NL Charcha
चर्चा 256: चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और हाथरस मामले पर फैसला
इस हफ्ते चर्चा के मुख्य विषय उच्चतम न्यायालय द्वारा चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर फैसला और हाथरस मामले में विशेष अदालत द्वारा दिया गया फैसला रहे. इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों के ताज़ा चुनाव नतीजे, मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी, उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित हिंडनबर्ग के आरोपों की जांच कमेटी, विश्व पुस्तक मेले में हिंदुत्ववादी संगठनों द्वारा मारपीट, एलपीजी के एक बार फिर बढ़े दाम आदि सुर्खियों का भी ज़िक्र हुआ.
बतौर मेहमान इस चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी, पत्रकार सुमित चौहान और न्यूज़लॉन्ड्री से स्तंभकार आनंद वर्धन जुड़े. संचालन अतुल चौरसिया ने किया.
अतुल चर्चा की शुरुआत में सवाल करते हैं, “चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर उच्चतम न्यायालय का जो निर्णय आया है, बहुत सारे विपक्षी दलों ने इस फैसले का स्वागत किया है लेकिन सत्ताधारी दल की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. तो क्या सरकार इस ऊहापोह में है कि
इस फैसले को खुले मन से स्वीकार करे या न करे, या फिर वो इस फैसले को इस तरीके से भी दिखा सकती है कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के क्षेत्र में दखल दे रही है?”
इस पर जवाब देते हुए आनंद वर्धन कहते हैं,“मेरे ख्याल से सरकार अभी सभी विकल्पों पर चिंतन कर रही है, प्रतिक्रिया जल्द ही आयेगी. एक प्रतिक्रिया तो हो सकती है समीक्षा की, दूसरी हो सकती है विधेयक लाकर इसे निरस्त करने की और तीसरी हो सकती है स्वीकार कर लेने की.”
इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए ओम थानवी कहते हैं, “सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, अपने आप में इसे ही प्रतिक्रिया मान लेना चाहिए. प्रमुख विपक्षी दलों ने जो प्रतिक्रिया दी है वह सकारात्मक है, इसे स्वागत योग्य फैसला माना है और अगर केंद्र सरकार इस पर बोल नहीं रही है तो मान के चलिए कि उसे थोड़ी सी बेचैनी है. निर्वाचन आयोग सबसे अहम धुरी है चुनाव की, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ये आरोप लगते रहे हैं कि किसी विशेष दल को इसका लाभ मिल रहा है. जबकि एक दौर ऐसा था कि चुनाव आयोग का खौफ हर राजनीतिक दल और सत्ताधारी दल पर रहता था.”
इसके बाद सुमित चौहान प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं कि संविधान सभा में इस मसले पर हो रही बहस पर बाबासाहब डॉ अंबेडकर की बहुत ही तीखी नज़र थी. संविधान जब बन रहा था तो संविधान सभा में उनकी एक टिप्पणी है कि “ऐसा कोई प्रावधान संविधान में नहीं है जो किसी धूर्त या मूर्ख व्यक्ति को या ऐसे व्यक्ति को जो कार्यपालिका के अंगूठे के नीचे हो, उसकी नियुक्ति को रोक सके.” चुनाव आयोग पर उठने वाले सवालों के संदर्भ में जब हम चुनाव आयोग के इतिहास को देखते हैं तो बाबासाहब के जो डर थे, आशंका थी, वो जाहिर होते हैं. फिलहाल उच्चतम न्यायालय ने जो एक पैनल बनाने की बात कही है वो एक जरूरी कदम है. इसकी काफी समय से मांग हो रही थी.
सुनिए पूरी चर्चा.
टाइम कोड
00:00:00 - 00:12:51 - हेडलाइंस व जरूरी सूचनाएं
00:12:51 - 00:57:00 - चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला
00:57:23 - 01:16:02 - हाथरस मामले पर फैसला
01:16:02 - 01:21:42 सलाह व सुझाव
पत्रकारों की राय क्या देखा,पढ़ा और सुना जाए
अतुल चौरसिया
इंडियन एक्सप्रेस का लेख - टोटल रिकॉल: फ्रॉम अंबेडकर टू आडवाणी कंसर्न्स ओवर हाउ ईसीआई अपॉइंटमेंट्स आर मेड
अमृतपाल सिंह के साथ अतुल चौरसिया का जल्द ही आ रहा इंटरव्यू
सुमित चौहान
भंवर मेघवंशी की किताब - बाबासाहेब के नाम पर
आनंद वर्धन
टाइम्स ऑफ इंडिया में सौबिक चक्रवर्ती का लेख - डेथ: बी नॉट लाउड
ट्रांसक्राइब - वंशज कुमार यादव
प्रोड्यूसर - चंचल गुप्ता
एडिटिंग - उमराव सिंह
Also Read
-
‘Generations lived here…voted all my life’: The people left behind in UP SIR draft rolls
-
‘My life stopped’: What 5 years of waiting meant to the families of Delhi riots undertrials
-
‘I’ll kill myself’: Rajasthan BLO says ‘pressure’ to ‘delete Muslim votes’ in seat BJP won with thin margin
-
‘Badmashi’ under scrutiny: Haryana Police removes 67 Haryanvi songs from streaming platforms
-
Shot thrice ‘by cops’: How a Sambhal biscuit seller’s case pushed a court to order an FIR against Anuj Chaudhary