Ground Report
गुजरात के उन परिवारों की आपबीती जिन्हें ट्रंप सरकार ने वापस भेजा
20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में राष्ट्रपति पद की शपथ ली. इसके दो सप्ताह बाद ही अवैध प्रवासियों को उनके वतन भेजने का सिलसिला शुरू कर दिया.
इसमें भारत के लोग शामिल थे जो अवैध रूप से अमेरिका की सीमा में दाखिल हुए थे. अमेरिका के तीन हवाई जहाज ऐसे भारतीयों को लेकर आए. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान जितने लोगों को अमेरिका ने वापस भेजा उसमें से तक़रीबन 38 प्रतिशत पंजाब से, हरियाणा के 33 प्रतिशत और गुजरात के 22 प्रतिशत थे. बाकी अन्य राज्यों से थे.
पंजाब और हरियाणा के जो लोग वापस आए उसमें से कुछ ने मीडिया से बात की. दोनों राज्यों में एजेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुईं. कुछ एजेंट्स की गिरफ्तारी भी हुईं, पर गुजरात में ऐसा नहीं हुआ. गुजरात में जो लोग अमेरिका से वापस आए उनपर ‘ऊपर’ से दबाव है कि मीडिया से बात नहीं करनी है. यह दबाव पुलिस और एजेंट्स का है.
गुजरात के 72 लोग वापस आए हैं. इसमें 58 लोग परिवार के साथ गए थे और बाकी अकेले. जो पूरा का पूरा परिवार अमेरिका गया, उनमें चार से पांच लोग शामिल थे. जैसे पत्नी-पति और उनके बच्चे. ऐसा ही एक परिवार है, जगदीश पटेल का है. वो पत्नी और दो बच्चों के साथ अवैध रूप से अमेरिका गए थे. उन्हें अमेरिकन अधिकारियों ने बॉर्डर क्रॉस करने के बाद हिरासत में लिया था. पटेल के मुताबिक उस वक़्त वहां 12 गुजराती परिवार पहले से हिरासत में थे.
न्यूज़लॉन्ड्री ने गुजरात के मेहसाणा, गांधीनगर, साबरकांठा के उन छह परिवारों से मुलाकात की. जो अवैध रूप से अमेरिका गए थे. इसमें किसी परिवार से पांच तो किसी से छह लोग थे. एक 60 वर्षीय बुजुर्ग अपने परिवार के पांच सदस्यों के साथ अमेरिका गए थे. उनका आधा परिवार पहले से अवैध रूप से अमेरिका में रह रहा है.
यहां हम जिन परिवारों से मिलने पहुंचे उसमें से ज़्यादातर ने बात करने से इनकार कर दिया. मेहसाणा के एक परिवार के पांच लोग अवैध रूप से अमेरिका गए थे. जब हम उनके घर पहुंचे तो बताया गया कि वहां से आने के बाद घर के युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है.
वहीं, दूसरे परिवारों ने कुछ न कुछ बहाना बनाकर बात करने से इनकार कर दिया. दो परिवार के सदस्य बात करने को राजी हुए वो भी पहचान छुपाकर. वो कह रहे थे कि हमें मीडिया से बात नहीं करने के लिए कहा गया है.
गांधीनगर जिले का कलोल, अवैध रूप से अमेरिका जाने वालों का हब है. इसके आसपास के कई गांव ऐसे हैं जहां गांव की आधी से ज़्यादा आबादी अमेरिका में रहती है. यहीं का रहने वाला कपल, सुनील गोहिल और उनकी पत्नी नैना गोहल, अपने तीन वर्षीय बच्चे के साथ अमेरिका गए थे. यह इनकी दूसरी कोशिश थी. इससे पहले साल 2024 के ही शुरूआती महीने में ये अमेरिका जाने के लिए निकले थे. पांच महीने तक तुर्की में रहे लेकिन आगे का रूट बंद होने के कारण वापस लौटना पड़ा.
कुछ ही महीने बाद दिसंबर 2024 के आखिरी सप्ताह में ये फिर अमेरिका के लिए निकले. इस सफर के लिए एजेंट से 80 लाख रुपए में तय हुए. अमेरिका पहुंचने के बाद पुलिस ने तीनों को कस्टडी में ले लिया. नैना ने बताया कि एजेंट ने हमें बताया था कि यह प्रक्रिया का हिस्सा है. वहां 10-15 दिन रहने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. नैना और उनके बच्चे को एक कमरे में वहीं उनके पति को अलग कमरे में रखा गया. उसके बाद एक दिन उन्हें वापस भारत भेज दिया गया.
