Gujarat and Himachal Elections

कहानी गुजरात के उन गांवों की जो खुद को ‘हिंदू राष्ट्र का गांव’ घोषित कर चुके हैं

सूरत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रोड शो कर रहे थे. वहां हमारी मुलाकात एक नौजवान से हुई. जिसने दावा किया कि वो केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआरएसफ) में काम करता है. चुनाव के मुद्दों को लेकर सवाल करने पर उस युवा ने कहा, ‘‘हमें बस हिंदू धर्म से मतलब है. भाजपा ने राम मंदिर बनवाये. हर जगह भगवा-भगवा है. हमें हिंदू राष्ट्र चाहिए.’’ 

हमारे पूछने पर की आप अर्धसैनिक बल में हैं और हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहे हैं. युवा कहता है, ‘‘यस सर.’ इतना कह वो नारा लगाते हुए निकल जाता है. 

गुजरात चुनाव को कवर करते हुए हमें ऐसे कई लोग मिले जो हिंदू राष्ट्र की मांग करते हैं. कई का दावा है कि साल 2029 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को हिंदू राष्ट्र घोषित कर देंगे. मोदी के अलावा इन युवाओं को सबसे ज्यादा उम्मीद योगी आदित्यनाथ से है.     

ऐसा नहीं है कि हिंदू राष्ट्र की मांग सिर्फ गुजरात में लोग कर रहे हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में अक्सर इसकी मांग उठती रहती है. अयोध्या में तो एक कथित संत ने साल 2021 में घोषणा की थी कि भारत हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं हुआ तो 2 अक्टूबर को वे सरयू नदी में जल समाधी ले लेंगे. हालांकि उन्होंने जल समाधी नहीं ली और न ही भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हुआ. 

गुजरात इस मामले में एक कदम आगे है. जहां देशभर में उग्र हिंदूवादी लोग और संस्थाएं हिंदू राष्ट्र की मांग कर रही हैं वहीं गुजरात के कुछ गांवों ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया है. दीव से गुजरात के ऊना की तरफ लौटते हुए कई गांवों के बाहर आपको ‘हिंदू राष्ट्रनु गांव में आपनुं हार्दिक स्वागत करे छे’’ का बोर्ड लगा नजर आ जाएगा. यह बोर्ड गांव के युवाओं ने लगाये हैं. जिनमें से ज्यादातर की उम्र 25 साल से कम है. हालांकि गांव के बुजुर्गों की भी इसमें सहमति है. 

देलवाडा गांव   

ऊना शहर के करीब 12 किलोमीटर दूरी पर देलवाड़ा गांव है. गांव में प्रवेश करते ही एक बोर्ड नजर आता है. जिसपर लिखा है, ‘‘हिंदू राष्ट्र नु देलवाड़ा गाम, आपनुं हार्दिक स्वागत करे छे. जय श्री राम.’ बोर्ड के ऊपर बजरंग दाल, विश्व हिंदू परिषद और दुर्गावाहिनी भी लिखा हुआ है. यानी यह बोर्ड राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के घटक संगठनों ने लगवाया है. 

इस बोर्ड को लगवाया है, 23 साल के जयदीप भाया. इन्होंने 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई छोड़ दी. जयदीप के पिता की देलवाड़ा में चाय-नमकीन की दुकान है. बजरंग दल से जुड़े जयदीप बताते हैं, ‘‘यह बोर्ड कई महीनों से लगा हुआ है. हम सबने मिलकर लगाया है.’’ बोर्ड पर गुजराती में क्या लिखा है इस पर वे बताते हैं, ‘‘हिंदू राष्ट्र का यह गांव आपका हार्दिक स्वागत कर रहा है. हमने अपने गांव को हिंदू राष्ट्र का घोषित कर दिया है.’’

आपकी नजर में हिंदू राष्ट्र क्या है? जो आपने यह बोर्ड लगवाया है. इस सवाल पर जयदीप कहते हैं, ‘‘हमारी तो एक ही मांग है कि मोदी साहब ने जैसे राम मंदिर बनवाया. धारा 370 हटाया. वैसे ही देश को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दे तो अच्छा रहेगा.’’

