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कोरोना महामारी के बीच 17 महीनों में दिल्ली सरकार ने विज्ञापन पर खर्च किए 490 करोड़
12 जनवरी को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पंजाब के मोहाली में थे. यहां डोर टू डोर प्रचार के सवाल पर केजरीवाल ने कहा, ‘‘कोरोना के चलते चुनाव आयोग ने डोर टू डोर कैंपेनिंग के लिए कहा है, लेकिन हम तो डोर टू डोर ही करते हैं. ये ट्रेडिशनल तरीका होता था चुनाव लड़ने का. अब तो पैसे खर्चते हैं. बड़े-बड़े एड देते हैं. वो आम आदमी पार्टी को नहीं आता. हमारे पास पैसे नहीं है. हम ईमानदार पार्टी हैं.’’
मुख्यमंत्री केजरीवाल चुनाव के दौरान विज्ञापन पर कम खर्च करने का दावा तो करते हैं, लेकिन दिल्ली में उनकी सरकार ने कोरोना काल की महामारी के दौरान हर रोज लगभग एक करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए हैं. यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) के जरिए सामने आई है.
न्यूज़लॉन्ड्री ने आरटीआई के जरिए पूछा कि दिल्ली सरकार द्वारा एक मार्च 2020 से 30 जुलाई 2021 तक विज्ञापन पर कितने रुपए खर्च किए गए हैं? इसके जवाब में सूचना एवं प्रचार निदेशालय ने बताया कि मार्च 2020 से जुलाई 2021 के दौरान विज्ञापन एवं प्रचार पर कुल 490 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं.
अपने जवाब में इस खर्च को निदेशालय ने तीन भागों में बांटकर बताया है. आरटीआई के मुताबिक मार्च 2020 में 103.76 करोड़ रुपए खर्च हुए. यानी मार्च महीने में दिल्ली सरकार ने हर रोज तीन करोड़ से ज्यादा रुपए विज्ञापन पर खर्च किए हैं.
आगे दी गई जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच आप सरकार ने 293.20 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए. यानी इस दौरान सरकार ने हर महीने 24.41 करोड़ रुपए के विज्ञापन दिए.
वहीं दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2021 से जुलाई 2021 के बीच 93.76 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए हैं. यानी इस बार हर महीने 23.5 करोड़ रुपए विज्ञापन देने पर खर्च किए गए.
यह हैरान करने वाली बात है कि मार्च महीने में, केजरीवाल सरकार ने, हर रोज़ तीन करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च किए हैं.
दरअसल फरवरी 2020 में अरविंद केजरीवाल ने तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उनके मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिनों बाद, 24 से 26 फरवरी के दरम्यान दिल्ली में दंगा हुआ. मार्च महीने में भारत में कोरोना ने दस्तक दी और 24 मार्च की रात अचानक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दी.
न्यूज़लॉन्ड्री ने आरटीआई के जरिए कुछ और सवाल पूछे थे जिसका जवाब सूचना एंव प्रसार निदेशालय ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर नहीं दिया. मसलन इनमें से कितने के विज्ञापन, दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इसके बाहर दूसरे राज्यों में दिए. इसके जवाब में निदेशालय ने बताया कि यह जानकारी डीआईपी से जुड़ी नहीं है. यह जानकारी संबंधित शाखा (शब्दार्थ और आउटडोर) से प्राप्त की जा सकती है.
इस दौरान किन चैनलों और अखबारों को विज्ञापन दिया गया, इस सवाल का जवाब भी डीआईपी ने नहीं दिया और शब्दार्थ और आउटडोर से जानकारी मिल सकती है का जवाब फिर से दे दिया गया.
अप्रैल 2020 से जुलाई 2021 के दौरान दिल्ली के बस स्टॉप, फ्लाईओवर और मेट्रो स्टेशन आप सरकार के होर्डिंग्स से अटे पड़े थे. इसमें से वैक्सीन लगवाई क्या? ओलंपिक जीत के आना, कोरोना हेल्पलाइन और दिल्ली स्पोर्ट्स एकेडमी के विज्ञापन थे. सिर्फ होर्डिंग्स ही नहीं लगे थे बल्कि हर दूसरे दिन अखबारों में फुल पेज का विज्ञापन छपता था.
इसमें आए खर्च के बारे में भी निदेशालय ने कोई जवाब नहीं दिया है.
वैसे यह पहला मौका नहीं है जब अरविंद केजरीवाल सरकार पर करोड़ों रुपए विज्ञापन पर खर्च करने का मामला सामने आया है. इससे पहले आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडेय ने इस संबंध में जानकारी मांगी थी जिसमें सामने आया था कि केजरीवाल सरकार के सत्ता में आने के बाद विज्ञापन पर खर्च लगातार बढ़ता गया.
पांडेय को मिली जानकारी के मुताबिक 2012-13 में दिल्ली में विज्ञापन खर्च 11.18 करोड़ रुपए था. जो 2013-14 में 25.24 करोड़ रुपए हो गया. 2014-15 में यह 11.12 करोड़ रुपए था. 2015-16 में यह खर्च बढ़कर 81.23 करोड़ रुपए हो गया. 2016-17 में इसमें कमी आई. इस बार सरकार ने 67.25 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए.
