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‘गुड न्यूज़ टुडे’ समाचार चैनल से ज्यादा हौसला बढ़ाने वाला चैनल है
4 सितंबर को इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरमैन कली पुरी ने चैनल के स्टूडियो में खड़े होकर दीवार की तरफ एक घूमता हुआ नीला गोला धकेला. इसके बाद स्क्रीन पर कंप्यूटर ग्राफिक्स से बने हेलीकॉप्टरों ने इंडिया टुडे की मीडियाप्लेक्स इमारत के बाहर आसमान में "जीएनटी" लिखा.
और यहां से उनके एक नए चैनल, गुड न्यूज़ टुडे की शुरुआत हुई. यह भले ही बहुत नाटकीय लगे लेकिन ऐसा ही हुआ.
संभव है आप आश्चर्यचकित होकर कहें, "एक और समाचार चैनल? और कितने चाहिए?"
लेकिन प्रिय पाठक आपकी जानकारी के लिए मैं बता देना चाहता हूं कि यह कोई आम न्यूज़ चैनल नहीं है, यह चैनल ज़रा हटके है.
जैसा पुरी ने समझाया, "एक समाचार चैनल होने के नाते हम ज्वलंत मामलों, अर्थ खेल और विषय संबंधित आयोजनों पर रिपोर्ट करेंगे लेकिन विचार ऐसा है कि बुरे में से कुछ अच्छा सामने लाकर उस पर रोशनी डाली जाए. झुकाव किसी परेशानी पर न होकर समाधान की तरफ हो."
हमने कुछ दिन यह चैनल देखकर यह जानने की कोशिश की कि वह क्या करना चाह रहा है. अगर इसे एक वाक्य में कहा जाए तो, गुड न्यूज़ टुडे एक 24 घंटे चलने वाला चैनल है. जहां पर खुशमिजाज एंकर आपको समोसे-जलेबी खाते हुए "अच्छी खबरें" देंगे और टीआरपी रेटिंग्स को चबाते हुए कैमरे में देखेंगे. यह बात अतिशयोक्ति लग सकती है लेकिन यह यथार्थ है.
उपरोक्त बातें उनके शाम के कार्यक्रम "चाय पर चर्चा" से हैं, जहां पर एक नहीं पांच एंकर आपके स्क्रीन पर दिन की अच्छी खबरें देने के लिए प्रकट होती हैं. खबरें जैसे, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने घर पर पार्टी दी जहां पर उन्हें मजबूरन अजीब सा डांस करना पड़ गया.
कैसे मुंबई में स्मृति ईरानी और मुख्तार अब्बास नकवी ने आराम से कैमरों की मौजूदगी में डोसा खाया.
थोड़ा बहुत इस बारे में कि कैसे भारत रिकॉर्ड तोड़ संख्या में वैक्सीन के टीके लगवा कर कोविड से बेहतरीन लड़ाई लड़ रहा है. लेकिन क्योंकि यह खबर उतनी सकारात्मक नहीं है, इसलिए वे इसको दर्शकों के सामने आने वाले त्योहार कैसे आ रहे हैं इस बारे में बात करते हुए बताते हैं. दर्शकों को भी उत्साहित होना ही चाहिए, कोविड के दौरान उचित बर्ताव छोड़िए, आइए दर्शकों को अच्छी अनुभूतियां और उत्सव दिखाते हैं!
स्क्रीन पर मौजूद पांचों एंकरों ने काफी लंबा समय समोसे के मूल में जाने में भी लगाया. एक ने कहा, "भारत ने दुनिया को समोसे दिए, कमाल की बात है न?" दूसरी एंकर ने जवाब दिया, "असल में मेरी जानकारी के अनुसार, समोसा तुर्कमेनिस्तान से भारत आया." तीसरी एंकर बस हंसी और सबसे बोलीं, "मैं तो केवल कोने खाती हूं, कितना अच्छा है न?"
