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'हम ट्वीट्स के अनुसार नहीं चलते': जुबैर के खिलाफ मामले में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा
ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को पूछा कि 'पीड़ित' का बयान क्यों दर्ज नहीं किया गया. ज़ुबैर को पिछले महीने उनके 2018 के एक ट्वीट से संबंधित मामले में दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था.
पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब विशेष लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने जुबैर के ट्वीट्स और रीट्वीट्स की ओर इशारा किया तो अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने कहा, "हम ट्वीट्स के अनुसार नहीं चलते, हम सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) के अनुसार चलते हैं." तब एसपीपी ने कहा कि जांच के दौरान बयान दर्ज किया जाएगा.
सुनवाई के बाद जुबैर ने अपने खिलाफ उत्तर प्रदेश में दर्ज छह प्राथमिकियों को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई. उत्तर प्रदेश पुलिस ने जुबैर के खिलाफ हाथरस में दो और लखीमपुर खीरी, सीतापुर, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में एक-एक एफआईआर दर्ज की है. जुबैर ने इन मामलों की जांच के लिए एसआईटी के गठन को भी चुनौती दी.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीतापुर मामले में जुबैर की जमानत बढ़ा दी थी, लेकिन अन्य मामलों में उन्हें राहत नहीं मिली थी. जुबैर 27 जून को गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में ही हैं.
वहीं पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान जुबैर की वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई एक गुमनाम ट्विटर अकाउंट की शिकायत पर आधारित थी. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या संबंधित अकाउंट भारतीय था. और सवाल किया कि देश में अशांति फैलाने की कोशिश आखिर कौन कर रहा है.
एफसीआरए उल्लंघन के आरोपों से इनकार करते हुए ग्रोवर ने ऑल्ट न्यूज़ वेबसाइट के डोनेट सेक्शन का हवाला देते हुए कहा कि वह विदेशी चंदा स्वीकार नहीं करते क्योंकि वह एफसीआरए के तहत पंजीकृत नहीं हैं.
ग्रोवर ने रेजरपे के सीईओ के एक बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके प्लेटफार्म पर केवल घरेलू भुगतान किया जा सकता है.
ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने एसपीपी का वक्तव्य सुना जिसमें वह कह रहे थे कि ऑल्ट न्यूज़ फंड की एक्सेल शीट में पाकिस्तानी अंतरराष्ट्रीय फोन कोड +92 पाया गया है. उन्होंने बताया कि कोई कोड नहीं बल्कि माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल का एक फॉर्मूला है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर एफसीआरए प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है, तो इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि पैसा अमेरिका से आया है या पाकिस्तान से, और न्यायालय में इस तरह किसी देश का नाम लेना दुर्भाग्यपूर्ण है.
इसके पहले एसपीपी ने कहा था कि जुबैर को पाकिस्तान, सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों से विदेशी चंदा मिल रहा था. गुरुवार को उन्होंने कहा कि रेजरपे के जरिए जुबैर के खाते में 56 लाख रुपए जमा हुए थे.
दलीलों के अंत में जब अदालत ने पूछा कि जुबैर की हिरासत क्यों जरूरी है तो एसपीपी ने कहा कि ऑल्ट न्यूज़ को चंदा देने वाले कुछ लोग गुमनाम हैं और जुबैर को रिहा करने पर उनके बारे में पता नहीं चल सकेगा.
गुरुवार को अदालत में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म किसी से ना कहना भी चलाई गई, जिसके एक दृश्य का प्रयोग ज़ुबैर ने कथित रूप से आपत्तिजनक ट्वीट में किया था. ग्रोवर ने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं लेकिन नागरिकों के कुछ अधिकार होते हैं जिनमें उपहास करने की आजादी भी शामिल है. उन्होंने कहा कि मुखर्जी उसी अधिकार का प्रयोग कर रहे थे.
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