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दास्तान-ए-गांधी: औरतों की निगाह में ‘गांधी’
महात्मा गांधी के बारे में आपने पढ़ा, लिखा और सुना तो जाने कितनी बार होगा. लेकिन बापू के जन्म दिवस पर न्यूज़लॉन्ड्री उनके जीवन, व्यक्तित्व और संबंधों को एक बेहद ही दिलचस्प अंदाज में सामने ला रहा है.
वैसे तो गांधी किस्सों में हैं, मिथक के रूप में हैं, लोकगीतों से लेकर फिल्म तक में हैं. वे ड्रीमर और डूअर भी है. इस देश में गांधी को पूजने वाले लोगों की कमी नहीं है तो उनसे बहस करने वाले लोग भी शुरू से रहे हैं. उनको चौराहों पर मूर्ति के रूप में स्थापित किया गया तो उनके खिलाफ़ नारे भी लगाए गए.
गांधी को आज़ादी मिलने के बाद छह महीने भी ज़िंदा रहने की मोहलत नहीं मिली. अब तो उनकी हत्या के 73 साल हो गए हैं, फिर भी वे बहुतों की चिढ़ और गुस्से की वजह बने हुए हैं.
‘हर कतरा तूफ़ान’ में हम कुछ औरतों की आवाज़ों को लेकर आपके सामने आए हैं जो मुख्तलिफ़ निगाह से गांधी को देख रही हैं. यहां सरोजिनी नायडू, महादेवी वर्मा, इस्मत चुगतई, ताज साहिबा लाहौरी हैं तो ऐनी मेरी पीटरसन, एलेन होरूप और इम टार्लो भी.
यह दास्तान रसचक्र द्वारा प्रस्तुत किया गया. यह लेखन, संपादन, शोध, शिक्षा, संगठन और रंगमंच के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे लोगों की अड्डेबाज़ी है. रसचक्र रचनाओं की पाठात्मक प्रस्तुति करता है. न्यूनतम साज-सज्जा के साथ रचनाओं के पाठ पर इसका ज़ोर है. रचनाओं में भी गैर-कथात्मक और स्त्री लेखन पर. अभी तक रसचक्र ने पांच प्रस्तुतियां की हैं- 'हम खवातीन', 'हक़ीक़त और ख्वाब', 'हर क़तरा तूफ़ान', 'मोहब्बत ज़िंदाबाद' और 'जिन्से लतीफ़ की सरगर्मियां'. इसके सक्रिय सदस्यों के नाम इस प्रकार है:
निर्देशन : विनोद कुमार
प्रस्तुति : रश्मि सिन्हा, अलका रंजन, पूर्वा भारद्वाज, श्वेता त्रिपाठी, रिज़वाना फ़ातिमा
परिकल्पना एवं स्क्रिप्ट : पूर्वा भारद्वाज
समन्वयन : वर्षा भारद्वाज
अनुवाद : पूर्वा भारद्वाज, वंदना राग
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