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यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर: हरिद्वार कुंभ में कोविड टेस्ट के नाम पर मनमानी
उत्तराखंड सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए हरिद्वार कुंभ में जाने वाले लोगों के लिए आरटी-पीसीआर जांच रिपोर्ट अनिवार्य कर दिया है. यह रिपोर्ट नेगेटिव होनी चाहिए, तभी कोई हरिद्वार में एंट्री कर सकता है. यह नियम एक अप्रैल से लागू किए गए हैं. हालांकि प्रशासन द्वारा यह कार्य 31 मार्च से ही शुरू कर दिया गया. उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर चिड़ियापुर में बड़ी संख्या में यात्रियों को जबरन रोक लिया गया. इस दौरान यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस पूरे मामले को हमने वहां के कई अधिकारियों से समझने की कोशिश की लेकिन वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए.
हुआ कुछ यूं कि 31 मार्च से ही उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बॉर्डर चिड़ियापुर पर पुलिस द्वारा बैरिकेट्स लगा दिया गया. यहां उत्तराखंड में एंट्री करने वाले लोगों से पूछताछ के बाद स्थानीय लोगों को जाने दिया जा रहा था जबकि अन्य लोगों को पहले कोविड टेस्ट कराने के लिए कहा जा रहा था. यात्रियों को बताया गया कि अगर हरिद्वार में प्रवेश करना है तो उन्हें यह टेस्ट कराना ही होगा वरना वापस जाना होगा. हम भी उन्हीं यात्रियों में से एक थे.
हालांकि हरिद्वार निकलने से पहले हमने हरिद्वार थाने के एसएचओ और कई अन्य मीडियाकर्मियों से बात की थी. सभी का कहना था कि प्रतिबंध एक अप्रैल से लागू होंगे. 31 मार्च, रात 12 बजे तक कोई परेशानी नहीं है. रात को 12 बजे के बाद से नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया.
हरिद्वार थाने के एसएचओ अमरजीत सिंह ने हमें बताया, "आज (31 मार्च) आप आसानी से आ सकते हैं, किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. लेकिन रात 12 बजे से एसओपी लागू हो आएगा, उसके बाद बिना आरटी पीसीआर के एंट्री नहीं मिलेगी. आज कोई परेशानी नहीं है बिना किसी रोकटोक के आ सकते हैं."
हालांकि ऐसा नहीं हुआ और 31 तारीख की सुबह से ही यहां पुलिस और स्वास्थ्य संबंधी टीम कोविड की जांच करने लगी थी.
24-30 घंटे बाद आ रही रिपोर्ट
दिक्कत सिर्फ यह नहीं है कि हरिद्वार जाने वाले यात्रियों का टेस्ट एक दिन पहले शुरू कर दिया गया, इससे भी बड़ी दिक्कत यह रही कि यहां होने वाले कोविड टेस्ट की रिपोर्ट 24 से 30 घंटे बाद आती है. लेकिन टेस्ट के लिए सैंपल लेने के तुरंत बाद यात्रियों को हरिद्वार जाने की छूट मिल जाती है. सवाल है कि फिर इस पूरी कसरत का मतलब क्या है. कई लोगों की रिपोर्ट तो 30 घंटे बाद भी नहीं आई. ऐसे में अगर कोई कोरोना पॉजिटिव हरिद्वार पहुंच जाता है और उसके 24 या 30 घंटे बाद मैसेज के द्वारा पता चलता है कि उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव है, तब क्या होगा? इसका कोई भरोसेमंद जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है. यह कितनी बड़ी लापरवाही है इसका अंदाजा शायद प्रशासन को नहीं है.
हम उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर चिड़ियापुर पर सुबह लगभग 10 बजे पहुंचे थे. यहां हमारी गाड़ी को रोककर पूछा जाता है कि कहां जाना है? हरिद्वार बताने पर गाड़ी रोक ली जाती है और कोविड टेस्ट के लिए कहा जाता है. कोविड टेस्ट से पहले लंबी-लंबी 5-6 लाइनों में पर्चियां बनाई जा रही थीं. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग तो भूल ही जाइए यहां किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नहीं है. कई यात्रियों की पर्ची सिर्फ इसलिए नहीं बन रही है क्योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं था. वह अलग परेशान थे. यहां लाइनें आपस में इतना आस-पास थी कि सब एक दूसरे से सट कर खड़े थे.
