Media
टीवी मीडिया: कृषि कानून बनाने से लेकर रद्द करने तक ‘पीएम मोदी’ ही सही
देश की राजधानी दिल्ली के अलग-अलग बार्डर्स पर 359 दिनों से जिन कानूनों को रद्द करने की मांग किसान कर रहे थे, उसे आखिरकार शुक्रवार को केंद्र सरकार ने मान लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान किया.
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, सरकार इस महीने(नवंबर) के अंत में होने वाले संसद सत्र में तीनों कृषि कानूनों को वापस करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देगी.
करीब 18 मिनट के अपने संबोधन में, पीएम ने कृषि कानूनों के तारीफों के पुल बांधे और फिर कहा कि हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए. यहां कुछ किसान से क्या उनका मतलब अलग-अलब बार्डर पर धरना दे रहे किसानों से था, या फिर एक दो राज्य के लोगों से? इसका जवाब पीएम दी सकते हैं, लेकिन उनके इस कुछ वाले हिस्से को टीवी एंकरों ने लपक लिया.
न्यूज18
न्यूज़18 इंडिया पर ‘देश नहीं झुकने देंगे’ शो के एंकर अमन चोपड़ा ने शुरुआत करते हुए कहा, कृषि कानून वापस लेने से एक वर्ग भले ही खुश हो, लेकिन नफरत, टुकड़े-टुकड़े गैंग और खालिस्तान की दुकान पर ताला लग गया है. जो किसानों के कंधों पर देशद्रोह की बंदूक चला रहे थे, जो सिंघु को सीरिया बना रहे थे, सबकी दुकान बंद हो गई. यह स्ट्राइक हुई है.
अमन चोपड़ा सरकार के तारीफों में कई कसीदे पढ़ते हैं, साथ ही कहते हैं कि सरकार ने एक फैसले से देश को जलने से बचा लिया. इसे नाक की लड़ाई न बनाकर देश को बचाने की लड़ाई बना दिया.
शो में आगे एंकर सवाल करते हुए कहते हैं कि क्या यह ट्रेंड बन जाएगा कि देश को बंधक बनाओ, अपनी मांगे मनवाओ, आगे सीएए और 370 जैसे कानून हैं. शो में एंकर की भाषा किसान नेता राकेश टिकैत से ऐसे थी मानों की वह पाकिस्तान से शो में गेस्ट के तौर पर जुड़े हों और भारतीय पत्रकार उन्हें दुत्कार लगा रहा हो, जैसा कुछ भारतीय टीवी चैनल पाकिस्तान के गेस्ट के साथ करते हैं.
शो से जब राकेश टिकैत जा रहे थे तब अमन चोपड़ा उन्हें धन्यवाद के साथ ही ‘बैठे रहिए’ भी कहते हैं. इस पूरे शो में कृषि कानून क्यों वापस लिया, क्या कानून में कोई कमी थी इन मुद्दों पर दूर-दूर तक कोई चर्चा नहीं हुई. लठैतों की भाषा के ज़रिए एंकर मानो पीएम मोदी के गुणगान में लगे रहे, ठीक वैसे ही जैसे इन तीनों कृषि कानून के बनने पर लगे रहे थे.
आजतक
प्राइम टाइम की शुरुआत चित्रा त्रिपाठी के शो दंगल से हुई. जहां उन्होंने सबसे पहले राकेश टिकैत का इंटरव्यू दिखाया. चित्रा ने इस दिन को ऐतिहासिक दिन बताते हुए पैनल से बातचीत की शुरुआत की. हर चैनल की तरह दंगल शो में भी कृषि कानूनों पर बातचीत हुई. यह बहस भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमट गई जिसमें दोनों पार्टियां एक दूसरे पर राजनीति करने का आरोप लगा रही थीं.
आजतक पर दूसरा प्राइम टाइम शो ‘हल्लाबोल’ है जिसे अंजना ओम कश्यप होस्ट करती हैं. शो की शुरुआत करते हुए अंजना कहती हैं, “पीएम ने बड़ा तोहफा दिया, तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया”. अंजना, सेना को दिए गए हेलीकाप्टर की तुलना ‘तोहफे’ से करती हैं और इसी शब्द का उपयोग वे कृषि कानूनों के लिए भी करती हैं. शो में कांग्रेस, भाजपा, अकाली दल और किसान नेताओं के साथ बातचीत की गई. शो में एक जगह कांग्रेस प्रवक्ता और अंजना के बीच बहस हो गई. कांग्रेस प्रवक्ता जीतू पटवारी से सवाल पूछते हुए अंजना ने कहा कि “कृषि बिल की वापसी से सब खुश हैं.कांग्रेस पार्टी को क्या लग रहा है प्रधानमंत्री ने जो दांव खेला है.”
