NL Charcha
एनएल चर्चा 170: विनोद दुआ, राजद्रोह कानून की वैधता और सीमाएं साथ में जीडीपी के आंकड़े
एनएल चर्चा के 170वें अंक में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की वैक्सीनेशन नीति पर सुनवाई, फाइज़र और मॉडर्ना को उत्तरदायित्व से छूट, विनोद दुआ पर दर्ज राजद्रोह केस, पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी का आंकड़े -7.3 प्रतिशत तक सिकुड़ना और रामदेव को समन जैसे विषयों का जिक्र हुआ.
इस बार चर्चा में बूम लाइव की लीगल मामलों को कवर करने वाली पत्रकार रितिका जैन बतौर मेहमान शामिल हुईं. न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन और एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस भी चर्चा का हिस्सा रहे. संचालन अतुल चौरसिया ने किया.
चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल ने मेघनाद से जीडीपी के माइनस में जाते आंकड़ों और मीडिया द्वारा जीडीपी सुधार की उल्टी तस्वीर दिखाने की जो कोशिशों पर बात की.
मेघनाद कहते हैं, "अनुमान लगाया जा रहा था कि 8 प्रतिशत की सिकुड़न होगी जीडीपी में लेकिन 7.3% ही रहा. तो हमारा प्रदर्शन 0.7% बेहतर रहा. टीवी पर इसी को लेकर खुशी जताई जा रही है. इससे पहले के तिमाही आंकड़ों में 1.4 प्रतिशत का ग्रोथ दिखा था. जिसे टीवी पर हाईलाइट किया जा रहा था. निर्मला सीतारमण ने भी बयान दिया था कि सुधार हो रहा है, धीरे धीरे रिकवरी हो रही है. लेकिन आप देखेंगे तो चौथे तिमाही में हम एक बार फिर से लॉकडाउन में चले गए.”
अतुल ने आनंद से पूछा कि टीवी मीडिया के कुछ पक्षों द्वारा जीडीपी के आंकड़ों को घुमा फिरा कर कहने की जो आदत है उसे आप कैसे देखते हैं?
आनंद कहते हैं, “पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जो रिकवरी है वो शायद थोड़ा तेज़ है. उसके कई कारण हैं. पहला, इस बार पूरे देश में लॉकडाउन नहीं था इसलिए आंकड़े पहले जैसे नहीं है. दूसरा, यह लहर विश्वव्यापी नहीं है, अलग-अलग टुकड़ों में है. इसे काउंटर करने में बाहरी तत्वों का प्रभाव नहीं था जिस वजह से रिकवरी तेज हो सकती है. अब यह कितना तेज होगा यह अटकलबाजी का विषय है. अर्थशास्त्री भी इसको लेकर संशय में रहते है. वह खुलकर कोई आंकड़ा नहीं देते.”
अतुल ने रितिका से विनोद दुआ के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर सवाल किया.
रितिका जवाब कहती हैं, “सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विनोद दुआ ने अपने शो में जो कहा वह राजद्रोह नहीं है. इसका मतलब ये है कि उन्होंने देश के खिलाफ कुछ नहीं बोला और ना ही वो चाहते हैं कि वो देश के टुकड़े-टुकड़े हों. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्होंने जो सरकार के खिलाफ जो बोला वो आलोचनात्मक जरूर था लेकिन देश के खिलाफ कुछ नहीं था.”
रितिका ने सुप्रीम कोर्ट की राय के बारे में बताते हुए कहा, “1962 में केदारनाथ सिंह बनाम बिहार सरकार के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी पर राजद्रोह तभी लग सकता है जब उसके बोलने पर पब्लिक ऑर्डर खराब हो और हिंसा हो. सरकार की आलोचना करना राजद्रोह नहीं माना जाता. केदारनाथ जजमेंट एक लैंडमार्क जजमेंट है.”
रितिका आगे कहती हैं, “हाल फिलहाल में जितने लोगों पर राजद्रोह लगा है उन सब पर सरकार की आलोचना करने के कारण ही लगा है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पिछले एक दो महीने से चर्चा हो रही है. कोर्ट ने कहा था कि राजद्रोह को परिभाषित किया जाना जरूरी है.”
सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से लंबित इस कानून पर एक स्पष्टता देने की कोशिश की है हालांकि कोर्ट इस कानून को पूरी तरह से खत्म करने के बारे में कोई निर्णय देने से बचते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि यह विधायिका का कार्यक्षेत्र है.
राजद्रोह के विभिन्न पहलुओं पर इस बार की चर्चा में बहुत विस्तार से बातचीत हुई. पूरी बातचीत सुनने के लिए इस बार का एनएल चर्चा पॉडकास्ट जरूर सुनें और न्यूज़लॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
टाइम कोड
0 :00 - इंट्रो
1:07 - हेडलाइन
3:50 - जीडीपी के आंकड़े
12:00 - विनोद दुआ के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
44:00 - वैक्सीनेशन पॉलिसी
59:46 - पुराने ट्वीट्स को लेकर उपजा विवाद
1:16:35 - सलाह और सुझाव
पत्रकारों की राय, क्या देखा, पढ़ा और सुना जाए.
रितिका जैन
नेटफ्लिक्स सीरीज - क्रैश लैंडिंग ऑन यू
आनंद वर्धन
रिपुदमन सिंह की किताब - सिक्सटीन स्ट्रामी डेज
जोसेफ एलटर की किताब - रेसलर बॉडी आईडेंटिटी एंड आइडियोलॉजी इन नार्थ इंडिया
रुद्रनेल सेनगुप्ता की किताब - एंटर द दंगल
मेघनाथ एस
कॉन्स्टिटूशन सीजन 2: फ्री स्पीच
अतुल चौरसिया
सोलेमन महालुंग पर आधारित फिल्म कलुशी
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प्रोड्यूसर- लिपि वत्स और आदित्य वारियर
एडिटिंग - सतीश कुमार
ट्रांसक्राइब - अश्वनी कुमार सिंह
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