यही हाल पर्ची बनने के बाद टेस्ट करने के लिए लगी लाइन का था. कुछ पुलिस वाले थे जो इधर-उधर खड़े थे. यहां हमारी मुलाकात सीओ अभय सिंह से हुई. जब हमने उनसे सवाल किया कि यह तो एक तारीख से होना था, आज से ही क्यों? वह कहते हैं, “यह टेस्ट तो आपको कराना ही होगा, नहीं करा सकते हैं तो आप वापस जा सकते हैं.”
हमने कहा टेस्ट कराने से परहेज नहीं है लेकिन यहां कोई व्यवस्था भी तो नहीं है. ना सोशल डिस्टेंसिंग है ना कोई सैनिटाइजेशन की व्यवस्था है. इस पर वह अपने पास खड़े कुछ पुलिसकर्मियों को फोर्स बुलाने का आदेश देते हुए अपनी गाड़ी में बैठकर आगे बढ़ गए.
इसके बाद हमने टेस्ट के लिए सैंपल दिया, इस दौरान स्वास्थ्य टीम ने बताया गया कि इसकी रिपोर्ट आपके मोबाइल पर 24 घंटे के भीतर आ जाएगी. टेस्ट से पहले बनवाई गई पर्ची पर मुहर लगाकर हमें वापस कर दी गई. रास्ते में मुश्किल भरी इस परेशानी से निकलने के बाद हम हरिद्वार पहुंच गए. मुश्किल भरी परेशानी शब्द का इस्तेमाल इसलिए करना पड़ रहा है क्योंकि वहां कि व्यवस्था देखकर हमें समझ आ गया था कि अगर यहां कोई कोरोना पॉजिटिव हुआ तो उसके संपर्क में कितने लोग आए होंगे. इसका अंदाजा शायद वहां मौजूद प्रशासन को नहीं था.
इस सबके बाद हम हरिद्वार घूमकर या यूं कहें कि आपना काम निपटाकर देर शाम वापस आ गए. वापस आने के बाद तक हमारी रिपोर्ट नहीं आई थी. मुझे यह रिपोर्ट अगले दिन 1 अप्रैल को शाम 5:10 बजे प्राप्त हुई. यानी 30 घंटे के बाद. इस बीच मैं हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक सैकड़ों लोगों के संपर्क में आया. और हरिद्वार में नहाया भी.
मेरे जहन में बार बार यही सवाल उठ रहा है कि अगर मेरी यह कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव होती और जिन सैकड़ों लोगों के संपर्क में मैं आया उन्हें कुछ होता तो इसका जिम्मेदार कौन होता. हजारों लोग इस रास्ते से हरिद्वार जाते हैं. उन सभी को औपचारिकता पूरी करने के बाद हरिद्वार जाने की एंट्री दी जा रही है. ऐसा करके यहां मौजूद पुलिस प्रशासन किसके साथ न्याय कर रहा है. अपने या यात्रियों के साथ?
इसके बाद हमने क्षेत्रीय एसएचओ दीपक कठैत से बात की. जब हमने उन्हें इस व्यवस्था के बारे में बताया तो उन्होंने कहा, "यह जिम्मेदारी मेडिकल टीम की है और प्रशासन द्वारा यह बात उन्हें बता दी गई है. अब जब तक एंटीजन टेस्ट कि रिपोर्ट नहीं आ जाती है उन्हें आगे नहीं भेजा जाएगा. इसमें मैं क्या कर सकता हूं. यह तो मेडिकल टीम की लापरवाही है."
जो लापरवाही चिड़ियापुर बॉर्डर पर हो रही है इसका जिम्मेदार कौन है? इस सवाल पर वह कहते हैं, "इस बात को मैंने वहां मौजूद डॉक्टरों से बोला है और वह इस व्यवस्था को सुधारने की बात भी कर रहे थे. अब देखते हैं क्या होता है."
क्या आपकी ड्यूटी नहीं लगी है वहा? "हमारी ड्यूटी लगी है वहां पर. लाइन बनवाने और किस गाड़ी को भेजना है किसको नहीं यह सभी काम हम ही देख रहे हैं. बाकी का काम स्वास्थ्य टीम संभाल रही है."
पर्ची काटने के लिए भी कुछ लड़के बैठाए गए हैं. वह पर्चियों पर कुछ का कुछ लिख दे रहे हैं. वह आधार कार्ड से देखकर नाम तक नहीं लिख पा रहे हैं. उम्र और नाम भी ठीक नहीं लिख पा रहे हैं? इस सवाल पर वह कहते हैं, "वह सभी प्राइवेट लड़के हैं. यह सब जल्दीबाजी में हुआ है, इसके सुधार में थोड़ा टाइम लग जाएगा. भीड़ बहुत ज्यादा आ रही है यह भी एक समस्या है."
