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ज़ी न्यूज़ में आर्थिक तंगहाली के नाम पर छंटनी, एक दिन में करीब 70 कमर्चारियों की छुट्टी
पिछले 14 सालों से दिल्ली ब्यूरो में काम कर रहे एक रिपोर्टर को 2 अप्रैल को नोएडा के फिल्म सिटी स्थित ज़ी न्यूज़ के दफ्तर बुलाया गया. इन्हें लगा कि लोकसभा चुनाव को लेकर मीटिंग होगी. जब ये रिपोर्टर दफ्तर पहुंचें तो कहा कि आप अपना इस्तीफा दे दीजिए. कंपनी की माली हालात अभी ठीक नहीं हैं. ऐसे में मैनेजमेंट ने ‘कॉस्ट कटिंग’ का फैसला लिया है.
इस रिपोर्टर के साथ-साथ ज़ी न्यूज़ ऐडोटोरियल के सात अन्य रिपोर्टर, डेस्क से एक और ब्यूरो से भी दो लोगों को नौकरी से हटा दिया गया. इसके अलावा ज़ी-बिहार-झारखंड, विऑन, ज़ी उत्तर प्रदेश और ज़ी के अन्य डिजिटल विंग से भी करीब 70 कमर्चारियों को निकाला गया है. वहीं, तीन अप्रैल को भी कुछ लोगों को इस्तीफा देने के लिए बुलाया गया. जिसमें से ज़्यादातर कैमरामैन थे.
यहां काम करने वाली एक महिला कमर्चारी ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि अंदेशा है कि करीब 250 लोगों को यहां से निकाला जाएंगा. मैनेजमेंट का कहना है कि कपंनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. ऐसे में 20 प्रतिशत कमर्चारियों को हटाया जाएगा. ज़ी के इंग्लिश चैनल वहीं विऑन से करीब 50 लोगों को निकाले जाने की संभावना है. दो अप्रैल को विऑन से 10 लोगों का इस्तीफा लिया गया है. जिसमें एक साउथ अफ्रीका के से एंकर भी हैं.
ज़ी न्यूज़ में बीते कुछ महीनों में काफी उठा-पटक चल रही है. फरवरी महीने में ज़ी न्यूज़ के संपादक रजनीश आहूजा ने इस्तीफा दे दिया. वे यहां बीते दो साल से काम कर रहे थे. अभी एबीपी न्यूज़ में हैं. वहीं, मार्च महीने में ज़ी के प्राइम टाइम एंकर दीपक चौरसिया भी अलग हो गए. वे अब अपना यू-ट्यूब चैनल चला रहे हैं.
2 अप्रैल को क्या हुआ
ज़ी मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के चार कमर्चारियों को 2 अप्रैल को इस्तीफा देने के लिए कहा गया. इसमें से एक असाइनमेंट से, दो आउटपुट टीम से और एक एंकर हैं. न्यूज़लॉन्ड्री ने इसमें से एक कमर्चारी से बात की.
नाम नहीं छापने की शर्त पर इस कर्मचारी ने बताया, ‘‘मैनेजमेंट ने ‘कॉस्ट कटिंग’ शब्द बोलकर ही हम लोगों से इस्तीफा लिया है. कितने लोगों को निकाला गया है, इसकी ठीक-ठीक संख्या तो नहीं मालूम नहीं लेकिन हमारे साथ करीब 70 लोगों का इस्तीफा लिया गया है. इसमें संपादकीय के अलावा टेक्निकल टीम के सदस्य भी हैं.’’
कर्मचारी का दावा है कि इसके लिए उन्हें मेल के जरिए कोई जानकारी नहीं दी जा रही है. वे कहते हैं, ‘‘हमलोग काम करने के इरादे से गए हुए थे. हमें एचआर टीम द्वारा बुलाया गया और मौखिक रूप से ‘कॉस्ट कटिंग’ और दूसरी परेशानियों के बारे में बताते हुए कहा गया कि टुडे इज योअर लास्ट वर्किंग डे. हमसे इस्तीफा ले लिया और एक लेटर हमें थमा दिया. जिसपर लिखा है कि आज से आपका इस्तीफा स्वीकार किया जाता है. आपने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है. इस लेटर में हमारे काम की तारीफ भी की गई है.’’
कमर्चारी ने अभी तक अपने परिजनों को इस बारे में बताया नहीं है. क्या आपको पहले से ऐसा होने का अंदेशा था? इस सवाल के जवाब में ये कर्मचारी कहते हैं, ‘‘बाहर तो इसको लेकर बात चल ही रही थी. अंदरूनी तौर पर भी मीटिंग्स चल रही थी. हमें जानकारी मिली कि 31 मार्च और एक अप्रैल को भी एक मीटिंग हुई. जिसमें तय हुआ था कि 20 से 30 प्रतिशत तक छंटनी करनी है. इस मीटिंग में यह भी बात हुई थी कि जो पुराने कर्मचारी हैं, जिनकी सैलरी ज़्यादा हैं उन्हें और जो कर्मचारी किन्हीं कारणों से मैनेजमेंट के निशाने पर थे, उन्हें हटाने पर चर्चा हुई’’
मीटिंग में हुई चर्चा के मुताबिक, पहले दिन 10-15 सालों से यहां काम कर रहे कर्मचारियों की छंटनी की गई.
