What's New at NL- Newslaundry Hindi
जल्द आ रहा है: मोनू मानेसर एंड गैंग
मोनू मानेसर एक बार फिर से सुर्खियों में है. इस बार उसके सुर्खियों में आने की वजह है हरियाणा के विभिन्न इलाकों में हुई हिंसा. कुछ ही महीनों पहले दो मुस्लिम युवकों नासिर और जुनैद की जलाकर की गई हत्या के बाद मोनू के खिलाफ पुलिस ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की. इस कारण नूंह जिले के मुस्लिमों में भारी गुस्सा है.
दो-दो राज्यों की पुलिस द्वारा वांछित अपराधी होने के बावजूद मोनू लगातार टीवी चैनलों पर इंटरव्यू दे रहा है. वहीं, हरियाणा और राजस्थान दोनों ही राज्य मोनू के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने के लिए एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री ने इस तथाकथित गौरक्षक मोनू मानेसर और उसके गैंग, इनके इन्फॉर्मर्स, जीपीएस डिवाइस, मोडिफाइड गाड़ी और इनकी हौसला अफजाई करने वाले पूरे तंत्र को कैमरे में दर्जकिया है. इनके आका कौन हैं? कैसे ये पूरा तंत्र काम करता है और क्या सरकार से भी इन्हें मदद मिलती है?
इन सब सवालों के जवाब जल्द ही रिलीज़ होने वाली इस छोटी सी वीडियो फिल्म में है. इसे कुछ स्वतंत्र फिल्मकारों ने बनाया है. ये लोग साल 2021 के अंतिम दिनों से लेकर 2022 की शुरुआत तक मोनू मानेसर और उसके साथियों की गतिविधियों को कैमरे की निगाह से दर्ज कर रहे थे.
न्यूज़लॉन्ड्री इस फिल्म को रिलीज करने के लिए और इसके निर्माताओं को सहयोग करने के लिए क्राउड फंडिंग का सहारा ले रहा है. इससे फिल्म बनाने वालों और हमें इसे आप तक पहुंचाने में आसानी होगी. इसके लिए आपको बस अपने मनमुताबिक एक राशि को चुनना है और न्यूज़लॉन्ड्री को सहयोग करना है. इसके लिए यहां क्लिक करें.
इस तरह की जमीनी रिपोर्ट्स आप तक पहुंचाने में बहुत सारा वक्त, ऊर्जा, साहस, संसाधन और धन की जरूरत होती है. न्यूज़लॉन्ड्री किसी विज्ञापन या विज्ञापनदाता पर निर्भर नहीं है.
हमें उम्मीद है कि आप हमारे इस प्रयास को जरूर सहयोग देंगे और ऐसे बहादुर फिल्मकारों की भी हौसला अफजाई करेंगे.
Also Read
-
Gen Z is protesting. Here is the economics behind the rage
-
The media missed the biggest story: How a generation fed on consumerism and hate found its voice
-
They got beaten at the Parliament march. But they returned to Jantar Mantar
-
First a prankster, now a policeman: When smart glasses come to India’s protest sites
-
जंतर-मंतर: सरकार से वार्ता और वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद भी क्यों सुलग रहा है छात्रों का गुस्सा?