हंसी की खिलखिलाहट के साथ समोसे पर हो रही यह चर्चा, थोड़ी सी जलेबियों और चाय के साथ कुछ समय तक चली.
मोदी जी के "चाय पर चर्चा" चुनाव प्रचार के आइडिया को चुराकर काम में लेने के साथ-साथ, गुड न्यूज़ टुडे ने एक और दांव सोनू सूद को प्राइम टाइम "न्यूज़" एंकर बनाकर मारा. हर रात, जीएनटी पर सोनू सूद एक सकारात्मक रोल मॉडल बनकर अच्छी बातें फैलाएंगे, जैसा कि उन्होंने कोविड-19 की पहली और दूसरी लहर में किया था.
अगर आप भूल गए हों कि सोनू ने क्या किया, तो जीएनटी पर 40 मिनट का एक कार्यक्रम था जहां पर उन्होंने सोनू को अपने स्टार आकर्षण के रूप में दिखाया. वह चैनल पर संकट के दौरान प्रवासी मजदूरों की मदद करते हुए अपने फोटो और वीडियो देख रहे थे, और अपना स्वयंसेवी नेटवर्क चलाते हुए किस प्रकार उन्होंने अपने को सकारात्मक बनाए रखा इसकी कहानियां बता रहे थे.
मेरी नजर में इंडिया टुडे ग्रुप ने शानदार खेला है. इस हताशा भरे समय में सोनू सूद से ज्यादा खुशी और सकारात्मकता का जीवंत रूप कौन हो सकता है? जब सरकारें सब तरफ फेल हो रही थीं तब यह व्यक्ति हजारों लोगों के लिए आशा की एक किरण बनकर उभरा था.
सोनू सूद का शो, जिसका शीर्षक "देश की बात, सोनू सूद के साथ" है, कुछ-कुछ आमिर खान के द्वारा किए गए "सत्यमेव जयते" की रूपरेखा पर ही है. इस शो में सोनू पूरे देश से बात करने के लिए प्रेरणा देने वाले लोगों को लाएंगे, और इस बातचीत के दौरान उन लोगों ने समाज में क्या बदलाव लाया इसकी "गुड न्यूज़" लोगों को देंगे.
जहां एक तरफ दूसरे चैनल रोज़ अपने शो में चीख-पुकार करते हैं, वहीं गुड न्यूज़ टुडे पर सूद दर्शकों को आराम देने वाली कहानियां 9:00 बजे के प्राइम टाइम स्लॉट पर सुनाएंगे. इसे और कुछ नहीं तो एक रोचक प्रयोग ही मान सकते हैं, देखिए कितने दिन चलता है.
इसके अलावा उनकी कई पेशकशों में से एक "भजन सम्राट" अनूप जलोटा हैं, जो हर सुबह गाने और सकारात्मक उत्साहवर्धक बातें बताने के लिए मौजूद रहेंगे.
चैनल के पास शैलेंद्र पांडे भी हैं जो अपना भविष्य बताने वाला कार्यक्रम "गुड लक टुडे" पेश करेंगे. और कोई आश्चर्य की बात नहीं कि उनका यही वीडियो यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखा गया क्योंकि भारत के दर्शक "न्यूज़" चैनल अगर किसी एक चीज के लिए देखते हैं, तो वह यह है कि आज अपने भगवान के सामने कितनी लौंग रखें.
पांडे जी पैसा पाने के लिए भी कुछ ऐसे ही उपाय बताते हैं, जैसे कि कैसे आप शुक्रवार को मध्य रात्रि में उठें, देवी लक्ष्मी की पूजा करें और मूर्ति पर गुलाब की माला चढ़ाएं.
भविष्य बताया जा चुका है तो सहज सी बात है कि उनका कोई शो ऐसा भी हो जो मनोरंजन चैनलों पर हो रहे सास बहू साजिश के ड्रामे से जुड़ी गतिविधियों के बारे में भी आपको अवगत कराए. इस कार्यक्रम का नाम है, "सास, बहू और बेटियां", शायद "बेटियां" इसको एक नया और सकारात्मक एंगल देता है.