इस कमी के महज एक साल बाद इस खर्च में ज़बरदस्त उछाल हुआ. 2017-18 में, केजरीवाल सरकार ने 117.76 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च किए. 2018-19 में इसमें फिर से कमी आई. इस बार 45 करोड़ रुपए खर्च हुए. वहीं अगले साल 2019-20 में यह फिर से बढ़कर करीब 200 करोड़ रुपए हो गया. विज्ञापन का खर्च 2020-21 में बढ़कर 242. 38 करोड़ हो गया.
न्यूज़लॉन्ड्री को मिली जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2021 से लेकर जुलाई तक दिल्ली सरकार लगभग 94 करोड़ रुपए विज्ञापन पर खर्च कर चुकी है.
2014-15 में विज्ञापन खर्च में आई कमी का बड़ा कारण दिल्ली में राष्ट्रपति शासन का लगना था. दरअसल 49 दिन की सरकार चलाने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था. जिस वजह से दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था.
जागरण में तीन महीने में 34 फुल पेज का विज्ञापन
दिल्ली में मेट्रो, बस स्टॉप और अलग-अलग जगहों पर लगने वाले होर्डिंग्स के साथ-साथ यहां छपने वाले ज्यादातर अखबारों में आए दिन केजरीवाल सरकार का विज्ञापन नजर आता है. डीआईपी ने अखबारों पर होने वाले खर्च की जानकारी साझा नहीं की. ऐसे में हमने दैनिक जागरण में बीते तीन महीने में आए दिल्ली सरकार के विज्ञापनों को देखा.
न्यूज़लॉन्ड्री ने पाया कि 20 अक्टूबर 2021 से 20 जनवरी 2022 के दरम्यान जागरण में 34 फुल पेज पर, 24 हाफ पेज के और करीब सात एक तिहाई पेज के विज्ञापन छपे हैं. यह सिर्फ एक अखबार की स्थिति है. केजरीवाल सरकार दिल्ली के लगभग हरेक अखबार को विज्ञापन देती है.
यहां यह जानना जरुरी है कि आखिर विज्ञापन के रूप में क्या छपा. दिवाली के मौके पर आप सरकार 'दिल्ली की दिवाली' मनाती है. इसके लिए 2, 3 और 4 नवंबर को एक पूरे पेज का विज्ञापन दैनिक जागरण में छपा. यह विज्ञापन दिल्ली में प्रकाशित होने वाले ज्यादातर अखबारों में नजर आया. ‘दिल्ली की दिवाली' कार्यक्रम का कई चैनलों पर लाइव प्रसारण भी हुआ था.
नवंबर में ही ‘बिजनेस ब्लास्टर्स’ नाम के एक स्टार्टअप प्रोग्राम के लिए लगातार तीन दिन (26 से 28 नवंबर) तक एक फुल पेज का विज्ञापन छपा. इसी को लेकर एक बार फिर, लगातार तीन दिनों तक (31 दिसंबर से 2 जनवरी) के बीच विज्ञापन छपा. पहले इसका प्रसारण हर रविवार को टेलीविजन पर भी किया गया था.
मुख्यमंत्री तीर्थ योजना को लेकर भी दो फुल पेज के, और एक आधे पृष्ठ का विज्ञापन दिसंबर महीने में दिया गया. इस दौरान ‘प्रदूषण से युद्ध’ और ‘कोरोना अभी गया नहीं है, सावधानियां बरतना मत भूलें’ को लेकर भी विज्ञापन छपे.
7, 10, 13, 17 और 20 जनवरी को दिल्ली सरकार ने ‘कोरोना अभी गया नहीं है, सावधानियां बरतना मत भूलें’ को लेकर एक फुल पेज का विज्ञापन दिया है. इस विज्ञापन में बताया गया कि मास्क ठीक से लगाएं. जब भी घर से बाहर निकलें तो मास्क लगाना बिलकुल न भूलें. कम से कम छह फीट की दूरी का ध्यान रखें.
हैरानी की बात है कि इसी बीच 12 जनवरी को पंजाब के मोहाली में सीएम केजरीवाल डोर टू डोर प्रचार के दौरान लोगों से गले लगते नजर आए. प्रचार के बाद मीडिया से बात करते हुए अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान और स्थानीय आप के तीनों उम्मीदवारों ने मास्क हटा लिया था. उस वक्त उनके आसपास काफी संख्या में लोग खड़े थे.
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता इसको लेकर कहते हैं, ‘‘वो कहते कुछ और करते कुछ और हैं. एक जनवरी को उन्होंने कोरोना होने की पुष्टि की, उसके एक दिन पहले एक बड़ी रैली करके आए थे. तो वे स्प्रेडर नहीं हुए? कप्तान तो हमेशा उदाहरण बनाते हैं. वो खुद मास्क हटाकर चलते हैं और अखबारों में मास्क लगाने का विज्ञापन देते हैं.’’
