Report
कुंदरकी उप-चुनाव: मतदान में आई अप्रत्याशित गिरावट ने बटोरी सुर्खियां
मुरादाबाद की मुस्लिम बहुसंख्यक कुंदरकी विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की जीत एक दिलचस्प नतीजा है. यहां पार्टी के उम्मीदवार रामवीर ठाकुर ने 11 मुसलमान उम्मीदवारों को 1.2 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया है.
हालांकि, ऐसा नहीं है कि भाजपा ने यह सीट पहली बार जीती हो और न ही इस चुनावी मौसम में पार्टी द्वारा जीती गई ये एकमात्र मुस्लिम बहुल सीट है. लेकिन समाजवादी पार्टी (एसपी) सहित कई विपक्षी दलों ने कुंदरकी में मतदाताओं को डराने-धमकाने, फर्जी वोटिंग और उत्पीड़न समेत मतदाताओं के दमन के कई आरोप लगाए हैं. मतदान के दिन, चार वीडियो में मतदाताओं ने पुलिस उत्पीड़न का आरोप लगाया था (यहां, यहां, यहां और यहां). एक वीडियो में एक महिला को कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी से यह कहते हुए सुना गया कि "आपको मतदान केंद्र पर बैरिकेडिंग करने का कोई अधिकार नहीं है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है."
न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि विधानसभा क्षेत्र के 435 बूथों में से कम से कम 154 बूथों पर 2019 के लोकसभा चुनावों और 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना में मतदान में 15 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट देखी गई. 2022 में इनमें से केवल 11 बूथों पर 2019 के लोकसभा चुनावों की तुलना में मतदान में गिरावट देखी गई थी, जिसमें सबसे बड़ी गिरावट 7 प्रतिशत थी.
कुंदरकी में इस बार 57.7 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2019 में 66.9 प्रतिशत और 2022 के विधानसभा चुनावों में 71.2 प्रतिशत मतदान हुआ था. सपा उम्मीदवार हाजी रिजवान को लगभग 25,000 वोट मिले, जबकि बसपा को केवल 1,099 वोट मिले. कुंदरकी में 80 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिम है, उसके बाद अनुसूचित जाति है.
एसपी के आरोपों पर चुनाव आयोग के प्रवक्ता अनुज चंदेक ने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, “हमने मुरादाबाद के एक पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया है.” जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव आयोग कोई और कार्रवाई करने जा रहा है, तो उन्होंने कहा, “मुझे वरिष्ठ अधिकारियों से पता करना होगा.”
पश्चिम बंगाल के आईपीएस अधिकारी संदीप मंडल, जिन्हें चुनाव आयोग ने कुंदरकी में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है, ने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, “हमने एसपी के आरोपों की जांच की और कुछ भी नहीं मिला.”
इस बीच, 154 बूथों, जिनमें कुल 1.37 लाख मतदाता थे, में से 147 पर मुस्लिमों का वर्चस्व है. इन 147 बूथों में से 13 पर 2022 के विधानसभा चुनावों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि 48 बूथों पर 30 से 40 प्रतिशत के बीच गिरावट दर्ज की गई.
इन 154 बूथों के अलावा 33 बूथों पर, 2022 के आंकड़ों की तुलना में कम से कम 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जिनमें से सात में मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है और 26 में हिंदुओं का दबदबा है. अन्य सभी बूथों पर मतदान में 10 प्रतिशत से कम की वृद्धि या कमी दर्ज की गई.
154 बूथों में से दो पर शून्य मतदान दर्ज किया गया- दोनों की सूची में 1,887 मुस्लिम मतदाता थे. ये बूथ नंबर 351 और 352 थे. 2022 के विधानसभा चुनावों में, बूथ 351 और 352 पर क्रमशः 79 प्रतिशत और 72 प्रतिशत मतदान हुआ था. 2019 के लोकसभा चुनावों में इन बूथों पर क्रमशः 56 प्रतिशत और 63 प्रतिशत मतदान हुआ था.
भाजपा ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर दावा किया था कि कुंदरकी और सीसामऊ सीटों पर फर्जी वोट डाले जा रहे हैं.
जब न्यूज़लॉन्ड्री ने चुनाव आयोग से मुस्लिम बहुल बूथों पर मतदान में आई गिरावट के बारे में पूछा, तो उसके प्रवक्ता अनुज चंदेक ने जवाब दिया, “हमने अभी तक कोई बूथ-वार विश्लेषण नहीं किया है.”