जो कार्य एक तारीख से शुरू होना था वह एक दिन पहले ही 31 मार्च से क्यों शुरू कर दिया गया, जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा? वह कहते हैं, "यह तो आदेश शायद एसडीएम सहाब के होंगे या कुंभ की तरफ से होंगे."
उनका कहना है कि अब टेस्ट के बाद रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही आगे भेजा जा रहा है, और अब 15-20 मिनट में ही रिपोर्ट आ रही है.
इस पूरे मामले पर हमने हरिद्वार के सीएमओ एसके झा से भी बात की. इस पर वह कहते हैं, "जब तक कुंभ मेला चलेगा वहां पर टेस्ट का काम जारी रहेगा. लोग स्नान कर रहे हैं, इंफेक्शन होने का ज्यादा से ज्यादा डर है इसलिए वह टेस्टिंग चल रही है.”
मैं 31 अप्रैल को गया था मेरी रिपोर्ट 1 अप्रैल को यानी 30 घंटे बाद आई है लेकिन मैं इस बीच हरिद्वार घूम कर आ गया हूं मान लिजिए मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आती तो क्या होता जबकि इस बीच मैं सैकड़ों लोगों के संपर्क में आया हूं. इस पर वह कहते हैं, "आप तो पढ़े लिखे आदमी हैं आपको तो आइसोलेट होना चाहिए था. आप हरिद्वार क्यों गए. आरटीपीसीआर जब आपका लिया गया तो आप क्यों घूमें हैं आपने नियम का कोई पालन नहीं किया. अब आपके संपर्क में जो लोग आए होंगे उन्हें सबको देखना होगा. आप कहीं जाकर आइसोलेट हो जाइए.”
टेस्ट के बाद वहां मौजूद मेडिकल टीम और पुलिस टीम ने ही हमें हरिद्वार भेजा था. इस पर वह कहते हैं, आप जाइए और कहीं आइसोलेट हो जाइए. खैर, वह हमारी किसी भी बात का कोई संतुष्ट जवाब नहीं दे पाए और बीच में ही फोन काट दिया.
लखनऊ से अपनी छह माह की बेटी का मुंडन कराने हरिद्वार पहुंचे अनिल सिंह से हमारी मुलाकात हुई. वह कहते हैं, "हम लखनऊ से यहां तक आ गए हैं हमें कोई परेशानी नहीं हुई. लेकिन चिड़ियापुर में लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है. कोविड टेस्ट के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं. ऐसे टेस्ट का क्या फायदा जब बिना रिपोर्ट आए ही आगे भेज रहे हैं. यह तो सिर्फ परेशान करने वाली बात है." उन्होंने हमें बाद में बताया कि उनकी रिपोर्ट भी 24 घंटे बाद आई.
यहीं पर हमारी मुलाकात अमरोहा से आए एसपी सिंह से हुई. वह कहते हैं, "चिड़ियापुर बॉर्डर पर कोई नियम कानून नहीं है. यहां भीड़ इतनी है कि अगर किसी को कोरोना नहीं है तो यहां आकर हो जाए. सब एक दूसरे के ऊपर चढ़े हुए हैं."
वह आगे कहते हैं, "उनकी उम्र 58 साल है लेकिन रिपोर्ट में 98 साल लिख दिया है. वहां पर्ची बनाने के लिए कम पढ़े लिखे लोग बैठा रखे हैं. जिन्हें कोई जानकारी नहीं है. नाम तक ठीक से नहीं लिख पा रहे हैं. आधार कार्ड नहीं होने पर उनकी पत्नी का टेस्ट भी नहीं हो सका. उन्हें हरिद्वार ऐसे ही भेज दिया गया. इस व्यवस्था के कोई मायने नहीं है.”
हरिद्वार में हमारी मुलाकात हर की पैड़ी पर बरेली से आए राकेश से हुई. वह कहते हैं, "मैं भी आज ही आया हूं बस से. हमारी बस को ऐसे रोक लिया गया जैसे किसी आतंकी की बस हो. पुलिस ने सभी यात्रियों को उतारकर कोविड टेस्ट के लिए कहा. बस में बैठे आधे से ज्यादा यात्रियों के पास आधार कार्ड नहीं था तो उनका टेस्ट ही नहीं हुआ. बाद में हम सब ऐसे ही हरिद्वार आ गए. बेमतलब परेशान कर रहे हैं लोगों को. इनती भीड़ में तो वैसे ही कोरोना हो जाएगा. ये लोग हमारी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं."
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