghaziabad now ‘houses only snakes, not students’
-
SC’s baffling bail order rattled the press. Voter rolls exercise should terrify it
-
बुलडोज़र से बैरिकेड तक: तुर्कमान गेट में चप्पे-चप्पे पर तैनात सुरक्षाबल और 'शांति का भ्रम' पैदा करता सन्नाटा!