यह सभी भारत में आमतौर पर जांचे-परखे गए हल्के-फुल्के "न्यूज़" फार्मूले हैं. यह बाकी चैनलों पर भी उपलब्ध हैं जो अपने 24 घंटे भरने के लिए भरसक कोशिश कर रहे हैं. लेकिन गुड न्यूज़ टुडे पर असली "न्यूज़" में क्या उपलब्ध है?
केवल अच्छी खबरें दिखाना कोई नया सिद्धांत नहीं है. 1993 में अमेरिका के अंदर एक तिमाही मैगजीन पॉजिटिव न्यूज़ शुरू हुई थी जो केवल "रचनात्मक पत्रकारिता" पर ही केंद्रित थी. भारत में भी, एक मशहूर न्यूज़ वेबसाइट बेटर इंडिया है जो सकारात्मक खबरों को प्रकाशित करने पर ही ध्यान देती है. उनका दावा है कि वह हर महीने नौ करोड़ लोगों तक पहुंचते हैं, जाहिर है इस प्रकार की खबरों के लिए बाजार उपलब्ध है.
लेकिन क्या हर खबर को सकारात्मक रूप से बताने का काम दर्शक या पाठक को मिलने वाली जानकारी के एवज में होना चाहिए? अगर ऐसा होता है, तो क्या इसका मतलब यह नहीं होगा कि सत्ता में बैठे हुए लोगों की जवाबदेही नहीं तय की जा सकेगी क्योंकि चोट करने वाली पत्रकारिता को आमतौर पर "नकारात्मक" की संज्ञा दी जाती है?
कली पुरी ने बेस्टमीडियाइन्फो को दिए अपने इंटरव्यू में कहा, "हर खबर अच्छी नहीं हो सकती, हम यथार्थ को नजरअंदाज नहीं कर रहे. कुछ परिस्थितियों में हम बुरी खबरों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहरायेंगे. यह सही है कि न्यूज़ चैनलों का काम सत्ता में बैठे लोगों से जवाबदेही भी है. कोरोना के दौरान अगर न्यूज़ चैनलों ने बेहतरीन काम नहीं किया होता, तो मेरा मानना है कि और लोगों की जान गई होती. लेकिन मेरा यह भी मानना है कि न्यूज़ चैनलों का काम समाधानों को सामने लाकर उन पर रोशनी डालना भी है. इस समय न्यूज़ की दुनिया का परिदृश्य संतुलित नहीं है."
हमने सुनियोजित हुए बिना चैनल पर एक न्यूज़ बुलेटिन यह जानने के लिए देखा कि क्या दिखाई जा रही खबर को सकारात्मक मोड़ दिया जा रहा है.
यह बुधवार सुबह की खबर है जिसमें मोदी जी की तस्वीर के साथ लिखा है, "त्योहार से पहले गुड न्यूज़ मिलेगी." यह खबर इस बारे में थी कि कैसे मंत्रिमंडल टेलीकॉम और ऑटो सेक्टरों को राहत पैकेज देने पर विचार करेगा. एंकर इसे "इन दो सेक्टरों के लिए अच्छी खबर" के रूप में पेश करती हैं.
रिपोर्ट कहती है कि आइडिया-वोडाफोन के सर पर करीब स्पेक्ट्रम आवंटन के बकाया 60,000 करोड़ के साथ ही साथ, 1.9 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. ऐसी स्थिति में संभव है कि सरकार उनकी मदद के लिए एक राहत पैकेज लेकर आए. लेकिन अगर आप दूसरे समाचार चैनलों की रिपोर्ट देखेंगे तो आपको एक महत्वपूर्ण जानकारी यहां गायब मिलेगी.
