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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की फैक्ट चेक यूनिट पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) वाले फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है. मालूम हो कि कल ही केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी की थी. इसका काम सोशल मीडिया पर सरकार के काम-काज से संबंधित सामग्री की निगरानी करना है.
सूचना प्रौद्योगिकी नियमों (आईटी रूल्स) के तहत स्थापित यह यूनिट सरकार से संबंधित सामग्री को गलत या भ्रामक करार देगी, जिसके बाद संबंधित मीडिया प्लेटफॉर्म को उसे 24 घंटे के भीतर हटाना होगा.
पहले इस मामले को कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसके बाद बीते 11 मार्च को हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने इसे 2:1 के फैसले से खारिज कर दिया था. जस्टिस एएस चांदूरकर और नीला गोखले ने जस्टिस गौतम पटेल के विपरीत सरकार के तर्क का समर्थन किया था.
कामरा की याचिका में कहा गया था कि संशोधित नियम, जो मूल रूप से पिछले साल 6 अप्रैल को सरकार द्वारा अधिसूचित किए गए थे, जनता पर "डराने वाला प्रभाव" डालेंगे.
याचिका खारिज होने के बाद 20 मार्च को कुणाल कामरा और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. हालांकि, कुछ घंटों बाद ही सरकार ने इस यूनिट की भी अधिसूचना जारी कर दी. जिस पर आज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी.
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गिल्ड ने अपनी याचिका में इसकी संवैधानिक वैधता को भी चुनौती देते हुए कहा कि यह "भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार" का उल्लंघन है.
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की तीन सदस्यीय बेंच ने इन याचिकाओं पर आज सुनवाई की. साथ ही सरकार की ओर से मौजूद सॉलिसिटर जनरल की दलीलें भी सुनीं.
सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फिलहाल फैक्ट चेक यूनिट की अधिसूचना पर रोक लगाने का फैसला किया है.
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