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अखबारों की समीक्षा: सिकुड़ती खबरों के बीच दानव की तरह पैर पसारते विज्ञापन
हम सुबह जल्दी उठकर अखबार खोलते हैं ताकि समाचार पढ़ सके. लेकिन अब अखबार का पैटर्न बदल गया है. अखबार में खबरें कम और विज्ञापन ज्यादा होते हैं. आजकल के अखबारों में पहले पन्ने से लेकर आखिरी पन्ने तक केवल विज्ञापन ही दिखाई देते हैं. एक समय था जब तीन- चार घंटे अखबार पढ़ने में लग जाते थे और अब कहां एक घंटे में पूरा अखबार खत्म हो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि विज्ञापन छपने के बाद जो कुछ थोड़ी जगह बचती है उसमें समाचार लिखा रहता है जिसे आप जल्दी ही पढ़कर निपटा देते हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री ने पिछले चार दिन यानी, 30-31 अक्टूबर और 1-2 नवंबर को प्रकाशित हिंदी अखबारों को देखा है. चार दिनों में पहले 10 पन्नों पर दैनिक जागरण में 109, दैनिक भास्कर में 73, अमर उजाला में 113, और पंजाब केसरी में 62 विज्ञापन प्रकाशित हुए. बता दें इनमें सरकारी और गैर-सरकारी हर तरह के- पूरे पेज, आधे पेज और छोटे विज्ञापन शामिल हैं. हालांकि इस में पूरे- पन्ने के क्लासिफाइड विज्ञापन शामिल नहीं हैं.
खास बात यह है कि इन सभी अखबारों में यूं तो 15 से 16 पन्ने रहते थे लेकिन हाल ही में विज्ञापन की संख्या बढ़ने के कारण इनके पन्ने भी बढ़ गए हैं. अमर उजाला और दैनिक जागरण ने हाल ही में 'मीडिया इनीशियेटिव' (विज्ञापन) के दो पन्ने शुरू किए हैं जिनमें सरकार की योजनाओं की तारीफ की जाती है. यह विज्ञापन खबरों की तरह परोसे जाते हैं यानी आपको लगेगा आप खबर पढ़ रहे हैं लेकिन आप वास्तव में विज्ञापन पढ़ रहे होते हैं.
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