उन्होंने तो नहीं किया लेकिन आपने कर दिया. इस पर जयदीप कहते हैं, ‘‘हम हिंदूवादी हैं तो हम गांव को हिंदू राष्ट्र घोषित क्यों नहीं करेंगे.’’ 

हम जयदीप से बात कर ही रहे होते हैं तभी वहां मौजूद प्रशांत कहते हैं, ‘‘अगर देश का युवा नहीं बोलेगा तो कौन बोलेगा. हम हिंदू भाई हैं. हम नहीं बोलेंगे तो हमारे से छोटे बच्चे या हमारे से बड़े कैसे बोलेंगे. इसलिए सबसे पहले हम युवाओं को जागरूक होना पड़ेगा.’’

जो आपका हिंदू राष्ट्र है. उसका मतलब क्या है? प्रशांत कहते हैं, ‘‘यहां सब हिंदुओं में एकता हो. हमारा धर्म ही सबसे अच्छा होना चाहिए.’’ 

आपके हिंदू राष्ट्र में बाकी धर्म के लोगों के लिए जगह है या नहीं. इस पर प्रशांत ‘हां’ कहते हैं तभी जयदीप कहते हैं, ‘‘नहीं रहेंगे. अगर भारत हिंदू राष्ट्र होगा तो यहां हिंदू ही रहेंगे न. जैसे नेपाल हिंदू राष्ट्र है तो वहां सिर्फ हिंदू रहते हैं. नेपाल में दूसरे धर्म के लोग नहीं हैं. हमारे यहां भी नहीं होंगे.’’

बता दें की राजशाही के दौरान साल 2008 तक नेपाल एक हिंदू राष्ट्र हुआ करता था. राजशाही खत्म होने के बाद वहां संवैधानिक व्यवस्था हुई और नेपाल धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना. यहां 80 प्रतिशत से ज्यादा हिंदू आबादी रहती है. यहां आबादी के करीब चार प्रतिशत मुस्लिम रहते हैं. 

वहीं भाजपा से जुड़े आश्विन भाई भी यह बोर्ड लगाने वालों में से एक हैं. गांव में मुस्लिमों की आबादी को लेकर किए गए सवाल पर अश्विन भाई कहते हैं, ‘‘हमारे गांव में मुस्लिम हैं. लेकिन जब देश हिंदू राष्ट्र बनेगा न तब सरकार जो नियम बनाएगी उसके अनुसार रहना पड़ेगा.’’ अभी भी तो लोग सरकार नियमों पर ही चल रहे हैं. इस सवाल पर अश्विन कोई खास जवाब नहीं देते हैं.

आश्विन ने सातवीं तक पढ़ाई की है. सुपारी काटने का काम करते हैं. जिसमें महीने भर में 15 हज़ार रुपए कमा लेते हैं. आश्विन दावा करते हैं कि 2029-30 के बीच भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा. मोदी है तो मुमकिन है. उसके बाद अगर गाय वाला आ गया तो और भी मुमकिन है.’’ गाय वाला यानी योगी आदित्यनाथ.   

देलवाड़ा गांव में मुस्लिम आबादी लगभग 20 से 25 प्रतिशत है. न्यूज़लॉन्ड्री ने यहां के मुस्लिमों से बात करने की कोशिश की लेकिन कोई भी इस मामले पर कुछ नहीं बोलता. गांव के रहने वाले हनीफ भाई कहते हैं, ‘‘बोर्ड तो लिखा है लेकिन हमें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. हम सुबह आठ बजे काम करने के लिए निकलते हैं और रात में आठ बजे लौटते हैं. बोर्ड लगाने से हमें कोई मतलब नहीं है. यहां सब भाईचारे से रहते हैं.’’

