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मनीष सिसोदिया के घर पर छापेमारी के दौरान पुलिसवालों पर क्यों बरस पड़े सुप्रीम कोर्ट के एक अधिकारी?
शुक्रवार की सुबह मथुरा रोड स्थित मनीष सिसोदिया के आवास पर सीबीआई के छापेमार दस्ते के पहुंचते ही दिल्ली पुलिस ने नजदीकी सर्विस लेन पर बैरिकेडिंग कर दी. इस बैरिकेडिंग के कारण ही दिल्ली पुलिस राज्य के उपमुख्यमंत्री के आवास पर लोगों और खास तौर पर आम आदमी पार्टी के समर्थकों को पहुंचने से रोक पाई जो कि अपने नेता के आवास पर पहुंचने की कोशिश करते हुए वहां से कुछ ही ब्लॉक्स की दूरी पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थें.
हालांकि दिन खत्म होते-होते सर्विस लेन की इस बैरिकेडिंग ने पुलिस के लिए एक ठीक-ठाक मुश्किल खड़ी कर दी.
रात 8 बजे के ठीक बाद एक होंडा सिविक सिडान कार पुराना किला रोड की तरफ से आई और पहले बैरिकेड पर आकर ठहर गई. गाड़ी का फ्रंट फेंडर सुप्रीम कोर्ट के स्टिकर से सुसज्जित था और इसके भीतर बैठे थे, सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल वीरेंद्र कुमार बंसल.
पुलिस के एक सिपाही ने कार तक जाकर बंसल और उनके ड्राइवर को वहां जारी तलाशी और छापेमारी के बारे में बताया और उनसे पूछा कि वे किस ओर जाएंगे. यह तुरंत साफ नहीं हो पाया कि क्या दोनों के बीच कुछ और भी बातचीत हुई थी लेकिन तब तक बंसल सिपाही से बहस में उलझ गए.
बंसल सिसोदिया के आवास से चार मकान दूर ही एक सरकारी बंगले में रहते हैं.
कार को रुका देखकर सहायक पुलिस आयुक्त अतुल कुमार बंसल को शांत कराने के लिए दौड़े जो कि घटना की जगह वाले बैरिकेड से ज्यादा दूर नहीं थे.
"मेरे घर को बैरिकेड करने की इजाजत तुम्हे किसने दी?" बंसल कुमार पर चीख पड़े. "उस अफसर को बुलाओ जिसने ये फैसला लिया."
"माफ कर दीजिए जनाब," कुमार ने जवाब दिया, "हम अभी बैरिकेड्स हटा देते हैं."
अगले ही पल बंसल सैलफोन पर चिल्ला रहे थें, "आपको मेरा घर बैरिकेड करने की इजाजत किसने दी?"
कुमार की मन्नतों का बंसल पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने अपनी आवाज थोड़ी और ऊंची कर ली. "आप सुप्रीम कोर्ट को काम करने से रोक रहे हैं," उन्होंने उस पुलिस अफसर से मानो ऐलान करते हुए कहा. "मैं यह तय करूंगा कि ये मामला एक तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे."
बंसल अब भी कार के भीतर से चिल्ला रहे थें. उन्होंने पुलिस को यह याद दिलाया कि उन्होंने सुबह उनकी बहन को भी रोका था. "मेरी बहन को भी अंदर आने की इजाजत नहीं दी गई." उन्होंने कहा, "आपने मेरे घर के भीतर भी एक सिपाही को रखा हुआ था."
"माफी चाहूंगा सर," सख्त नजर आ रहे कुमार ने माफी मांगते हुए कहा. "आगे से हम सचेत रहेंगे."
आखिरकार, बंसल बाहर निकले. "मैं कार को अंदर नहीं ले जा रहा हूं," उन्होंने किया. "जब तक कि बैरिकेड्स हटा नहीं लिए जाते इसे यहीं रहने दो."
बंसल भीतर चले गए और कुमार भी साथ हो लिए. एक बार घर के भीतर आ जाने के बाद कुमार ने बंसल को याद दिलाया कि 2000 के दशक की शुरुआत में बतौर सत्र न्यायधीश उन्होंने अनेक पुलिस अफसरों के मामलों की सुनवाई की है. "इससे बंसल कुमार को पहचान गए और मामला सुलझ गया." इस गुप्त बातचीत के गवाह रहे दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया.
अप्रैल में एन वी रमन्ना के मुख्य न्यायधीश नियुक्त होने के एक हफ्ते के भीतर ही बंसल को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री विभाग में ले लिया गया और नवंबर में संजीव सुधाकर कलगोआंकर के बाद वे सेक्रेटरी जनरल नियुक्त हो गए.
बंसल और कुमार के अंदर जाने के कुछ ही मिनटों के बाद ड्राइवर को अंदर जाने के निर्देश दे दिए गए.
"मैंने पुलिस को बताया कि साहेब एयरपोर्ट से आ रहे हैं और वे चाहते हैं कि बैरिकेड्स हटा लिए जाएं." ड्राइवर ने उसके आसपास इकट्ठा कुछ पुलिसकर्मियों से कहा.
अपना वादा निभाते हुए जल्द ही कुमार ने बैरिकेड्स हटाने के आदेश दे दिए जिससे कि बंसल के आवास तक बेरोकटोक पहुंचा जा सके. कुछ देर बाद पुलिस ने रास्ते में खड़ी एक टीवी न्यूज़ चैनल की वैन को भी हटवा दिया.
यह पूछने पर कि पुलिस ने बंसल की बहन को घर के अंदर जाने से क्यों रोका तो इसका जवाब देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि उस वक्त वहां पर आम आदमी पार्टी के समर्थक इकट्ठा हो गए थे और हर एक व्यक्ति और वाहन की जांच की जा रही थी. उन्होंने कहा कि वो मकान नं०- ए बी 13 की ओर जा रही थीं. लेकिन सिपाही यह समझ नहीं पाया और उसने उन्हें अंदर आने से रोक दिया.
और बंसल के उस दावे का क्या कि पुलिस ने अपना एक सिपाही उनके बंगले में रखा हुआ था. "वो शायद घर में पानी लेने गया होगा," अधिकारी ने जवाब दिया.
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