Khabar Baazi
अखबारों में छाया ‘ऑपरेशन सिंदूर’, 31 से 100 पाकिस्तानियों की मौत के दावे
6-7 मई की दरम्यानी रात में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. इसे ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया. बुधवार की सुबह हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार ने इस ऑपरेशन की पूरा जानकारी दी.
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने कुल 9 आंतकी ठिकानों पर हमला किया. कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने इनकी बारे में विस्तार से जानकारी दी. सोफिया कुरैशी ने बताया कि इन आतंकी ठिकानों का चयन ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर किया गया. इस दौरान किसी सैन्य या नागरिक ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया है और ना ही किसी नागरिक की जान इसमें गई है.
कुछ अख़बारों ने इस ऑपरेशन के बारे में कल ही ख़बर प्रकाशित कर दी थी. हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जानकारी के बाद आज सभी हिंदी अखबारों ने ऑपरेशन सिंदूर को न सिर्फ पहली सुर्खी बनाया बल्कि पूरा पन्ना इसकी जानकारी से भरा है.
दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला, दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, जनसत्ता जैसे अखबारों ने इसे खुलकर जगह दी है. इस दौरान अख़बारों ने इस ऑपरेशन में मरने वालों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे किए. 30 से लेकर 100 मौतों का आंकड़ा अखबारों की ओर से प्रकाशित किया गया है. उल्लेखनीय है कि सरकार ने इस ऑपरेशन में किसी भी आतंकी के मारे जाने की कोई सूचना अभी तक जारी नहीं की है. ना ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसी जानकारी दी गई.
दैनिक भास्कर
अखबार ने मास्टहेड ‘सेना के साहस को समर्पित’ करते हुए बड़े-बड़े अक्षरों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखा. अखबार के मुताबिक, सेना ने पाकिस्तान में 100 किलोमीटर अंदर तक जाकर मारा और 17 साल के आतंक का हिसाब 25 मिनट में कर दिया.
इसके साथ ही अखबार ने साल 2008 के मुंबई हमलों से लेकर 2025 में हुए पहलगाम जैसे आतंकी हमलों में अपना सुहाग खोने वाली महिलाओं की तस्वीर भी प्रकाशित की है. इन तस्वीरों के नीचे उन 9 ठिकानों का जिक्र है. जहां सेना ने स्ट्राइक की है. अखबार का दावा है कि इस ऑपरेशन के दौरान 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए और सैंकड़ों घायल हैं.
दैनिक जागरण
जागरण ने लिखा, ‘25 मिनट में 9 ठिकाने ध्वस्त, 70 आतंकी ढेर’. अखबार के मुताबिक, पहलगाम हमले के जवाब में भारत की 24 मिसाइलों से पाकिस्तान थर्रा गया है. इस हमले में जैश सरगना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य भी मारे गए हैं. जागरण ने 70 आतंकियों के मारे जाने की जानकारी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर बताई है. साथ ही स्पष्ट किया है कि सरकार ने इस ऑपरेशन के दौरान मरने वाले आतंकियों की संख्या नहीं बताई है.
जनसत्ता
जनसत्ता ने हेडलाइन के साथ प्रयोग किया है. उसने नापाक और नौ की संख्या को जोड़ कर हेडलाइन दी है. जनसत्ता का शीर्षक है- ऑपरेशन सिंदूर के तहत सेना की बड़ी कार्रवाई, नौपाक ठिकाने ध्वस्त. शीर्षक के नीचे लिखा है कि लक्ष्य जैश और लश्कर के आतंकी प्रशिक्षण केंद्र थे. अखबार ने पाकिस्तानी सेना के हवाले से लिखा है कि इन हमलों में कम से कम 31 लोग मारे गए और 57 अन्य घायल हैं.
नवभारत टाइम्स
नवभारत टाइम्स का शीर्षक है ‘टेरर पर अटैक’. इसके साथ ही लिखा है, ‘लश्कर, जैश, हिज्बुल आतंकियों को 9 ठिकानों पर चुन चुन के मारा.’ अखबार के मुताबिक, इस दौरान 70- 100 आतंकियों के मारे जाने का अनुमान है और कई घायल भी हैं. अखबार ने इस दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रतीक के तौर पर पहले पन्ने की हर ख़बर के शीर्षक में शामिल शब्दों में लाल रंग के चंद्रबिंदु का प्रयोग किया है.
अमर उजाला
अखबार ने मास्टहेड के बीच एक सिंदूर की कटोरी रखी है. नीचे अंग्रेजी में ऑपरेशन सिंदूर लिखा है. अखबार की मुख्य ख़बर का शीर्षक है- 25 मिनट… 24 मिसाइल, जैश और लश्कर के आतंकी मरकज ध्वस्त. अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इन हमलों में 90 आतंकी मारे गए हैं. साथ उन 9 लक्ष्यों की भी जानकारी साझा की है, जिन्हें इस ऑपरेशन के दौरान निशाना बनाया गया है.
दैनिक हिंदुस्तान
अखबार की ख़बर का शीर्षक है- ‘मिट्टी में ही मिला डाला.’ अखबार की हेडलाइन के यह शब्द पहलगाम हमले के बाद मधुबनी में दिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हिस्सा हैं. जिसमें उन्होंने कहा था कि आतंकवादियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिला देंगे. अखबार ने लिखा कि सेना इस बात को सच कर दिखाया.
आगे अखबार ने लिखा कि सेना ने पहलगाम हमले का बदला लिया. मिसाइल दागकर दहशतगर्दों के 9 ठिकाने नष्ट किए. अखबार ने इस दौरान बताया कि हमलों में पाकिस्तान के 31 दहशतगर्द मारे गए वहीं पाकिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी में 15 भारतीयों की मौत हो गई.
भ्रामक और गलत सूचनाओं के इस दौर में आपको ऐसी खबरों की ज़रूरत है जो तथ्यपरक और भरोसेमंद हों. न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करें और हमारी भरोसेमंद पत्रकारिता का आनंद लें.
Also Read
-
Too big, too costly, too far: Delhi’s new protest sites put to the test
-
‘People scared of economics’: Sarthak Pradhan on your money, GST and Fiscal Fables
-
Ex-ISRO chairman on privatisation and what left the space community ‘alarmed’
-
जंतर-मंतर क्यों जरूरी? प्रदर्शन के नए ठिकानों की पड़ताल
-
The myth of the apolitical Indian