मुरादाबाद के जिलाधिकारी अनुज सिंह ने पहले एसपी के दावों का खंडन किया था, और कहा था कि इलाके में मतदान शांतिपूर्ण रहा. डीएम ने कहा था, "यहां चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है. एक खास पार्टी की ओर से कुछ शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनकी अधिकारियों ने पुष्टि की थी, लेकिन उनमें कोई सच्चाई नहीं पाई गई. हमारा मतदान प्रतिशत भी अच्छा है."
कुंदरकी में कई बूथ स्तर के अधिकारियों को बदल दिया गया था, जो आमतौर पर स्थानीय स्तर के सरकारी कर्मचारी होते हैं और कुछ वक्त के लिए मतदान अधिकारी के रूप में भी काम करते हैं, और मतदाता सूचियों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं.
कई आरोपों के बीच बूथ 186 सबसे अलग है, यहां 2022 के चुनावों की तुलना में 56 प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज हुई. अगस्त में यहां एक मुस्लिम बीएलओ की जगह नीलम सक्सेना को लाया गया था. उन्होंने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, "मुझे नहीं पता कि मुझे यहां क्यों नियुक्त किया गया. क्योंकि बीएलओ उसी इलाके के निवासी हैं, लेकिन मेरा घर 22 किमी दूर है. मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है क्योंकि मतदान के दिन बीएलओ को उनके बूथ से बहुत दूर बैठाया गया था. मेरी नज़र में जो एक असामान्य बात आई, वो ये थी कि हमें मतदान के दिन से पहले मतदाता सूचना पर्ची वितरित करने का काम नहीं दिया गया था. मुझे नहीं पता कि उन्हें वितरित किया भी गया था या नहीं.”
मुस्लिम आबादी वाले बूथों पर कम मतदान के बारे में पूछे जाने पर कुंदरकी में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी संत दास पंवार ने कहा, "मुझे नहीं पता क्योंकि मैंने अभी तक बूथ-वार विश्लेषण नहीं किया है."
सपा के आरोपों वाले बूथ
छह पुलिस अधिकारियों द्वारा मतदान केंद्र पर बैरिकेडिंग करने और एक मुस्लिम मतदाता की पहचान की जांच करने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया था, कि पुलिस दस्तावेजों की जांच के बहाने मतदाताओं को परेशान कर रही थी. पार्टी ने ऐसी छह अन्य घटनाओं का आरोप लगाया.
इन सात मुस्लिम बहुल बूथों में से छह में, 2022 के यूपी विधानसभा चुनावों की तुलना में मतदान प्रतिशत 37 प्रतिशत से घटकर 6 प्रतिशत रह गया.
सपा ने कुंदरकी, मीरापुर और सीसामऊ में मुसलमानों को वोट डालने से रोके जाने का आरोप लगते हुए अर्धसैनिक बलों की निगरानी में पुनर्मतदान की मांग की है.
नतीजों से हैरान होते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में “चुनावी राजनीति का सबसे विकृत रूप” दिखा है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एनडीए-भाजपा की जीत “डबल इंजन सरकार की सुरक्षा, सुशासन और जनकल्याणकारी नीतियों और समर्पित कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत” का नतीजा है.
बसपा ने भी मतदान में अनियमितताओं का आरोप लगाया. पार्टी प्रमुख मायावती ने कहा कि “जब तक कि चुनाव आयोग फर्जी मतदान को रोकने के लिए कदम नहीं उठाता”, उनकी पार्टी ने भविष्य में उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है .
अन्य निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ी सपा की शिकायत के आधार पर चुनाव आयोग ने, 20 नवंबर को वोटिंग होने वाले अन्य विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के चलते सात पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया था.
हालांकि, कुंदरकी से समाजवादी पार्टी के प्रभारी सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि “कुन्दरकी से ऐसा कोई निलंबन नहीं हुआ, जबकि हमने अपने क्षेत्र से मतदाता दमन की 250 शिकायतें दर्ज कराई थीं.”
कुंदरकी में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त तेलंगाना के आईएएस अधिकारी भारती होलिकेरी ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “मैंने आयोग को अपनी अवलोकन रिपोर्ट सौंप दी है. और मुझे मीडिया में इसके बारे में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए.”
अवधेश कुमार के सहयोग से
Also Read
-
8 decades later, Ambedkar’s warning still echoes. The republic deserves better than hero worship
-
TV Newsance 329 | Paragliding in Davos, fake Trump and a techie left to die in a Noida pit
-
Hafta 573: Funding the ‘circus’ in Davos as the net tightens on press freedom in Kashmir
-
‘How can you remove names without checking?’: Inside Prayagraj’s battle over voter lists
-
6 journalists summoned this month, ‘25’ in a year: The police trail following Kashmir’s press