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मध्य प्रदेश के पत्रकारों को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश के दो पत्रकारों को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी. पत्रकारों ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) असित यादव सहित स्थानीय पुलिस पर हिरासत में हिंसा, जाति-आधारित दुर्व्यवहार और जान से खतरा होने का आरोप लगाया था.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने किसी और तरह राहत के लिए दोनों पत्रकारों की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. साथ ही उन्हें इसके लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने को कहा.
"हम याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं. हालांकि, आरोपों को देखते हुए, हम याचिकाकर्ताओं को आज से दो सप्ताह के भीतर संबंधित हाईकोर्ट जाने की अनुमति देते हैं. जब तक याचिकाकर्ता हाईकोर्ट नहीं जाते और अंतरिम राहत का सवाल है, तो याचिकाकर्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा." सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा.
गौरतलब है कि शशिकांत जाटव और अमरकांत सिंह चौहान ने तत्काल सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की थी.
जाटव और चौहान ने आरोप लगाया कि एसपी यादव और उनके अधीनस्थों द्वारा उनका अपहरण किया गया, हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें जातिवादी गालियां दी गईं.
याचिका के अनुसार, यह घटना 1 मई को हुई जब पत्रकारों ने चंबल नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन गतिविधियों की रिपोर्ट की, जिसे कथित तौर पर रेत माफिया द्वारा पुलिस की मिलीभगत से अंजाम दिया गया.
इससे पहले मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया था. साथ ही दो हफ्ते के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया.
पत्रकारों के इस मामले को विस्तार से समझने के लिए पढ़िए ये रिपोर्ट.
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