‘विज्ञापनजीवी मुख्यमंत्री’
दिल्ली के प्रमुख विपक्षी दल और भारतीय जनता पार्टी के नेता, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए विज्ञापन जीवी और विज्ञापन मंत्री जैसे उपनामों का इस्तेमाल करते नजर आते हैं.
पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद गौतम गंभीर कई मौकों पर अरविंद केजरीवाल पर इसको लेकर हमला कर चुके हैं. हाल ही में केजरीवाल की पंजाब यात्रा के दौरान गंभीर ने ट्वीट किया, ‘‘मुल्क दे विज्ञापन मंत्री पंजाब दौरे ते! #SavePunjab’’
भाजपा के दिल्ली प्रवक्ता हरीश खुराना कहते हैं, ‘‘हम तो शुरू से कहते आ रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल विज्ञापन जीवी मुख्यमंत्री हैं. दिल्ली में यमुना साफ नहीं हुई, लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा, प्रदूषण से लोगों का बुरा हाल है, व्यापर ठप पड़ा हुआ है, स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है, डीटीसी में नई बसें नहीं आईं. कोरोना में हालात सबने देखे लेकिन विज्ञापन में सबकुछ अच्छा-अच्छा बताया जाता है.’’
ऐसा माना जाता है कि सरकारें विज्ञापन अपने हित में खबर दिखाने के लिए इस्तेमाल करती हैं. क्या आपको लगता है कि मीडिया में दिल्ली सरकार को लेकर गंभीर रिपोर्टिंग हो रही है? इसका जवाब खुराना न में देते हैं. वे कहते हैं, ‘‘एक उदाहरण आपको देता हूं. दिल्ली जल बोर्ड का 2014-15 से अकाउंट ऑडिट नहीं हुआ और बैलेंस शीट नहीं बनी. इसको लेकर मैं हाईकोर्ट गया और दिल्ली सरकार, जल बोर्ड और सीएजी (कैग) को पार्टी बनाया. मेरी शिकायत के बाद कोर्ट ने सीएजी से जवाब मांगा तो वहां से बताया गया कि 22 बार लिखित में उन्होंने जल बोर्ड से अकाउंड ऑडिट कराने के लिए कहा है. इतने दिनों में 60 हजार करोड़ रुपए का कोई हिसाब नहीं है. दिल्ली की जनता जानना चाहती है. जब हमने यह सवाल उठाया तो मीडिया में जगह नहीं मिली है. अक्सर ऐसा ही होता है.’’
खुराना आगे कहते हैं, ‘‘आज कोई प्रदूषण पर बात नहीं कर रहा है. युमना गंदी है उसकी तस्वीर कोई नहीं दिखा रहा. हम भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई प्रेस रिलीज भेजते हैं उसे नहीं दिखाया जाता है. पहले प्रदूषण के लिए वे पंजाब और हरियाणा के किसानों को जिम्मेदार बताते थे, आज वहां सब बेहतर है. मीडिया केजरीवाल जी को लेकर सॉफ्ट दिखता है ’’
दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी भी मानते हैं कि विज्ञापनों का असर खबरों पर नजर आता है. वे कहते हैं, ‘‘शीला जी की सरकार के समय में विज्ञापन का बजट 20 से 25 करोड़ रुपए होता था, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने 465 करोड़ रुपए अपने प्रचार प्रसार पर रखा है. तो स्वाभाविक बात है कि इसका असर पड़ता है. दिल्ली सरकार की शराबनीति के खिलाफ लगातार विपक्ष के रूप में कांग्रेस सवाल उठा रही है, लेकिन शायद ही मीडिया के किसी साथी ने इसे गंभीरता से उठाया हो . ऐसे ही दूसरे कई मुद्दे हैं. जहां लगता है कि मीडिया को अपनी भूमिका निभानी चाहिए लेकिन उसमें कमी है.’’
वहीं सरकार द्वारा करोड़ों रुपए के विज्ञापन देने के सवाल पर चौधरी कहते हैं, ‘‘अरविंद को जनता से कोई सरोकार नहीं है. आज दुकानदार, मजदूर, कोविड के चलते लोगों के पास दो वक्त का खाना तक नहीं है, छोटे व्यापारियों के पास अपने स्टाफ को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं है. लेकिन केजरीवाल सरकार अपने निकम्मेपन और नाकामी को छुपाने के लिए इश्तिहार का सहारा ले रही है. यह पैसे लोगों पर खर्च करते तो शायद उनकी परेशानी थोड़ी कम हो जातीं.’’
इस स्टोरी के संबंध में बात करने के लिए न्यूज़लॉन्ड्री ने आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और विधायक सौरभ भारद्वाज, राघव चढ्ढा और आतिशी को फोन किया. भारद्वाज और आतिशी ने फोन नहीं उठाया वहीं राघव चड्डा के निजी सचिव ने फोन उठाया. उन्होंने सवाल सुनने के बाद कहा कि थोड़ी देर में आपकी बात करा देते हैं. वो अभी व्यस्त हैं. ऐसे में हमने तीनों नेताओं को सवाल भेज दिए हैं. अगर जवाब आता है तो खबर में जोड़ दिया जाएगा.
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