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दुनिया भर में पत्रकारों को जेल भेजे जाने की संख्या में 20% की रिकॉर्ड वृद्धि: सीपीजे
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) की सालाना जेल गणना रिपोर्ट 2022 के मुताबिक दुनिया भर में पत्रकारों को जेल भेजे जाने की संख्या में 20% की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है. 1 दिसंबर, 2022 तक दुनिया भर में 363 पत्रकारों को अलग-अलग आरोपों में जेल भेजा गया तो वहीं भारत में लगातार दूसरे वर्ष में 7 पत्रकारों को जेल में रखा गया. भारत में जेल भेजे गए 7 में से 6 पत्रकारों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत जांच की जा रही है. इनमे से 3 पत्रकार एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद है. तो वहीं कश्मीर नरेटर के पत्रकार आसिफ सुल्तान चार वर्ष तीन माह से जेल में बंद हैं. सिद्दिकी कप्पन (स्वतंत्र पत्रकार), गौतम नवलखा (स्वतंत्र पत्रकार), मनन डार (स्वतंत्र पत्रकार), सज्जाद गुल (द कश्मीरवाला), फ़हद शाह (द कश्मीरवाला) और स्वतंत्र पत्रकार रुपेश कुमार सिंह क्रमश: 2 वर्ष 2 माह, 2 वर्ष 7 माह, 1 वर्ष 2 माह, 11 माह, 10 माह और पांच माह से जेल में बंद हैं.
सीपीजे ने पत्रकारों को जेल भेजे जाने का कारण मीडिया को दबाने के लिए अधिनायकवादी सरकारों के बढ़ते दमनकारी प्रयासों, कोविड-19 से बाधित दुनिया में बढ़ते हुए असंतोष पर पर्दा डालने की कोशिश और यूक्रेन पर रूस के युद्ध से उपजी हुए आर्थिक गिरावट को बताया है.
पत्रकारों को जेल भेजने वाले शीर्ष पांच देश क्रमशः ईरान, चीन, म्यांमार, तुर्की और बेलारूस हैं.
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