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हिंसा लेकिन सांप्रदायिक नहीं: भाजपा का बंगाल में दुष्प्रचार
पिछले हफ्ते रविवार रात को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के सत्ता में लौटने के कुछ ही घंटों बाद तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने कथित तौर पर कमल मंडल के घर पर हमला कर दिया. कमल उत्तर 24 परगना जिले की जगतदल विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 171 पर भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं, यह सीट रविवार को आए चुनाव परिणामों में तृणमूल कांग्रेस ने जीत ली.
कमल और उनकी पत्नी को डंडों से मारा गया, उनकी 80 वर्षीय मां शोभारानी ने बीच-बचाव की कोशिश की लेकिन उन्हें भी चोट लगी. तीनों को बाद में अस्पताल पहुंचाया गया जहां पर शोभा रानी की चोटों की वजह से मृत्यु हो गई.
हुगली की खाना कुल सीट पर भाजपा विजयी रही और रविवार रात को नसीबपुर में कथित तौर पर भाजपा समर्थकों ने तृणमूल के कार्यकर्ता देबू प्रमानिक के घर पर हमला कर दिया. उन्होंने उसे मारा फिर अगले दिन उसे पीटने के लिए फिर से लौटे, देबू को अस्पताल ले जाया गया जहां पर उनकी मृत्यु हो गई.
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद बंगाल में भड़की तथाकथित राजनीतिक हिंसा में मारे गए 20 लोगों में से यह दो मृतक हैं. इन चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने अभूतपूर्व जनादेश के साथ तीसरी बार राज्य की सत्ता में वापसी की है, वहीं भाजपा 77 सीटों पर विजयी होकर राज्य में प्रमुख और कई मायनों में एकमात्र विपक्ष के रूप में उभरी है.
अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ हुई हिंसा के नाम पर भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक बहुत बड़ा अभियान चलाया. बड़े भाजपा नेताओं और कई चर्चित लोगों ने बंगाल में राष्ट्रपति शासन से लेकर केंद्रीय सशस्त्र बलों को भेजे जाने की मांग कर डाली.
कुछ नेताओं ने यह आरोप भी लगाए कि हिंदुओं के ऊपर हमला मुसलमान कर रहे थे.
हिंसा का लेखा जोखा
बंगाल की जमीनी हकीकत यह है कि हिंसा के शिकार सभी राजनीतिक दलों के लोग हुए हैं. 20 घोषित मृत लोगों में से 9 के परिवार यह दावा करते हैं कि वह भाजपा समर्थक हैं, 8 मृतकों के परिवार दावा करते हैं कि वह तृणमूल कांग्रेस के समर्थक हैं. बाकी बचे तीन मृतकों में एक इंडियन सेक्युलर फ्रंट और एक सीपीआईएम के सदस्य थे, एक मृतक का किसी राजनीतिक दल से लेना-देना नहीं था.
पूर्व वर्धमान जिले की रायना विधानसभा सीट इलाके समसपुर में तृणमूल कांग्रेस के समर्थक गणेश मलिक पर धारदार हथियारों से हमला किया गया. उनकी बाद में अस्पताल में मृत्यु हो गई और उनके बेटे ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थकों ने उन पर बेवजह हमला किया.
इसी जिले के जमालपुर विधानसभा क्षेत्र में नबग्राम इलाके में तृणमूल और भाजपा समर्थकों में झड़प हुई. बिभास बाग, शाहजहां शाह और एक महिला काकाली क्षेत्रपाल की इसमें मृत्यु हो गई. भाजपा का दावा था कि काकली उनके स्थानीय संयोजक की मां थीं, वही सीपीआईएम का दावा था कि वह उनकी पार्टी की महिला प्रकोष्ठ की नेता थीं और पोलिंग एजेंट के तौर पर काम करती थीं. इसी जिले के केटूग्राम इलाके में तृणमूल के ग्राम पंचायत के सदस्य श्रीनिवास घोष की कथित तौर पर भाजपा समर्थकों ने सामूहिक हत्या कर दी.
रायना और जमालपुर दोनों ही क्षेत्रों से तृणमूल कांग्रेस जीती थी.
कोलकाता के बेलेघाटा में अभिजीत सरकार नाम के भाजपा समर्थक की कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने सामूहिक हत्या कर दी. नादिया जिले की चाकदहा विधानसभा सीट पर उत्तम घोष नाम के भाजपा कार्यकर्ता की लाठियों से पिटाई के बाद मृत्यु हो गई. बीरभूम जिले के बोलपुर में गौरव सरकार नाम के भाजपा कार्यकर्ता की कथित तौर पर तृणमूल कार्यकर्ताओं के मंगलवार को हमले के बाद मृत्यु हो गई.