जयदीप रामनवमी के समय हुए एक विवाद का जिक्र हमसे करते हैं. जिसमें गांव के एंट्री गेट पर झंडा लगाने को लेकर विवाद हुआ था. वे बताते हैं कि मुस्लिम समुदाय का उस समय कोई त्यौहार था. उन्होंने अपना झंडा गेट पर लगा दिया. फिर मेरे लड़के मेरे पास आये और बोले कि गेट पर झंडा लगा दिया है. हम लड़ाई में भरोसा नहीं करते तो उनका झंडा हटाने के बजाय रामनवमी को लेकर अपना दो झंडा आसपास लगा दिए. उन्होंने भी कुछ नहीं किया लेकिन उसमें से एक लड़के ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि हमारा एक तुम्हारे दो के बराबर हैं. इसके बाद विवाद बढ़ गया. फिर हमने पुलिस को बुलाया और पुलिस ने उस लड़के को समझाया. तब जाकर मामला शांत हुआ.

हनीफ कहते हैं, ‘‘हां, छोटा मोटा कुछ हुआ था. बाकी यहां किसी को कोई तकलीफ नहीं है.’’ 

जयदीप पुलिस द्वारा समझाने की बात को मुस्कुराते हुए कहते हैं. 

गांव के ज्यादातर लोग व्यवसाय और मजदूरी पर निर्भर हैं. ज्यादातर नौजवान जल्दी ही पढ़ाई छोड़ व्यवसाय या मजदूरी में लग गए हैं. महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सवाल करने पर ये कहते हैं कि कोई काम करने वालों के लिए बेरोजगारी नहीं है वहीं महंगाई के साथ-साथ आमदनी भी बढ़ी है. प्रशांत जो बीकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं वो बताते हैं कि जब शेर पाले हैं तो खर्च करने में हर्ज कैसा. पहले तो सब गधे थे.’’ 

यहां मिले ज्यादातर युवाओं में न हिंदू धर्म की समझ दिखती है और ना ही कथित हिंदू राष्ट्र को लेकर कुछ सोच है. अपने मुद्दों को लेकर जागरूकता है. बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े ये युवा किताबों से ज्यादा सोशल मीडिया से मिले ‘ज्ञान’ से अपनी राय बनाते हैं. कुछ टीवी चैनल भी इनके लिए सूचना के माध्यम हैं.

ओलवान गांव 

देलवाड़ा से करीब सात किलोमीटर दूर ओलवान गांव है. यहां भी बजरंग दल ने ही हिंदू राष्ट्र गांव को लेकर बोर्ड लगाया है. यहां जो बोर्ड लगा है उस पर भगवान राम के साथ ही शिवाजी और महाराणा प्रताप की तस्वीर है. यह गांव समुन्द्र किनारे है. 

गांव में हम पहुंचे तो एक बुजुर्ग पाशा भाई वामनिया से मुलाकात हुई. वे कहते हैं, ‘‘यह बोर्ड हिंदू संगठन का है. हम हिंदू संगठन के मानस हैं. यह बोर्ड डेढ़ महीने पहले लगा है. हमारे गांव में एक भी मुसलामन नहीं है. इसलिए हमने यह बोर्ड लगाया है कि यह गांव हिंदू राष्ट्र का गांव है.’’

गांव में मुस्लिमों की आबादी को लेकर पाशा भाई कहते हैं, ‘‘यहां मुसलमान पहले थे. कुछ लोग मर गए और कुछ लोग मुंबई चले गए. सब अपने से चले गए. गांव से किसी ने तिरष्कार नहीं किया.’’ 

संजय भाई, उन नौजवानों में से एक हैं जिन्होंने यह बोर्ड लगाया था. उनके लिए हिंदू राष्ट्र क्या है? इस पर वे कहते हैं, ‘‘इस सवाल का जवाब योगी आदित्यनाथ से पूछ लीजिएगा. वे अच्छे से जानते हैं. वे एकदम कट्टर हैं. हमारे गांव के पहले और बाद के गांवों में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहेगा. जहां तक रही हिंदू राष्ट्र की बात तो भारत अगले पांच साल में बन जाएगा.’’

आप जिस हिंदू राष्ट्र की कल्पना कर रहे हैं उसमें दूसरे मजहब के लोगों के लिए जगह है या नहीं. इस पर संजय कहते हैं, ‘‘वो तो उसके ऊपर निर्भर करता है कि वो रहेगा या नहीं. हम हिंदू हैं और सबको हिंदू बनाकर रहेंगे.’’

कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले संजय से जब हम चुनावी मुद्दे पूछते हैं तो उनका कहना है कि मुद्दा तो कोई नहीं है. भाजपा आनी चाहिए. वहीं देश को हिंदू राष्ट्र बना सकती है. और कोई नहीं बना पाएगा.’’ 

इस गांव के बाहर से गुजरते हुए हमने देखा कि महिलाएं लकड़ी लिए जा रही थीं. हमने संजय से गांव में गैस की सुविधा को लेकर सवाल किया तो कहते हैं कि यहां सबके पास गैस है लेकिन कुछ लोग अभी भी चूल्हे पर खाना बनाते हैं.’’

हालांकि हमने वहां गांव की महिलाओं से बात की तो उनका कहना था कि गैस तो है लेकिन महंगाई के कारण भरवा नहीं पाते हैं. लकड़ी पर ही खाना बनाते हैं.’’

प्रवीण भी उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने गांव के बाहर बोर्ड लगाया है. गांव में उनकी एक छोटी सी दुकान है. गांव के बाहर बोर्ड लगाने के पीछे की सोच पर प्रवीण कहते हैं, ‘‘मैं चाहता हूं कि पूरा देश हिंदू राष्ट्र बने. देश में हिंदुत्व का सम्मान बढ़े. मुझे दूसरे धर्म से दुश्मनी नहीं लेकिन हमें हिंदू होने पर गर्व है. हम चाहते हैं कि यह देश हिंदू राष्ट्र बने.’’

प्रवीण बताते हैं कि हमारे गांव में हरजत साहब पीर का कोठा है. गांव के सब लोग उन्हें मानते है. मन्नत भी रखते हैं. और मन्नत सफल भी होती है. मेरे कई मुस्लिम दोस्त भी हैं.

जब आपके मुस्लिम दोस्त हैं. आपके गांव में लोग हरजत साहब पीर से मन्नत भी मांगते हैं. ऐसे में हिन्दू राष्ट्र लिखने का क्या मतलब. इस पर प्रवीण बस इतना ही कहते हैं, ‘‘हम हिंदू हैं और हमें इसका गर्व है. यह पूरे गांव की सम्मति से लगा है. किसी एक के कहने पर नहीं.’’

इस गांव के युवाओं का सनातन धर्म को लेकर एक व्हाट्सएप ग्रुप है. इसमें गांव के ही करीब 40 युवा जुड़े हुए हैं. दिनभर ये इसमें हिंदू धर्म से जुड़ा मैसेज साझा करते हैं. इस ग्रुप से जुड़े और गांव के बाहर बोर्ड लगवाने वालों में से एक नारंग हैं. वे हमें ग्रुप दिखाते हैं. जब हम यहां लोगों से मिले थे तब दिल्ली में आफताब-श्रद्धा का मामला सामने आया था. नारंग हमें मैसेज दिखाते हैं जिसमें लिखा होता है कि मामला दिल्ली का है. यूपी का होता तो वहां गाड़ी पलट गई होती. इस ग्रुप में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खूब तारीफ नजर आती है. गांव के युवा भी पीएम मोदी के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित योगी आदित्यनाथ से हैं.

पालड़ी गांव   

दीव से बिल्कुल लगा हुआ गांव है पालड़ी. यहां के ज्यादातर लोग समुन्द्र में मछली पकड़ने का काम करते हैं. जो मछली नहीं पकड़ते वे दीव में ही मजदूरी करते हैं. इस गांव के कई मछुआरे पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. अक्टूबर महीने में एक ही परिवार के चार लोग समुन्द्र में मछली पकड़ने गए थे. तभी पाकिस्तान की नेवी ने उन्हें पकड़ लिया. परिजनों को अब तक कोई जानकारी नहीं है कि पाकिस्तान की किस जेल में उन्हें रखा गया है. उनका रो रोकर बुरा हाल है. पकड़े गए लोगों में से दो 19-20 साल के हैं. परिजनों को मालूम है कि पाकिस्तान की जेल में जाने वाले कम से कम दो से चार साल बाद ही लौटते हैं. 

