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इंडिया अहेड चैनल: कर्मचारियों को नहीं दिया गया बकाया
आंध्र प्रभा ग्रुप का अंग्रेजी न्यूज़ चैनल इंडिया अहेड 20 दिसंबर से बंद हो गया है. चैनल रिकॉर्डेड कार्यक्रमों के जरिए चल रहा है. चैनल को बंद हुए दो महीने से ज्यादा हो गए लेकिन कई कर्मचारियों की सैलरियों का भुगतान अभी तक नहीं किया गया.
कई कर्मचारियों ने अक्टूबर-नवंबर महीने में ही कंपनी छोड़ दी थी क्योंकि उन्हें सैलरी नहीं मिल रही थी. आखिरकार 20 दिसंबर से चैनल को मास्टर कंट्रोल रूम (एमसीआर) के हवाले कर दिया गया.
कर्मचारी लंबे समय से दबी जुबान में सैलरी नहीं मिलने की बात कर रहे थे लेकिन वरिष्ठ पत्रकार और चैनल के साथ काम कर चुकी स्मिता शर्मा ने 27 जनवरी को सैलरी नहीं देने को लेकर एक ट्वीट किया. इस ट्वीट के बाद चैनल के कई पूर्व कर्मचारियों ने पहली बार खुलकर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी.
स्मिता के ट्वीट के बाद इंडिया अहेड की पूर्व पत्रकार रिद्धिमा केडिया ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हमारे वेतन देने का जवाब एचआर के पास भी नहीं है. यह अनुचित है, यह बिल्कुल अस्वीकार्य है.”
चैनल के पूर्व एंकर पंकज कुमार मिश्रा, कबीर नकवी, पत्रकार आकांक्षा वर्मा, स्नेहा रॉय ने ट्वीट कर सैलरी नहीं मिलने को लेकर अपनी बात कही.
जब सोशल मीडिया पर लोगों ने सैलरी नहीं देने को लेकर इंडिया अहेड के एडिटर इन चीफ भूपेंद्र चौबे को टैग किया, तो उन्होंने जवाब देते हुए ट्वीट किया, “मैं आमतौर पर ट्विटर पर गाली-गलौज करने से बचता हूं क्योंकि आमतौर पर उनका कोई मकसद नहीं होता. लेकिन किसी और से ज्यादा, आपको पता होना चाहिए कि कंपनी आपके साथ है. कंपनी के मालिक और हम सभी की मदद करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. आप जो अच्छा काम रहे हैं, करते रहें.”
सैलरी की समस्या की शुरुआत
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए चैनल के पूर्व कर्मचारी जिन्होंने एक साल से ज्यादा काम किया, वह कहते हैं, “कंपनी में सैलरी की समस्या मई 2022 से ही आना शुरू हो गई थी. जब देरी से सैलरी आई तो मैनेजमेंट से कहा गया कि आंध्र प्रभा के अकाउंट विभाग में किसी कर्मचारी के घर पर निधन हो गया है इसलिए इस बार सैलरी मिलने में देरी हो रही है.”
यहां से देरी से सैलरी आने की शुरुआत हुई. जून में कंपनी के मैनेजमेंट के साथ सभी कर्मचारियों की मीटिंग हुई जिसमें कहा गया कि जल्द सही हो जाएगा. हालांकि फिर जुलाई में सैलरी देरी से आई. अगस्त में कर्मचारियों को जून की सैलरी दी गई. वहीं सितंबर से एक बार फिर सैलरी आना बंद हो गई.
जब सैलरी में देरी हुई और कर्मचारियों ने सैलरी की मांग की तो एक नवंबर 2022 को मैनेजमेंट ने सभी कर्मचारियों को अलग-अलग ग्रुप में बुलाकर कहा कि हम सैलरी नहीं दे पाएंगे. पूर्व कर्मचारी बताते हैं, “हमें दो विकल्प दिए गए. पहला कि हम लीव विदाउट पे पर चले जाए या नौकरी छोड़ दें. और दूसरा - काम करते रहिए, हम बाद में सैलरी दे देंगे.”
