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अमेरिकी पत्रकार डैनी फेनस्टर को म्यांमार ने किया रिहा
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी पत्रकार डैनी फेनस्टर को सोमवार को यांगून की इनसेन जेल से रिहा कर दिया गया है. बता दें कि तीन दिन पहले ही फ्रंटियर म्यांमार के 37 वर्षीय प्रबंध संपादक को कई आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद 11 साल जेल की सजा सुनाई गई थी.
फेनस्टर इमिग्रेशन कानून के उल्लंघन, गैरकानूनी संगठन से संपर्क, सेना के खिलाफ असंतोष को बढ़ावा देने, देशद्रोह और आतंकवाद के आरोपों के लिए जेल में थे. बीबीसी से बात करते हुए, मिलिट्री जुंटा के प्रवक्ता मेजर-जनरल ज़ॉ मिन टुन ने कहा कि फेनस्टर को अब देश छोड़ने की अनुमति दी जाएगी.
फेनस्टर को मई में यांगून अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था, जब वह अमेरिका वापस जाने वाले थे. फेनस्टर एकमात्र विदेशी पत्रकार थे जिन्हें एक गंभीर अपराध का दोषी ठहराया गया था क्योंकि सेना ने फरवरी में सत्ता पर कब्जा कर लिया था, आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटा दिया था.
यांगून की इनसेन जेल के एक बंद कमरे में मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने फेनस्टर की प्रारंभिक सजा की घोषणा की थी. फ्रंटियर म्यांमार ने कहा कि उन पर आरोपित की गई सजा "गैरकानूनी संघ अधिनियम और आव्रजन अधिनियम के तहत सबसे कठोर सजा में से एक" है.
फ्रंटियर म्यांमार के प्रधान संपादक थॉमस कीन ने ट्विटर पर कहा कि वे मानते हैं कि डैनी म्यांमार में उन कई पत्रकारों में से एक थे, जिन्हें फरवरी तख्तापलट के बाद से अपना काम करने के लिए अन्यायपूर्ण तरीके से गिरफ्तार किया गया है. हम सैन्य शासन से म्यांमार में सलाखों के बंद सभी पत्रकारों को रिहा करने का आह्वान करते हैं.
इससे पहले अमेरिका के पूर्व राजनयिक और बंधकों को छुड़ाने के लिए काम कर रहे बिल रिचर्डसन ने सजा को "अपमानजनक" बताया था. उन्होंने समाचार एजेंसी एपीफ को बताया, "यह न केवल अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों बल्कि म्यांमार के पत्रकारों को भी एक संदेश देता है कि स्थिति पर तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने पर उन्हें कई वर्षों की जेल हो सकती है."
गौरतलब है कि डैनी पहले स्वतंत्र समाचार वेबसाइट म्यांमार नाओ के लिए काम करते थे, जो तख्तापलट के बाद से सेना की आलोचना करती रही है.
इससे पहले युकी किताजुमी, जो जापान के कई प्रमुख समाचार आउटलेट्स के लिए म्यांमार से रिपोर्टिंग कर रहे थे, उन्हें जापान सरकार के अनुरोध के बाद रिहा कर दिया गया.
म्यांमार सेना ने 1 फरवरी को तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था. जिसके बाद म्यांमार सेना ने पूरे देश में निर्वाचित सरकार के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया.
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