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क्या सरकारी किताबों को कबाड़ में बेचे जाने का वीडियो बनाने वाले पत्रकार पर हुई एफआईआर?
22 अगस्त को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में नए सत्र की किताबें एक ट्रक में कबाड़ के साथ रखी हैं. वीडियो वायरल होने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) प्रवीण तिवारी ने खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) नागेंद्र चौधरी को मामले की जांच के आदेश दिए.
मंगलवार देर रात 11:17 बजे इस मामले में बीईओ चौधरी की शिकायत पर पलिया थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई. पुलिस ने इस मामले में एक अज्ञात शख्स को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) का आरोपी बनाया है.
एफआईआर के मुताबिक चौधरी ने कहा, ‘‘पलिया के बाजार का एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें एक ट्रक में कुछ अस्त-व्यस्त बोरे/सामानों के बीच किताबों का एक बंडल दिखाया जा रहा है. वायरल वीडियो में निःशुल्क वितरण हेतू शासन द्वारा प्रेषित कार्य पुस्तिकाओं को किसी कबाड़ की दुकान द्वारा क्रय किया जाना बताया जा रहा है. उक्त घटना से बेसिक शिक्षा विभाग के साथ-साथ शासन प्रशासन की छवि भी नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रही है. उक्त वीडियो मेरे मोबाइल नंबर*** पर इस नंबर *** से आया है. इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करें.’’
चौधरी अपनी एफआईआर में जिस नंबर का जिक्र करते हैं वो शिशिर शुक्ला का है. उन्होंने ही यह वीडियो लखीमपुर खीरी के पलिया तहसील इलाके में बनाया था. शुक्ला ने बताया कि उस कबाड़ वाली गाड़ी में 20 बंडल किताबें थीं. मैंने सिर्फ एक बंडल देखा था.
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए शुक्ला कहते हैं, ‘‘मैंने उन्हें (बीईओ नागेंद्र चौधरी को) वीडियो, ऑफिशियल कमेंट लेने के लिए भेजा था. मैंने पूछा कि इस पर आपका क्या कहना है? क्या कार्रवाई हुई है? जवाब देने के बजाए उन्होंने मेरे ही खिलाफ कार्रवाई कर दी.’’
शुक्ला ये भी दावा करते हैं कि रात में एफआईआर दर्ज होने से पहले बीईओ नागेंद्र से उनकी बात हुई थी और उन्हें धमकाया गया था.
बुधवार सुबह जब इस एफआईआर की ख़बर लखीमपुर खीरी के पत्रकारों को मिली तो उन्होंने इसके खिलाफ जिला बेसिक अधिकारी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया. शिशिर कहते हैं कि हम कोतवाली में हैं और नागेंद्र चौधरी पर एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं.
इस घटना की खबर हिंदुस्तान अख़बार समेत लखीमपुर खीरी के दैनिक जागरण और अन्य अख़बारों में भी छपी है.
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए बीईओ नागेंद्र चौधरी कहते हैं कि वीडियो वायरल होने के बाद हम जब कबाड़ी की दुकान पर गए तो वहां हमें किताबें नहीं मिलीं, ऐसे में हमने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया.
आपको लगता है कि यह वीडियो साजिश के तहत बनाई गई? इस पर चौधरी कहते हैं, ‘‘यह पुलिस जांच का विषय है. जिस शख्स ने वीडियो बनाया था, उसे खरीदने और बेचने, दोनों का वीडियो बनाना चाहिए था. जिस ट्रक में किताबें रखने की बात की गई वो ट्रक भी हमें नहीं मिला. अब पुलिस आगे की जांच करेगी.’’
एफआईआर भले ही अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुई लेकिन उसमें पत्रकार का नंबर दिया गया था. जिस पर स्थानीय पत्रकारों को लगा कि यह एफआईआर उनके साथी के खिलाफ हुई है. इसके बाद वो प्रदर्शन करने लगे.
हालांकि, पुलिस-प्रशासन इस बात से लगातार इंकार कर रहा है. लखीमपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि एफआईआर पत्रकार के खिलाफ दर्ज नहीं हुई है.
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए कहते हैं, ‘‘एफआईआर अगर हमें पत्रकार के खिलाफ करनी होती तो हम उनका नाम डालते? उनका नंबर इस लिए डाला गया है कि वो वीडियो उनसे ही प्राप्त हुआ है, वो बस सोर्स हैं. वो आरोपी नहीं हैं. वैसे बीईओ को उनका नंबर नहीं डालना चाहिए था. पुलिस खुद पता करती कि यह वीडियो कहां से आया? पत्रकार के खिलाफ इसमें कुछ नहीं है. पुलिस जांच करेगी और जो दोषी होगा उसे नामजद करेगी.’’
यही बात पलिया थाने के एसएचओ प्रमोद मिश्रा भी कहते हैं. मिश्रा न्यूज़लॉन्ड्री को बताते हैं, ‘‘यह एफआईआर अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई. पत्रकारों को हमने कई बार समझाया लेकिन वो समझ नहीं पा रहे हैं. उनका नंबर सिर्फ सूचना के लिए है.’’
आप आगे जांच में पत्रकार से पूछताछ कर सकते हैं. इसका जवाब मिश्रा नहीं में देते हैं. वो कहते है कि इतना समझाने के बाद भी पत्रकार नहीं मान रहे हैं कि यह शिकायत उनके साथी के खिलाफ नहीं है.
वहीं, शिशिर शुक्ला का कहना है कि अगर उन्हें अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराना था तो उनका नंबर क्यों डाला गया?
शुक्ला के साथी पत्रकारों की मानें तो पुलिस-प्रशासन ने दबाव पड़ने के बाद यह कहना शुरू किया कि यह मामला पत्रकार के खिलाफ नहीं दर्ज किया गया है. वे मांग करते हैं कि अगर प्रशासन का इरादा नेक है तो वो एफआईआर से उनके साथी पत्रकार का नंबर हटा दें.
पत्रकारों को अंदेशा है कि भले आज प्रशासन कह रहा कि इससे पत्रकार का कोई लेना देना नहीं है. लेकिन आगे चल कर इस मामले में पत्रकार से ही पूछताछ हो सकती है और उसे परेशान किया जा सकता है.
ऐसे में पत्रकार ये भी मांग करते हैं कि अगर पुलिस-प्रशासन इस मामले में अब तक स्पष्टीकरण जारी क्यों नहीं कर रहा है. वे कहते हैं कि अगर पुलिस ये लिखित स्पष्टीकरण जारी कर दे कि इस मामले में पत्रकार पर मामला दर्ज नहीं हुआ तो ये मामला यहीं खत्म हो जाएगा.
वहीं, एसएचओ प्रमोद मिश्रा का कहना है कि वो इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी क्यों करें जब एफआईआर में पत्रकार का नाम ही नहीं है.
उधर, इस मामले की जांच के लिए लखीमपुर खीरी के बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने चार सदस्यीय टीम गठित कर दी है. इसमें तीन खंड शिक्षा अधिकारी और एक जिला समन्वयक शामिल हैं. कमेटी को मामले की जांच रिपोर्ट 10 दिन में सौंपने के लिए कहा गया है.
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