कूचबिहार के दिनहाटा में हरिजन रॉय नाम के भाजपा कार्यकर्ता को कथित तौर पर तृणमूल समर्थकों ने मार दिया. भाजपा ने दिनहाटा सीट केवल 69 वोटों के अंतर से जीती थी. इसी क्षेत्र के एक और भाजपा कार्यकर्ता चंदन रॉय, जिन्हें बीते सोमवार काफी चोटें आई थीं, गत मंगलवार की रात उनकी मृत्यु हो गई. इसी जिले के एक और भाजपा कार्यकर्ता मिंटू बर्मन जिन पर सोमवार को धारदार हथियारों से हमला किया गया था उनकी भी मंगलवार को मृत्यु हो गई.
दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में भाजपा समर्थक हरण अधिकारी ने तृणमूल समर्थकों से झड़प होने के बाद आई हुई चोटों की वजह से जान गंवा दी. प्रताप नगर मटियारी के कुछ स्थानीय नागरिकों ने हमें अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि झड़प इसलिए शुरू हुई क्योंकि कुछ स्थानीय तृणमूल कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर भाजपा के कुछ झंडे फाड़ दिए थे.
एक तरफ भाजपा ने यह दावा भी किया है कि सीतलकुची के रहने वाले मानिक मोइत्रा जिनकी सोमवार को गोली लगने की वजह से मृत्यु हुई उनके समर्थक थे, हालांकि उनके परिवार वालों ने किसी भी तरह के राजनैतिक संबंध से इंकार किया है.
दूसरी तरफ हुगली जिले के तारकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में चौतारा के रहने वाले गोपाल पात्रा को सामने से गोली मार दी गई. वह रविवार रात चिनसुरा के जिला अस्पताल में गुजर गए और उनके साथ ही अस्पताल आए सुखचंद पात्रा बुधवार शाम तक गंभीर हालत में थे. उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले के इलाके तूफानगंज में तृणमूल कार्यकर्ता शाहीन उर रहमान की धारदार हथियारों से हुए घावों की वजह से मृत्यु हो गई. उनकी लाश जब मिली तो उनके हाथ और पैर बंधे हुए थे. उत्तर बंगाल के ही अलीपुरद्वार में मथुरा इलाके में तृणमूल की बूथ यूनिट के अध्यक्ष दीपक रॉय, की चाकुओं से मंगलवार रात हत्या कर दी गई.
दत्तपुकुर इलाके में इंडियन पॉपुलर फ्रंट के कार्यकर्ता हसनुर जमान की मृत्यु, कथित तौर पर उनके ऊपर तृणमूल कार्यकर्ताओें के द्वारा सोमवार को बम फेंके जाने की वजह से हुई.
प्रचार की लड़ाई
जमीन की झड़पों के अलावा सोशल मीडिया पर एक दूसरी लड़ाई चल रही थी जिसमें भाजपा हिंसा को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रही थी. वह कह रहे थे कि हिंदुओं पर हमला मुसलमान कर रहे हैं.
भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता जो तारकेश्वर से चुनाव लड़े और हार गए, ने ट्वीट किया कि "हज़ार से ज्यादा हिंदू परिवार" "लुटेरी/हत्यारी भीड़" से छुपे हुए थे. उन्होंने यह भी लिखा कि "महिलाओं के साथ शारीरिक उत्पीड़न या और भी कुछ बुरे बर्ताव की खबरें" मिल रही हैं.
भाजपा के राज्य के यूथ विंग के अध्यक्ष और विष्णुपुर से सांसद सुमित्रा खान ने दावा किया कि नानूर में दो महिलाओं का तृणमूल के गुंडों ने सामूहिक बलात्कार किया. उनका यह ट्वीट बाद में हटा दिया गया.
बीरभूम जिले के एसपी नागेंद्र त्रिपाठी ने इन आरोपों को "निराधार" बताया.
उन्होंने मीडिया से कहा, "कल शाम से फेसबुक और ट्विटर पर यह फैलाया जा रहा है और कुछ विशेष राजनैतिक सोच वाले लोग इन्हें फॉरवर्ड और रीट्वीट कर रहे हैं. वह कह रहे हैं कि नानूर इलाके में महिलाओं के साथ बलात्कार और कई महिलाओं के साथ छेड़खानी हुई है. हमने इन दावों की पुष्टि की और स्थानीय भाजपा नेताओं से बात भी की है, खबर निराधार है. यहां तक कि स्थानीय भाजपा नेता कह रहे हैं कि उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है."
खास बात है कि त्रिपाठी की नियुक्ति चुनाव आयोग के द्वारा की गई थी और उनकी सोशल मीडिया पर, चुनावों के दौरान नंदीग्राम में ममता बनर्जी से साफगोई की वजह से काफी तारीफ हुई थी.
इसके बाद भाजपा की एक महिला पोलिंग एजेंट ने मीडिया को बताया कि सोशल मीडिया पर 'गलत जानकारी' फैलाई जा रही थी कि उनका सामूहिक बलात्कार हुआ है. उन्होंने कहा कि यह खबर निराधार है.