इस पर जीतू पटवारी कहते हैं, “सबसे ज्यादा खुश तो मैं इस बात पर हूं कि आप पहले कहा करती थीं कि जो काले कृषि कानून हैं वह किसानों के हित के हैं, और अब आप कह रही हैं कि तीनों कृषि कानून किसानों के हित में वापस लिए गए.”
ज़ी न्यूज़
वैसे तो हर चैनल पर किसानों की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई लेकिन ज़ी न्यूज के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी ने अपने शो डीएनए में बेहद ही अलग अंदाज में कृषि कानूनों पर बात की. सुधीर शो की शुरुआत, फिल्म दीवार के डायलॉग ‘आज खुश तो बहुत होगे तुम’ से करते हैं, साथ ही कहते हैं कि आज हमारे देश में एक वर्ग बहुत खुश होगा, क्योंकि उसने हमारे देश की राजनीति को बैलगाड़ी के युग में धकेलने की कोशिश की है.
सुधीर चौधरी आगे कहते हैं, आज के दिन को विपक्ष अपनी जीत बता रहे हैं, किसान अपनी जीत बता रहे हैं, खालिस्तानी अपनी जीत बता रहे हैं और टुकड़े-टुकड़े गैंग अपनी जीत. आगे वह कहते हैं, ‘आखिर यह किसकी जीत है और किसकी हार, हम इसी का विश्लेषण करेंगे.’
इस शो में सुधीर चुनाव पर पड़ने वाले असर, आंदोलनजीवियों की दुकानों, कई नेताओं के करियर की समाप्ती समेत कई मुद्दों का विश्लेषण करते हैं. एक फैन की भांति सुधीर चौधरी हार या जीत, सबमें मोदी को ही विजेता घोषित करते हैं. इसी तरह उन्होंने कह दिया कि हमारा विश्लेषण कहता है कि “यह आंदोलन मोदी के खिलाफ था, इसका किसानी से कोई लेना-देना नहीं था.”
सुधीर चौधरी अपने शो में प्रधानमंत्री मोदी के तारीफ में कई कसीदे पढ़ते हैं. वह कहते हैं, कई बार अपने ईगो को छोड़कर लोकतंत्र में जो सही होता है उसके लिए कदम उठाने पड़ते हैं.
एबीपी न्यूज़
एबीपी न्यूज़ की एंकर रुबिका लियाकत ‘हुंकार’ नाम का एक शो एबीपी न्यूज़ पर करती हैं. उनके इस शो में कृषि कानूनों के वापस लिए जाने को लेकर कई किसान नेता, राजनीतिक विश्लेषक और राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ता शामिल हुए. शो में रुबिका, किसान नेता शिव कुमार कक्काजी से सवाल करते हुए कहती हैं कि प्रधानमंत्री ने कृषि कानून का वापस लेने की घोषणा कर दी. उन्होंने 99 कदम उठाए हैं, अब किसान कब वापस जाएंगे? इस पर किसान नेता जवाब देते हुए कहते हैं, संविधान में आप को सवाल पूछने का हक है, वो करिए लेकिन हमें सलाह मत दीजिए कि हम घर कब जाएं या न जाएं.
अपने शो में रुबिका, किसान नेता पुष्पेंद्र से पूछती हैं कि इसे किसकी जीत के तौर पर देखा जाए. इस पर किसान नेता कहते हैं, यह जनता की जीत है, लोकतंत्र की जीत है. शो में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू-भानु) के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाते हैं. वह कहते हैं कि कांग्रेस ने पंजाब के किसानों को भड़काकर यह आंदोलन करवाया.
आधे घंटे के इस शो में 5 मिनट की बहस, सिर्फ कांग्रेस नेता और किसान नेता भानुप्रताप के बीच होती है और एंकर चुप रहती हैं. राजनीतिक विश्लेषक अवनिजेश रुबिका के एक प्रश्न पर कहते हैं, “कानून गलत नहीं था. जैसा प्रधानमंत्री ने कहा- हम किसानों को समझा नहीं पाए. आर्थिक रिफॉर्म चलता रहेगा.”
सभी प्रमुख न्यूज चैनलों पर कृषि कानूनों की वापसी की खबर दिनभर चलती रही. सभी चैनलों ने अलग-अलग तरीके से इस मुद्दे को कवर किया लेकिन अधिकतर चैनलों ने वही राग अलापा जो वह पहले आलाप रहे थे, ‘खालिस्तानी, आंदोलनजीवी और टुकड़े-टुकड़े गैंग.’ सवाल है कि प्रधानमंत्री ने जिन किसानों से माफी मांगी, क्या वे खालिस्तानी और टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग थे?
Also Read
-
What did we learn from Hardeep Puri’s media blitz?
-
Main dardi…ki loki kende chui-mui: A song for despots who can devastate millions but not take a joke
-
66 stations, 98 daily calls, 80% station officers unrecruited: Inside Delhi’s fire service crisis
-
What did Ravi Nair tweet about Adani to land a prison sentence and a fine?
-
Indore school holds annual day separately. One for Muslim students. Another for Hindu students