गांव के लोग बताते हैं, यहां बेरोजगारी, गरीबी और अशिक्षा काफी ज्यादा है. लोगों के पास मछली पकड़ने के अलावा रोजगार का कोई माध्यम नहीं है. जो चार लोग जेल गए हैं उनमें से एक पहले भी पाकिस्तान की जेल में रह चुके हैं. 

देलवाड़ा और ओलवान की तरह पालड़ी में भी हिंदू राष्ट्र नु गाम में स्वागत नु का बोर्ड लगा हुआ है. हालांकि यहां बोर्ड बजरंग दल या वीएचपी ने नहीं लगवाया. यह बोर्ड गांव के कुछ नौजवानों ने लगवाया है. इसमें से ज्यादातर नौजवान 20 साल से कम उम्र के हैं. इन्होंने अपने ग्रुप का नाम जेम्स बॉन्ड फिल्म के 007 के नाम से रखा है. यहां जगह-जगह 007 लिखा नजर आता है. इन नौजवानों ने जो व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है उसका नाम भी 007 से ही है.

सोलंकी जयंती जिसकी उम्र महज 22 साल है. सातवीं तक की पढ़ाई करने के बाद काम करते हैं और महीने के 15 हजार रुपए कमाते हैं. उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर यह बोर्ड लगाया है. यह बोर्ड यहां दो साल से लगा हुआ है. इस बोर्ड को लगाने का मकसद सोलंकी बताते हैं, ‘‘यह हिंदुओं को जगाने के लिए लगाया गया है. रात को कोई इधर से जाएगा. उसकी गाड़ी में कोई परेशानी होगी तो वो ये बोर्ड पढ़कर रुक सकता है.’’ 

आपने-अपने गांव को हिंदू राष्ट्र का गांव घोषित कर दिया लेकिन भारत तो हिंदू राष्ट्र है नहीं. इस पर सोलंकी कहते हैं, ‘‘भारत भी जल्द ही हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा. अभी गांवों में हम कर रहे हैं. धीरे-धीरे यह शहरों में पहुंचेगा. कब तक भारत हिंदू राष्ट्र होगा नहीं पता लेकिन हिंदू जाग रहा है. जल्दी ही हो जाएगा.’’

यहां मिले दूसरे नौजवान नीलेश सोलंकी 007 के सक्रिय सदस्य हैं. उनके दोस्त बताते हैं कि सबसे ज्यादा ग्रुप में हिंदू धर्म को लेकर मैसेज नीलेश ही करते हैं. यह बोर्ड आपने गांव के बड़े-बुजुर्गों की सहमति से लगवाया है या अपने मन से. इस पर सोलंकी कहते हैं, ‘‘किसी से पूछने की जरूरत नहीं पड़ी. गांव के सरपंच थे कमलेश भाई सोलंकी. वो हिंदू को समर्थन करते हैं. उनके साथ हमने ऐसा किया है. पूरा गांव हिंदुओं का है.’’ 

आपके लिए हिंदू राष्ट्र क्या है. सोलंकी इसका ठीक ठीक जवाब नहीं देते हैं. वे कहते हैं, ‘‘हमारा एक ही सपना है पूरा देश हिंदू राष्ट्र बने.जब तक योगी और मोदी हैं वो भारत को हिंदू राष्ट्र कर के रहेंगे. गुजरात में बलात्कार के मामले बहुत ज्यादा हैं, हिंदू राष्ट्र आने के बाद वो सब शून्य हो जाएंगे. लड़कियां 11-12 बजे अकेले निकलेंगी.” 

कैसे? आप कह रहे है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को हिंदू राष्ट्र बनाएंगे. वो गुजरात के लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे. अब प्रधानमंत्री हैं. देश में कानून बेहतर करने की जिम्मेदारी उनकी सरकार की है. अभी अगर लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं तो हिंदू राष्ट्र में कैसे होंगी. सोलंकी इस सवाल का भी ठीक-ठीक जवाब नहीं देते हैं. वे कथित तौर पर मुस्लिमों की बढ़ती आबादी का जिक्र छेड़ देते हैं.