भाजपा के बंगाल प्रमुख और राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी कैलाश विजयवर्गीय ने भी हिंसा को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की. उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो डाला जिसमें दो आदमी, दो महिलाओं को पीट रहे थे और दावा किया कि "मुसलमान हिंदुओं को पीट रहे हैं."
लेकिन नंदीग्राम पुलिस थाने के एक अफसर ने इस संवाददाता को बताया कि वह वीडियो किसी व्यक्तिगत झगड़े का था न कि किसी राजनैतिक झगड़े का.
भाजपा महिला मोर्चा के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय प्रमुख, प्रीति गांधी ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया जिसके साथ छेड़छाड़ की गई थी. इसमें आदमियों का एक समूह, तृणमूल कांग्रेस के चुनावी गाने, खेला होबे पर नाचते हुए तलवारें लहरा रहा था. 2020 का एक यूट्यूब वीडियो, यही दृश्य एक दूसरे गाने पर दिखाता है.
प्रीति ने अपना वीडियो नहीं हटाया लेकिन भाजपा की राज्य इकाई के सदस्य अभिजीत दास जिन्होंने पहले यह वीडियो शेयर किया, बाद में उन्होंने उसे हटा दिया.
कई और लोगों ने भी इस कथानक को, यह कहते हुए खूब बढ़ाया की यह हिंसा, 1947 में बंटवारे के समय बंगाल में हुई हिंसा जैसी है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि यह "बंटवारे के दिनों की याद" दिलाता है, वहीं विश्व हिंदू परिषद के बंगाल प्रवक्ता सॉरीश मुखर्जी ने, आज के बंगाल के वातावरण की तुलना 1946 के उस दिन से की, जिस दिन मुस्लिम लीग ने अलग देश पाकिस्तान बनाने के लिए "सीधी कार्यवाही" करने की घोषणा की थी.
लेखक अभिजीत मजूमदार ने विश्व हिंदू परिषद की प्रेस विज्ञप्ति को ट्विटर पर शेयर किया और उसकी एक लाइन वहीं लिखी, "हिंदू समाज को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है, और वो उसका इस्तेमाल करेगा." अभिजीत ने लिखा, "बिल्कुल करना चाहिए." उन्होंने हिंसा की तुलना, "जिहादियों के द्वारा खून से होली" मनाने से की.
इस हिंसा से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी है कि भाजपा के द्वारा तथाकथित तौर पर मारे गए पांच तृणमूल कार्यकर्ताओं में से चार हिंदू थे.
गलत प्रचार यहीं नहीं रुका.
पश्चिमी मिदनापुर जिले में एक लड़की मरी हुई पाई गई. पुलिस पूछताछ शुरू कर पाती उससे पहले ही कई सोशल मीडिया के योद्धाओं ने यह दावा किया कि "उसका बलात्कार और हत्या मुर्शिदाबाद के शांतिप्रिय कारीगरों" ने की है. यहां पर यह उपमा साफ समझ आती है क्योंकि मुर्शिदाबाद जिले की दो-तिहाई जनसंख्या मुस्लिम है और उनमें से काफी लोग कारीगरी करते हैं.
जिले के पुलिस अधिकारियों ने हमें बताया कि यह आरोप बेबुनियाद हैं.
अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक आई नहीं और उन्हें बलात्कारियों के संप्रदाय का ज्ञान भी हो गया! हम ऐसी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे."
लड़की के घर के पास रहने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा की लड़की की मृत्यु को सांप्रदायिक तनाव में बदलने की कोशिशें हो रही थीं.
हिंसा बनाम झूठी खबरें
सीपीआई-माले की सदस्य कविता कृष्णन ने इस कथानक को अपनी पीठ में कम से कम शब्दों में रेखांकित किया.
सीपीआईएम के एक समर्थक, अभिनेता जॉयराज भट्टाचार्जी ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि राजनीतिक हिंसा हो रही है और तृणमूल से वामपंथी, आईएसएफ और भाजपा के कार्यकर्ता सभी त्रस्त हैं. लेकिन इस हिंसा को सांप्रदायिक पुट देकर भाजपा उससे भी गंदा खेल, खेल रही है. यह घटनाएं राजनीतिक हिंसा की हैं, जो बंगाल की राजनैतिक संस्कृति का बहुत सालों से हिस्सा रहा है… भाजपा के सांप्रदायिक प्रचार में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है."
आज की परिस्थितियों के हिसाब से, हिंसा के इस चक्र को रोकने की पूरी जिम्मेदारी नई चुनी हुई ममता बनर्जी की सरकार पर है. इसी के साथ भाजपा के जिम्मेदार विपक्ष की भी राज्य को बहुत आवश्यकता है, लेकिन उसे सोशल मीडिया पर इन अफवाहों को उड़ाकर आग को हवा देने से बचना चाहिए.
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