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दिल्ली दंगा: विशेष लोक अभियोजकों के पेश न होने पर कोर्ट ने राज्य सरकार पर लगाया जुर्माना
दिल्ली कोर्ट ने बीते 10 महीने में लोक अभियोजकों (एसपीपी) के कोर्ट में पेश न होने पर राज्य सरकार पर जुर्माना लगाया है. साथ ही पुलिस आयुक्त को जांच करने और जुर्माने की राशि वेतन से काटने का आदेश दिया है.
जज अरूण कुमार गर्ग ने विशेष लोक अभियोजकों के कोर्ट में न आने पर दिल्ली दंगों की सुनवाई में हो रही देरी पर यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने सुनवाई की तारीख टालने के अनुरोध को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में 30 जनवरी 2021 को आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद से एसपीपी एक बार भी अदालत में पेश नहीं हुए हैं.
इससे पहले दिल्ली कोर्ट ने नार्थ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि दिल्ली दंगों के मामले में नए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाए जो पुलिस का पक्ष रखे.
दिल्ली दंगों के मामले के विशेष वकील अमित प्रसाद को पेश होना था, लेकिन वह हाईकोर्ट में एक अन्य सुनवाई में व्यस्त होने के कारण पेश नहीं हुए. जिसके बाद डीके भाटिया को बुलाया गया लेकिन उन्होंने पेश होने में असमर्थता जता दी. इसके बाद मधुकर पांडे को बुलाया गया लेकिन उनकी तरफ से भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया.
जिस पर एडिशनल सेशन जज भट्ट ने कहा कि दंगा संवेदनशील मामला है जिसके लिए विशेष कोर्ट की स्थापना की गई. दंगे के सभी मामलों को दिल्ली पुलिस द्वारा विशेष लोक अभियोजकों की एक टीम को सौंपा गया ताकि सही तरीके से इस मामले में सुनवाई पूरी हो सके.
लेकिन कोर्ट ने कई बार यह पाया कि विशेष लोक अभियोजक कोर्ट में पेश नहीं होते जिसकी वजह से सुनवाई लंबित हो रही है. जिसके कारण केस का निपटारा देरी से हो रहा है.
बता दें कि कई बार कोर्ट दिल्ली दंगों की जांच को लेकर दिल्ली पुलिस को फटकार लगा चुकी है. कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के भाई समेत तीन आरोपियों को बरी करते हुए कहा थाकि “पुलिस का प्रभावी जांच का इरादा नहीं है. जांच एजेंसी ने केवल अदालत की आंखों पर पट्टी बांधने की कोशिश की है और कुछ नहीं. ये मामला करदाताओं की गाढ़ी कमाई की भारी बर्बादी है. इस मामले की जांच करने का कोई वास्तविक इरादा नहीं है.”
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