Report
पश्चिम बंगाल से चुनावी शो: प्रधानमंत्री का सांप्रदायिक भाषण, विरासत कर, शिक्षक भर्ती घोटाला और ममता बनर्जी
इस बार का मॉर्निंग शो हमने पश्चिम बंगाल से किया है. यहां हमने कोलकाता के जादवपुर और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्रों से बात की. जादवपुर विश्वविद्यालय देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक है. इन दोनों विश्वविद्यालयों के छात्र अपनी वैचारिक और राजनीतिक सक्रियता के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं. इस बातचीत के दौरान हमने छात्रों से बंगाल की राजनीति और जारी लोकसभा चुनावों की गहमा-गहमी पर विस्तार से बातचीत की.
इस बातचीत में भ्रष्टाचार और संदेशखाली विवाद अहम मुद्दे रहे. इसके अतिरिक्त कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा शिक्षकों की नौकरी रद्द किए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. लोगों की संपत्ति को लेकर कांग्रेस द्वारा पुनर्वितरित किए जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरोपों पर भी छात्रों ने विस्तार से अपनी राय रखी. वहीं प्रधानमंत्री द्वारा जगह-जगह दिए जा रहे सांप्रदायिक भाषणों पर भी छात्रों ने अपने विचार खुलकर रखे.
अधिकतर छात्रों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे और रोजगार की कमी के लिए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने प्रधानमंत्री के आपत्तिजनक बयानों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की. नई शिक्षा नीति पर एक छात्र का कहना है, “यह सरकार(केंद्र) उच्च शिक्षा को कमजोर करना चाहती है और छात्रों को व्यवसायिक पाठ्यक्रम अपनाने पर जोर दे रही है.”
वहीं महिलाओं के साथ हाल ही में कर्नाटक में रेवन्ना और बंगाल में संदेशखाली पर एक छात्रा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि किसी भी दक्षिणपंथी दल का रवैया स्त्रियों के प्रति उदार होगा.”
देखें पूरा शो-
आम चुनावों का ऐलान हो चुका है. एक बार फिर न्यूज़लॉन्ड्री और द न्यूज़ मिनट के पास उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सेना प्रोजेक्ट्स हैं, जो वास्तव में आपके लिए मायने रखते हैं. यहां क्लिक करके हमारे किसी एक सेना प्रोजेक्ट को चुनें, जिसे समर्थन देना चाहते हैं.
Also Read
-
The Economic Survey has a new enemy: The RTI Act
-
TV Newsance 330 | Savarna khatre mein hai? Primetime hysteria over UGC’s equity rules
-
संतुलन की सराहना, बड़े सुधारों की कमी: मीडिया ने कैसे पढ़ा सीतारमण का बजट
-
Convicted sex offender Epstein’s files show Anil Ambani was in touch over deals and govt issues
-
Credibility device, indirect redistribution: The political economy of the budget is clear