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अरविंद केजरीवाल के प्रचार से कितना बदलेगा लोकसभा चुनाव?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद देर शाम तिहाड़ जेल से बाहर आ गए. जेल से बाहर आने के बाद केजरीवाल ने सबसे पहले अपने समर्थकों को संबोधित किया और अपनी रिहाई को सत्य की जीत बताया.
शनिवार सुबह की शुरुआत केजरीवाल ने कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली के दर्शन करने से की. इस दौरान उनके साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद रहे. दर्शन करने के बाद अरविंद केजरीवाल पार्टी ऑफिस पहुंचे और वहां पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया.
इस दौरान उन्होंने कहा कि इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमित शाह को के लिए वोट मांग रहे हैं क्योंकि भाजपा के संविधान के मुताबिक, 75 वर्ष की आयु के बाद नेता को रिटायर होना होता है और अगले साल सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी 75 वर्ष के हो जाएंगे. इसके बाद वह अमित शाह को प्रधानमंत्री बनाएंगे.
गौरतलब है कि केन्द्रीय एजेंसी ईडी ने केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था.
केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव प्रचार के लिए जमानत की मांग की थी. जिस पर सुनवाई के दौरान ईडी ने जमानत दिए जाने का विरोध किया. ईडी का कहना था कि चुनाव प्रचार जमानत का आधार नहीं हो सकता है क्योंकि यह कोई मौलिक अधिकार नहीं है.
याचिका पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की बेंच ने केजरीवाल को 21 दिन की जमानत देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान अपनी पार्टी के लिए प्रचार करना केजरीवाल का अधिकार है. इसके साथ ही कोर्ट ने केजरीवाल को 1 जून तक अंतरिम जमानत दे दी. उन्हें 2 जून को तिहाड़ जेल में सरेंडर करना होगा.
केजरीवाल के बाहर आने से उनकी पार्टी, इंडिया गठबंधन और लोकसभा चुनाव पर क्या असर पड़ेगा यह जानने के लिए देखिए हमारी यह वीडियो रिपोर्ट.
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