पालड़ी गांव में भी कोई मुस्लिम नहीं रहता है. 

सोलंकी से जब हमने पूछा कि हिंदू राष्ट्र में महंगाई होगी या नहीं. इस पर वे कहते हैं, ‘‘अभी तो महंगाई बहुत बढ़ गई है. पेट्रोल और डीजल के दाम में काफी वृद्धि हुई है. हिंदू राष्ट्र में भी महंगाई होगी. पर हम कमा कर दे देंगे. 

आखिरी में हमारी मुलाकात एक बुजुर्ग से हुई. हमने उनसे पूछा कि आपके गांव में हिंदू राष्ट्र का बोर्ड लगा हुआ है. ये ठीक है. इस पर वे कहते हैं, ‘‘हां, देश को हिंदू राष्ट्र होना ही चाहिए.’’ 

यह कहानी महात्मा गांधी के जन्म स्थान पोरबंदर से महज 200 किलोमीटर दूर की है. जिस बापू ने साथ चलकर आजादी की लड़ाई लड़ी. वहां के नौजवान हिंदू राष्ट्र के लिए खुद को खपा रहे हैं. 

जब हम इस स्टोरी को करके निकले तो भावेश भाई का फोन आया. पेशे से व्यापारी भावेश यहां बजरंग दल के प्रान्त प्रमुख हैं. न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए भावेश बताते हैं, ‘‘पूरे सौराष्ट्र के अलग-अलग गांवों में आपको ऐसे बोर्ड दिख जायेंगे. जहां आरएसएस, बजरंग दल और  वीएचपी से जुड़े लोगों की संख्या बढ़ती है वो अपने गांव में हिंदू राष्ट्र का बोर्ड लगा देते हैं.’’

इस बोर्ड को लगाने के मकसद के सवाल पर भावेश कहते हैं, ‘‘अखंड भारत, जो किसी-किसी कारणों से हमसे अलग हो गया. हमे उसे एक करना है. यह हिंदू राष्ट्र का बोर्ड किसी धर्म या मजहब के खिलाफ नहीं बल्कि देश को एकजुट करने के लिए है.’’

आपके जो संगठन के सहयोगी हैं वो तो कुछ और कह रहे हैं. किसी का कहना है कि देश 2029 तक हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा कोई कह रहा कि मुस्लिम उसमें नहीं होंगे? इस पर भावेश कहते हैं, ‘‘अरे वो बच्चे हैं. उन्हें क्या पता. जोश में कुछ बोल गए तो गलत है. हम किसी के खिलाफ नहीं हैं.’’

गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले सरफराज भाई बताते हैं, ‘‘2002 के समय हमारा क्षेत्र कम प्रभावित हुआ था. लेकिन उस समय जो कत्लेआम हुआ उससे लोगों के मन में भय जरूर बैठ गया. धीरे-धीरे उन गांवों से मुसलमान शहर या दूसरी जगह पलायन करने लगे जहां उनकी आबादी बेहद कम थी. भरोसा टूटा था. हमारे इधर कई ऐसे गांव हैं. ऐसे ही गांवों को वीएचपी और बजरंग दल वाले हिंदू राष्ट्र घोषित कर देते हैं.’’

कौन बड़ा हिंदू    

एक तरफ जहां वोटरों की एक बड़ी आबादी मुद्दों को भूलकर हिंदू राष्ट्र की मांग को मजबूती से रख रही है. ऐसे ही नेताओं ने भी चुनाव में खूब हिंदू और मुस्लिम किया. यहां भाजपा और ‘आप’ में कौन बड़ा हिंदू को लेकर टक्कर रही. 

अरविंद केजरीवाल ने अचानक से एक रोज ‘इम्पोर्टेंट’ प्रेस कांफ्रेस की और कहा कि भारतीय नोटों पर मां लक्ष्मी और गणेश भगवान की तस्वीर होनी चाहिए. हमें अर्थव्यवस्था बेहतर करने के लिए मेहनत के साथ-साथ भगवान के आशीर्वाद की भी जरूरत है.’’     