टेलीकॉम सेक्टर तनाव में है और आइडिया-वोडाफोन जैसी कंपनियां बड़े घाटे रिपोर्ट कर रही हैं. यह बाजार में रिलायंस जिओ के आने के बाद हुआ क्योंकि उन्होंने कीमतें बहुत कम रखकर औरों के ग्राहक छीन लिए और बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ी बन गए. सरकार रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के बीच एकाधिकार की स्थिति को रोकने के लिए "राहत पैकेज" प्रदान कर रही है. इसमें टेलीकॉम ऑपरेटरों से मिलने वाले भुगतान को छोड़ने के साथ-साथ सरकार को उन्हें एक गारंटी भी देनी होगी जिससे वह धन इकट्ठा कर सकें. खबर में, इनमें से एक भी बात का जिक्र नहीं किया गया और हम इस बात की तरफ ध्यान दिलाना चाहेंगे कि यह बहुत महत्वपूर्ण जानकारी है.
लेकिन गुड न्यूज़ टुडे पर दर्शकों को यह जानकारी देने का कोई प्रयास नहीं किया गया. यह खबर अगले महीने भारत और पाकिस्तान के मैच और भारत में रिकॉर्ड संख्या में वैक्सीन के टीकाकरण (पहला टीका) की "अच्छी खबरों" के बीच प्रस्तुत की गई. वैक्सीन के दूसरे टीके की महत्वपूर्ण बात का भी जिक्र नहीं हुआ.
एक और उदाहरण. इस वीडियो का शीर्षक "बिहार बाढ़ न्यूज़" है, जो चैनल के द्वारा नरेंद्र मोदी की अमृत महोत्सव योजनाएं शुरू करने के लिए तारीफों से प्रारंभ होता है. कार्यक्रम का दूसरा हिस्सा लेह-लद्दाख में स्कूल खोलने, फिर मध्य प्रदेश के एक गांव में एक शिक्षक के बच्चों को पढ़ाने और बिहार में एक नाव पर एक स्कूल को लेकर है.
यह माना कि यह सभी अच्छी, सकारात्मक और प्रेरणा देने वाली कहानियां लोगों के मुसीबत से उबरने को लेकर हैं. लेकिन बहुत सूक्ष्म दृष्टि रखने से बड़ी तस्वीर कहीं खो जाती है.
संसद के पिछले मॉनसून सत्र में शिक्षा मंत्रालय ने हर राज्य में इंटरनेट की उपलब्धता वाले स्कूलों की सूची दी. इस सूची के अनुसार देश में 1,19,581 से अधिक स्कूलों में इंटरनेट उपलब्ध है.
लेकिन एक दूसरे सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारत में 10,32,569 सरकारी स्कूल हैं. इसका मतलब भारत के केवल 11.5 प्रतिशत स्कूलों में ही इंटरनेट उपलब्ध है. इससे साधारण तरीके से कहें तो महामारी के दौरान भारत के अंदर 10 में से 9 विद्यालयों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी. गुड न्यूज़ टुडे जैसा एक चैनल अच्छी खबरों को निकालने के लिए इस तस्वीर को नजरअंदाज कर देगा, क्योंकि वह तस्वीर हताश कर देने वाली है.
यह विचित्र बात है कि यह 24 घंटे और सातों दिन चलने वाला चैनल, जिसके पास विस्तृत रिपोर्ट करने का पूरा समय उपलब्ध है, ऐसा करने का प्रयास भी नहीं करता. ऐसा नहीं है कि हमारी बाकी न्यूज़ चैनलों से बड़ी अपेक्षाएं हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि गुड न्यूज़ टुडे ने एक ऐसा फार्मूला निकाल लिया है जिससे लोगों को सही खबरें न देने के लिए कोई बहाना भी न बनाना पड़े.
गुड न्यूज़ टुडे एक न्यूज़ चैनल होने से कहीं ज्यादा एक उत्साहवर्धक यानी "मोटिवेशनल" चैनल है.
(युसरा हसन के इनपुट्स के साथ)
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