Newslaundry Hindi
एनएल चर्चा 126: असम, बिहार में बाढ़ और यूपी की बदहाल कानून व्यवस्था
एनएल चर्चा का 126वां अंक विशेष रूप से असम और बिहार में आई बाढ़ पर केंद्रित रहा. इसके अलावा उत्तर प्रदेश तेजी से बढ़ रहे अपराध, लचर कानून व्यवस्था के अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को जारी किया अवमानना नोटिस भी इस चर्चा के विषयों रहे.
इस बार की चर्चा में असम से स्वतंत्र पत्रकार सादिक़ नक़वी जुड़े, साथ में न्यूज़लॉन्ड्री के स्तंभकार आनंद वर्धन और न्यूज़लॉन्ड्री के एसोसिएट एडिटर मेघनाद एस शामिल हुए. इस चर्चा का संलाचन न्यूज़लॉन्ड्री के कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया.
अतुल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि, आज हमारे साथ असम और बिहार बाढ़ पर बात करने के लिए दो पत्रकार है और इन दोनों ही प्रदेशों में बाढ़ से हालात बहुत खराब है. अतुल ने असम के आंकड़े देते हुए कहा कि प्रदेश में 24 जिले बाढ़ प्रभावित है वहीं 87 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 40 प्रतिशत इलाका बाढ़ की चपेट में है. सादिक़ से सवाल करते हुए अतुल पूछते हैं कि हर साल बाढ़ की ख़बरें हमारे सामने आती है इसका कोई पुख्ता उपाय क्यों नहीं है?
इस पर सादिक कहते हैं, “बाढ़ के कारण हर दिन आंकड़े बदल रहे है. आज की हालात में 93 लोगों की मौत हो गई हैं वहीं 26 जिले प्रभावित है. बाढ़ के शुरुआती समय में करीब 50 लाख लोग प्रभावित थे, लेकिन अब यह आंकड़ा कम हो रहा है. वहीं एक लाख बीस हजार फसल पानी के अंदर है. जैसा आप ने कहा की असम में बाढ़ हर साल आती है. यह सही है, किसी साल कम तो किसी साल ज्यादा. लेकिन इस समय लोगों को ज्यादा परेशानी इसलिए हो रही है क्योंकि कोविड-19 के दौरान यह बाढ़ आई है. इसके कारण लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है. हालांकि अभी तक किसी भी रिलीफ़ कैंप में कोविड-19 मरीज नहीं पाए गए हैं, जिससे सामूहिक प्रसारण का खतरा अभी उत्पन्न नहीं हुआ है.”
यहां पर चर्चा में आनंद को शामिल करते हुए अतुल कहते हैं, “हमारे देश की आबादी के कारण लोगों ने नदियों के रास्ते में अतिक्रमण कर लिया है, जिसके कारण हर साल बाढ़ आने की घटनाएं हमारे सामने होती है. नदियां तो अपने ही जगह पर बह रही है, लेकिन इंसानों ने उनके क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है. इसलिए हम कह सकते हैं कि बाढ़ को रोक पाना एक हद के बाद सरकारों के हाथ में नहीं है.”
इस पर आनंद कहते हैं, “हां यह तो है ही. इसके कारण लोगों ने बाढ़ को अपने जीवन का हिस्सा मान लिया है. बिहार के सभी जिलों में बाढ़ की समस्या नहीं है, लेकिन उत्तरी बिहार और सीमांचल बिहार के इलाकों में हर साल की तरह इस साल भी बाढ़ की समस्या है. हालांकि यहां पर व्यापक तौर पर जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन करीब 64 प्रखंड बाढ़ से प्रभावित है. बिहार में जो इलाके पलायन के है, वहीं इस बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित है.
अतुल ने यहां पर हस्तेक्षप करते हुए कहा कि कोविड-19 के कारण जैसे असम में एक खतरा महसूस हो रहा है, क्या ऐसा बिहार में भी है. आनंद कहते है बिहार में शुरू में कोविड-19 के मरीज कम थे, लेकिन अब यह बढ़ रहे है. इससे कहीं ना कहीं एक खतरा तो उत्पन हो रहा है.
मेघनाथ से सवाल करते हुए अतुल कहते हैं देश में बाढ़ को रोकने के लिए बड़े-बड़े बांध बनाए गए, हमने स्कूलों में पढ़ा कि नए भारत के नए मंदिर हैं. लेकिन इसके बावजूद भी बाढ़ की समस्या कम नहीं हुई, बल्कि यह बढ़ी ही है.
मेघनााथ कहते है कि यह अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है कि कितने लोग बाढ़ से प्रभावित है. इसके कारण उस राज्य की अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ता होगा. लेकिन साल दर साल हमारी एनडीआरफ की टीमों ने जरूर अच्छा काम किया है. उनकी गतिशीलता और एफीशिएंसी के चलते साल दर साल मौतों के आंकड़ों में गिरावट आई है. फिर चाहें वह बंगाल, ओडिशा हो या असम.
अन्य विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई. पूरी चर्चा सुनने के लिए यह पॉडकास्ट सुने.
न्यूजलॉन्ड्री को सब्सक्राइब करना न भूलें.
पत्रकारों की राय, क्या देखा पढ़ा और सुना जाए.
सादिक़ नकवी
बाढ़ की स्टोरीज़ को डिटेल में पढ़ा जाना चाहिए
मेघनाथ
विवेक कौल की रियल स्टेट पर एनएल सेना प्रोजेक्ट के तहत प्रकाशित रिपोर्ट
द फ़्यूचर ऑफ अनादर टाइमलान- किताब
आनंद वर्धन
राजेन्द्र यादव का उपन्यास ‘प्रेत बोलते है’ या सारा आकाश
अतुल चौरसिया
पत्रकार जूलिया केरी वॉन्ग के अनुभव पर आधारित द गार्डियन का पॉडकास्ट
दिल्ली दंगों पर प्रकाशित एनएल सेना स्टोरी - पार्ट 1 और पार्ट 2
***
आप इन चैनलों पर भी सुन सकते हैं चर्चा: Apple Podcasts | Google Podcasts | Spotify | Castbox | Pocket Casts | TuneIn | Stitcher | SoundCloud | Breaker | Hubhopper | Overcast | JioSaavn | Podcast Addict | Headfone
Also Read
-
Only 1,468 voters restored for Bengal’s final phase rolls. Poll duty staff among the excluded
-
LaLiT Hotel ducked crores in dues. Justice Varma granted it relief but HC tore up his order
-
From rights to red tape: India's transgender law amendment
-
बंगाल में माछखोर, मणिपुर पर मौन मोदी और राघव चड्ढा
-
‘Bend it like Modi!’ Forget Messi and Ronaldo. We have a ‘Made in India’ GOAT