इसे केजरीवाल का मास्टस्ट्रोक माना गया. जो भाजपा नेता और समर्थक कल तक सेकुलरिज्म को गाली बनाने पर तुले थे उन्होंने केजरीवाल की इस मांग को खारिज सेकुलरिज्म के आधार पर किया.

आप नेता जगह-जगह खुद को हिंदू साबित करने पर तुले नजर आये. भाजपा ने जहां किसी एक मुस्लिम को भी टिकट नहीं दिया वहीं आप ने 182 में से सिर्फ दो सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं वहीं कांग्रेस ने छह मुस्लिम को टिकट दिया है. चुनाव से कुछ महीने पहले ही 2002 दंगे के दौरान सामूहिक बलात्कार की पीड़िता बिलकिस बानो के आरोपियों को रिहा कर दिया गया. इस पर आप कुछ भी बोलने से बचती रही. मनीष सिसोदिया ने तो इसका जवाब देने से ही इंकार कर दिया था. 

वहीं भाजपा पूर्व से ही हिंदुत्व को लेकर खुलकर बोलती रही है. 27 साल से जहां भाजपा की सरकार है, वहां भाजपा के नेता वोट मांगते हुए राम मंदिर, गोरक्षा, लव जिहाद का जिक्र करते हैं. हिंदुओं को असुरक्षा का भय दिखाते नजर आते हैं.  

अहमदाबाद के एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं, ‘‘अब तक के चुनाव में भाजपा 2002 के दंगे को नहीं लाती थी लेकिन इस बार अमित भाई शाह ने उसे गर्व से जोड़ते हुए ले आये. अब धीरे-धीरे उसे भी राजनीतिक फायदे के लिए खुलेआम इस्तेमाल किया जाएगा.’’

न्यूज़लॉन्ड्री ने इन गांव के युवाओं से बात की. उन्हें किसका हिंदुत्व पसंद है. युवाओं ने भाजपा का ही नाम लिया. दरअसल व्हाट्सएप के जरिए अरविंद केजीरवाल की मुस्लिम हितैषी छवि पहुंचाई गई है. मसलन, करोड़ों रुपए ये मौलानाओं को सैलरी देने पर खर्च करते हैं. राम मंदिर के खिलाफ बोला था. इन युवाओं के मन में यह बात पहुंचाई गई है कि ‘आप’ चुनाव को देखकर हिंदुत्व की बात कर रही है.’ 

जब केजरीवाल ने नोटों पर लक्ष्मी और गणेश की तस्वीर लगाने की मांग केंद्र सरकार से की थी उसके एक दिन बाद ही गुजरात के अलग- अलग जिलों में उनकी रमजान के समय की तस्वीर दीवारों पर चिपकाई. जिसमें वो टोपी लगाए नजर आ रहे हैं.

यह सब चीजें गिर सोमनाथ जिले के इन गांवों तक भी पहुंची हैं. पालड़ी गांव में मिले युवा दुर्गेश जो 007 ग्रुप के सक्रिय सदस्य हैं. वो कहते हैं, ‘‘चुनाव के समय हिंदू की बात करते हैं और बाकी समय काम करते हैं दूसरों के लिए. और जब हमारे पास मोदी साहेब और फिर योगी साहब हैं तो इनकी क्या जरूरत है. हमारे पास कई हिंदू ह्रदय सम्राट है हमें किसी और की जरूरत नहीं है.’’

यह एक विज्ञापन नहीं है. कोई विज्ञापन ऐसी रिपोर्ट को फंड नहीं कर सकता, लेकिन आप कर सकते हैं, क्या आप ऐसा करेंगे? विज्ञापनदाताओं के दबाव में न आने वाली आजाद व ठोस पत्रकारिता के लिए अपना योगदान दें. सब्सक्राइब करें.

Also Read: अमूल दूध की कीमत कैसे गुजरात में एक-तिहाई वोटरों को भाजपा के पक्ष में लाती है?

Also Read: गुजरात मॉडल, जिसकी सीमा इन गांवों से पहले ही समाप्त हो जाती है