जब यह मीटिंग हुई तो उसके बाद और भी कई कर्मचारी नौकरी छोड़कर चले गए. एक तरफ लोग नौकरी छोड़ रहे थे जिससे वहां काम कर रहे कर्मचारियों पर अधिक दबाव आ गया, और दूसरा जो काम कर रहे थे उन्हें पैसे नहीं मिल रहे थे.
एंकर को करीब तीन महीने की सैलरी नहीं मिली जो लाखों में है. उन्होंने एचआर को मेल किया जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.
नए कर्मचारी को दे रहे थे नौकरी
एक तरफ कंपनी मौजूदा कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रही थी, लेकिन दूसरी तरफ वह नए लोगों को नौकरी पर भी रख रही थी. ऐसे ही कंपनी ने अगस्त महीने में डिजिटल टीम में एक महिला पत्रकार को नौकरी दी. महिला पत्रकार कोलकाता की रहने वाली थीं लेकिन कंपनी ने उन्हें नोएडा आकर ऑफिस में काम करने के लिए कहा.
पत्रकार बताती हैं, “नौकरी दे तो दी लेकिन सैलरी नहीं मिली. घर से इतनी दूर आकर नौकरी कर रही हूं लेकिन सैलरी नहीं मिल रही थी. जिससे यहां रहना मुश्किल हो गया.”
वह आगे कहती हैं, “जब उन्होंने सैलरी के लिए कंपनी को कहा तो फिर कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि “तुम्हें कितना पैसा चाहिए सरवाइव करने के लिए”. जिसके बाद मैंने कहा कि 20 हजार रुपए और फिर शाम तक पैसे आ गए.”
महिला पत्रकार ने सैलरी नहीं मिलने के कारण 30 नवंबर को नौकरी छोड़ दी. जब उन्होंने एचआर से पैसों के लिए संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि जनवरी तक दे देंगे. लेकिन अभी तक कोई भुगतान नहीं किया गया.
कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी बताते हैं कि अधिकतर कर्मचारी घर से काम करते थे और सिर्फ कुछ दिन ऑफिस आया करते थे. लेकिन अक्टूबर महीने में कंपनी ने सभी को ऑफिस बुलाया, क्योंकि उस समय इन्वेस्टर आए हुए थे. और वह कंपनी में निवेश करवाने के लिए दिखाना चाहते थे कि हमारे यहां इतने कर्मचारी काम करते हैं.
ऐसे ही एक अन्य कर्मचारी जो डिजिटल टीम में काम करते थे उन्हें अगस्त और सितंबर महीने की सैलरी नहीं मिली है. कंपनी मैनेजमेंट से बात करने की कोशिश की लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला.
कर्मचारी बताते हैं, “अक्टूबर महीने में ईडी रेड पड़ने से पहले ही कंपनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन उसके बाद और भी खराब हो गई. पहले जूनियर्स को सैलरी मिलती थी लेकिन बाद में स्थिति और भी खराब हो गई.”
इंडिया अहेड के प्रेसिडेंट सुदीप मुखिया कहते हैं, “यह कोई छुपी बात नहीं है कि इंडिया अहेड में कर्मचारियों की सैलरी नहीं मिली है. हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सभी को पैसे दे दिए जाएं. हर दिन अलग-अलग लोगों की सैलरी दी जा रही है.”
कर्मचारियों को सैलरी देने की बात की पुष्टि एक पूर्व कर्मचारी ने की. वह कहती हैं कि उन्हें उनके बकाया राशि का भुगतान कुछ पहले कर दिया गया.
कंपनी के एक अन्य वरिष्ठ कर्मचारी ने न्यूज़लॉन्ड्री से कहा, “हमने कभी नहीं कहा कि हम सैलरी नहीं देंगे. जो जाना चाहता है हमने उन्हें जाने दिया. कुछ लोगों की नौकरी भी दूसरी कंपनी में लगवाई है. जैसे-जैसे हमें विज्ञापनों का भुगतान मिल रहा है, हम उससे कर्मचारियों की सैलरी दे रहे हैं. साथ ही हम चैनल को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे है.”
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