एक रिपोर्टर जो यहां 12 सालों से ज़्यादा से काम कर रहे हैं, वो भी छंटनी के शिकार हुए. ये ज़ी न्यूज़ के रिपोर्टर थे और दिल्ली में कई मंत्रालय कवर करते थे. न्यूज़लॉन्ड्री से इनसे भी बात की. रिपोर्टर ने बताया, ‘‘हमें बुलाकर कहा कि 20 प्रतिशत कॉस्ट कटिंग का फैसला लिया गया है. क्योंकि कंपनी की माली हालात ठीक नहीं है. इतना बताकर हमें इस्तीफा देने के लिए कहा गया.’’
वे आगे कहते हैं, ‘‘मैं 12 सालों से ज़ी में काम कर रहा हूं. यहां कभी भी सैलरी देरी से नहीं आई थी लेकिन अक्टूबर 2023 से सैलरी देरी से आ रही थी. पिछले साल का इंसेंटिव, अभी भी बहुत सारे लोगों को नहीं मिला है जो कि अप्रैल 2023 में मिलना था. कुछ लोगों को इंसेंटिव दिवाली के समय दिया गया लेकिन जिनकी सैलरी एक लाख से ज़्यादा है, उन्हें अभी तक नहीं मिला है. तो आर्थिक संकट का माहौल तो लंबे समय से कंपनी में बनाया ही गया है. अभी भी कहा जा रहा है कि टीआरपी बहुत कम है.’’
जिन कमर्चारियों को संस्थान द्वारा इस्तीफा लिया जा रहा है, उन्हें क्या आर्थिक मदद दी जा रही है? इसको लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी उनसे साझा नहीं की जा रही है. एक
कमर्चारी ने हमें बताया, ‘‘मैनेजमेंट ने नोटिस पीरियड की सैलरी देने की बात कही है लेकिन यह भी साफ नहीं है. जैसे कि मेरा नोटिस पीरियड तीन महीने का है. वहीं, कुछ लोगों की दो या एक महीने की होगी. ऐसे में संस्थान क्या देगा वो पता नहीं चल पाया है. हालांकि, जो लेटर हमें दिया जा रहा है उसपर लिखा है कि जल्द ही आपका पूरा हिसाब चुका दिया जाएगा.’’
ज़ी न्यूज़ मीडिया कारपोरेशन लिमिटेड की आर्थिक स्थिति
ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड 6 अलग-अलग भाषाओं में 14 समाचार चैनलों के साथ भारत के सबसे बड़े समाचार नेटवर्क में से एक है.
न्यूज़लॉन्ड्री ने ज़ी मीडिया कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल दस्तावेज को देखा तो सामने आया कि कंपनी की माली हालात सितंबर 2021 से ख़राब होना शुरू हो गई थी. इस तिमाही में इसे 103 करोड़ रुपये की हानि हुई. उसके बाद दिसंबर 2021 और जून 2022 को छोड़ दें तो दिसंबर 2023 तक कभी भी कंपनी ने प्रॉफिट दर्ज नहीं किया.
अगर दिसंबर 2022 से दिसंबर 2023 की तुलना करें तो इस बीच कंपनी का घाटा 19 करोड़ से बढ़कर 36 करोड़ हो गया. वहीं, रेवेन्यू में भी गिरावट दर्ज हुई है. दिसंबर 2022 की तिमाही में जे़डएमसीएल का रेवेन्यू 171 करोड़ था. जो दिसंबर 2023 में गिरकर 167 करोड़ हो गया.
इन दस्तावेज से पता चलता है कि ज़ी मीडिया ग्रुप अपने कर्मचारियों की सैलेरी पर खर्च में लगातार कमी कर रहा था. दिसंबर 2022 में जहां कमर्चारियों पर खर्च 67.20 करोड़ था वो दिसंबर 2023 में घटकर 62.74 करोड़ हो गया.
वहीं, इस बीच यहां मार्केटिंग, डिस्ट्रिब्यूशन और बिजनेस प्रमोशन पर खर्च बढ़ता गया. दिसंबर 2022 में इस पर कंपनी ने 17.97 करोड़ खर्च किया था. वहीं दिसंबर 2023 में यह बढ़कर 34.75 करोड़ हो गया.
दिसंबर 2022 में कंपनी ने कुल 196.65 करोड़ खर्च किए थे. इसमें से सैलरी पर 34.18 प्रतिशत तो मार्केटिंग पर 9.14 प्रतिशत खर्च हुआ था. वहीं, दिसंबर 2023 में 216.86 करोड़ खर्च हुआ. उसमें से सैलरी पर 28.93 प्रतिशत और मार्केटिंग पर 16.02 प्रतिशत खर्च हुआ था.
इन दस्तावेजों से साफ जाहिर हो रहा है कि कंपनी की आर्थिक स्थिति बदहाल होती जा रही है.
छंटनी पर क्या कहता है ज़ी?
न्यूज़लॉन्ड्री ने ज़ी मीडिया ग्रुप का पक्ष जानने के लिए एचआर हेड पूजा दुग्गल को सवाल ई-मेल किए हैं. ख़बर प्रकाशित किए जाने तक उनका जवाब नहीं आया. अगर जवाब आता है तो उसे खबर में जोड़ दिया जाएगा.
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