नैना कहती हैं, ‘‘हमने बच्चे के भविष्य के लिए अमेरिका जाने का फैसला किया था. यहां तो अब जो अमेरिका में नहीं हैं, उनकी शादी में भी परेशानी आती है. अभी वो छोटा है तो सोचा अभी चले गए तो उसका भविष्य ठीक हो जाएगा लेकिन मुमकिन नहीं हो पाया. वहां पहुंचे तो सोचा चलो अमेरिकन ड्रीम पूरा हुआ लेकिन अब तो टूट गया है.’’
दूसरा परिवार जगदीश पटेल का है. पटेल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अमेरिका के लिए गए थे. इनके एक बेटे की उम्र नौ साल और दूसरे की चार साल है. पटेल बताते हैं, ‘‘जब मुझे अमेरिकन अधिकारियों ने पकड़ा और जिस जगह रखा वहां 12 परिवार गुजरात के थे. मुझे, मेरी पत्नी और बच्चों से अलग कर दिया गया था. मैं बच्चों के लिए ही अमेरिका गया था.’’
आपको कब पता चला कि वापस भारत भेज रहे हैं. इसके जवाब में पटेल कहते हैं, ‘‘कैंप में जितने पुरुष थे सबको लोहे की चैन से बांधकर जहाज में लाया गया था. हाथ और पैर लोहे से जकड़े हुए थे. कुछ लोगों को बैठने के लिए सीट मिली थी तो कुछ नीचे बैठे हुए थे. बैठे-बैठे सो रहे थे. 40 घंटे तक ऐसे ही सफर करना पड़ा. अब दोबारा जाने से डर लगता है.’’
पटेल और उनकी पत्नी को अमेरिका भेजने के लिए एजेंट ने एक करोड़ रुपए तय किए थे.
दूसरे राज्यों में जहां एजेंट्स पहले ही पैसे ले लेते हैं वहीं गुजरात में ऐसा नहीं है. जब तक व्यक्ति पहुंच न जाए तब तक सारा खर्च एजेंट्स ही करते हैं. वहां पहुंच जाने के बाद ही परिवार के लोग पैसे देते हैं. ऐसे में देखें तो जो लोग गुजरात में अमेरिका से लौटकर आएं हैं उनका एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ है.
गुजरात से बड़ी आबादी अवैध रूप से अमेरिका जाती है. सरकार इसको लेकर क्या कर रही है ये जानने के लिए हम यहां के गृहमंत्री हर्ष संघवी से मुलाकात करने पहुंचे. घंटाभर इंतजार के बाद भी वो नहीं मिले.. और दफ्तर ने हमें ये कहकर लौटा दिया कि वापस संपर्क करेंगे.
वहीं गुजरात पुलिस के एक अधिकारी ने कोई मामला दर्ज नहीं किए जाने के सवाल पर बताया कि यहां किसी ने शिकायत नहीं दी है. जो लोग यहां से गए हैं उनके पास लीगल टूरिस्ट वीजा है. उनसे हम पूछते हैं कि किसने टूरिस्ट वीजा दिया तो वो ऐसे लोगों का नाम बताते हैं जो मौजूद ही नहीं हैं. दरअसल, गुजरात में एजेंट भी परिवार का कोई सदस्य ही होता है.
यह पुलिस अधिकारी हमें एक दिलचस्प बात बताते हैं कि यहां अगले छह महीने के लिए कोई अमेरिका नहीं जा रहा है. दरअसल, यहां ज्योतिषियों ने लोगों को बताया है कि अगले छह महीने में ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं रहेंगे. उसके बाद ही लोग यहां से जाएंगे. अभी सारे रूट बंद हैं.
अमेरिका जाने की वजह, उसपर होने वाला खर्च, रास्ते की कठिनाइयां, अमेरिका में पहुंचने के बाद कैद. अमेरिकन ड्रीम पूरा होने के बाद टूट जाना. जंजीरों की जकड़ में 40 घंटे का सफर. जानिए पूरी कहानी, लोगों की जुबानी.
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