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एनडब्ल्यूएमआई ने एशियानेट की पत्रकार के खिलाफ मुकदमे की निंदा की
द केरला चैप्टर ऑफ द नेटवर्क ऑफ वूमेन इन मीडिया ने एशियानेट पत्रकार अखिला नंदकुमार के खिलाफ मामले को ‘मीडिया की आजादी, भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सीधे तौर पर अपमान’ बताया है.
दरअसल, केरल पुलिस ने एसएफआई के राज्य सचिव पीएम अर्शो द्वारा दायर एक शिकायत के बाद नंदकुमार के अलावा चार लोगों को हिरासत में ले लिया था.
मालूम हो कि नंदकुमार ने गत दिनों महाराजा कॉलेज से एक वीडियो रिपोर्ट की थी. जिसमें उन्होंने कॉलेज के प्रिंसिपल के अलावा वहां मौजूद छात्र प्रतिनिधियों से भी बात की. इन्हीं में से एक छात्र प्रतिनिधि ने कहा कि महाराजा कॉलेज के मास्टर्स कोर्स का छात्र और एसएफआई का राज्य सचिव अर्शो परीक्षा दिए बिना ही पास हो गए.
इस रिपोर्ट के बाद अर्शो ने 'बदनाम करने की साजिश’ का आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायत दी. जिसके बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की. अपने खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बारे में न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए नंदकुमार ने कहा, “अपनी कवरेज के दौरान मैंने रिपोर्टिंग के नियमों का पालन किया है.”
एनडब्लूयएमआई ने अपने बयान में कहा है कि नंदकुमार के खिलाफ मामला पूरी तरह से एसएफआई के राज्य सचिव अर्शो की ‘शिकायत पर आधारित’ था.
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एर्नाकुलम केंद्रीय पुलिस, शिकायत को स्वीकार करते हुए, प्रारंभिक जांच करने में विफल रही, जिसके परिणामस्वरूप अखिला नंदकुमार के खिलाफ अन्यायपूर्ण मामला दर्ज किया गया.
बयान में कहा गया है कि सच सामने लाने के प्रयासों के बीच पत्रकारों पर इस तरह के मुकदमे उनके प्रति निष्पक्ष व्यवहार के दावों की चिंताजनक स्थिति बयां करते हैं.
एनडब्लूयएमआई के केरल चैप्टर ने पुलिस से नंदकुमार के खिलाफ मामले को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पत्रकार बिना किसी दबाव या अनुचित कानूनी कार्रवाई के भय से मुक्त होकर अपना काम कर सकें.”
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी नंदकुमार के खिलाफ केरल पुलिस के मामले की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया था.
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