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शाहीन बाग: ‘प्रदर्शन खत्म करने के लिए यह अमित शाह और केजरीवाल की चाल है’
चीन के वुहान इलाके से शुरू होकर कोरोना वायरस अब लगभग पूरी दुनिया में फैल चुका है. अब तक की जानकारी के मुताबिक यह वायरस दुनिया भर के 150 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. इटली, चीन, जर्मनी सहित कई देश इसके चलते लॉकडाउन की स्थिति में पहुंच गए हैं. इसे देखते हुए सरकार ने लोगों से अपनी गतिविधियां नियमित करने, बेहद जरूरी हालात में ही बाहर निकलने की अपील की है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस वायरस की चपेट में आकर अब तक नौ हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और दो लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं.
भारत में कोरोना वायरस से अब तक 4 लोगों की मौत हुई है जबकि 150 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हैं. दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस की रोकथाम के मद्देनज़र राज्य के सभी स्कूल-कॉलेज, जिम, सिनेमाघरों को 31 मार्च तक बंद करने का ऐलान किया है. साथ ही 50 से ज्यादा लोगों को एक जगह पर इकट्ठा होने परपाबंदी लगा दी है. ऐसे में पिछले करीब तीन महीने से ज्यादा समय से शाहीन बाग में जारी एनआरसी, सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग क्या करेंगे? यह एक बड़ा मौजूं सवाल पैदा हो गया है. वे अपना जमावड़ा ख़त्म करेंगे या विरोध दर्ज कराने का कोई अन्य रास्ता अपनाएंगे? इस स्थिति को समझने के लिए हमने शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत की.
शुरुआती दिनों से ही इस प्रदर्शन से जुड़े इसाई धर्मगुरु एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने बताया, “कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए हम सभी आवश्यक क़दम उठा रहे हैं. दिन में दो बार यहां डॉक्टर आते हैं, उनकी सलाह पर हम लोगों को हाथ धुलने और मास्क लगाने की हिदायत देते रहते हैं. बाकि हमने यहां बैठने के लिए दरियां हटा दी गई हैं, उनकी जगह पर तख्तों का इंतजाम किया गया है. ये तख्त कुछ दूरी पर रखे हैं ताकि गैरजरूरी स्पर्श से बचा जाय. यहां पूरी सावधानी बरती जा रही है. अब यहां कोई खतरा नहीं है.”
हालांकि कोरोना के प्रकोप को वहां मौजूद प्रदर्शनकारी महिलाएं कितना समझ पा रही हैं, यह बड़ा सवाल है. एक प्रदर्शनाकारी महिला से जब हमने इस बारे में बात की तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला और स्थिति की गंभीरता को खारिज करने वाला था. वो कहती हैं, “कोरोना इस प्रदर्शन खत्म करने की एक चाल है. अगर कोरोना वायरस होगा तो वह घर बैठे भी हो जाएगा, जरूरी नहीं कि प्रदर्शन में आने से ही हो.संसद में भी तो लोग इकट्ठा होते हैं, क्या वहां वायरस नही आ सकता. चाहे केजरीवाल हो या अमित शाह ये प्रदर्शन हटाने का सिर्फ एक बहाना है, मौत जब आनी होगी तभी आएगी. अगर कोरोना वायरस से आनी होगी तो वो घर बैठे भी आएगी.”
उनके आस-पास बैठी कुछ और महिलाओं ने भी उनकी इस बात पर हां में हां मिलाई. जाहिर है कि शाहीन बाग का प्रदर्शन वहां प्रदर्शन कर रहे लोगों के भीतर कोरोना के प्रति जागरुकता पैदा कर पाने में या तो विफल है या फिर वो इसकी अनदेखी कर रहा है.
उस महिला ने आगे कहा, “अब केजरीवाल आदेश दे रहे हैं कि 50 से ज्यादा लोग इकट्ठा न हों. जब दिल्ली में दंगा हुआ तो कह रहे थे कि मेरे हाथ में कुछ नहीं है. जब तक सीएए कानून वापस नहीं होता तब तक हम नहीं हटेंगे. सीएए खत्म कर दो, हमें शौक नहीं है अपने घर छोड़कर रास्ते में बैठने का. आज 95 दिन बाद केजरीवाल को याद आया है कि शाहीन बाग में 50 से ज्यादा महिलाएं बैठी हैं.”
शाहीन बाग की महिलाओं के लिए लंगर लगाने की खातिर अपना फ्लैट बेचने वाले डीएस बिंद्रा से भी हमारी मुलाकात और बात हुई. उन्होंने कहा, “देखिए बॉस, कोरोना वायरस अभी इंडिया में ज्यादा नहीं है, बल्कि अफवाह और दहशत ज्यादा है. और जो यहां केस सामने आए भी हैं वो भी उन लोगों में हैं जो विदेश से वापस आए हैं. फिर भी एहतियात के तौर पर यहां 50-50 का ग्रुप बना दिया गया है जिसमें अलग-अलग ओरतों को बिठा दिया गया है.”
सरकार के आदेश के सवाल पर बिंद्रा ने कहा कि केजरीवाल जी पहले अपनी डीटीसी बसों को देखें, जहां 50 की जगह 150 आदमीघुसकर बैठते हैं. रेलवे स्टेशन, राजीव चौक पर कितनी भीड़ रहती है, धक्कामुक्की हो रही है, आदमी के ऊपर आदमी चढ़ा जा रहा है, वहां कोरोना वायरस नहीं होगा क्या?
वहां ऐसा है तो क्या आप भी हालत खराब होने का इंतजार कर रहे हैं? इस पर बिंद्रा कहते हैं, “हम पूरी एहतियात बरत रहे हैं. जो छींकता- खांसता है उसे हम बाहर कर देते हैं, उसे अंदर बैठने नहीं देते, लेकिन आप ये मेट्रो आदि जगह पर तो नहीं कर सकते. बेहतर है सरकार यहां की बजाय, रेलवे स्टेशन, बसों पर ध्यान दे. यहां तो सब लोग समझदार हैं, प्रोटेस्ट पर इसका कोई फर्क नही पड़ता.”
प्रदर्शन स्थल पर हमारी मुलाकात सामाजिक कार्यकर्ता नाज़ खैर से हुई. उन्होंने हमें बताया कि सीएए एक बहुत बड़ा मुद्दा है और उस पर संघर्ष जारी रहेगा, लोग इसके खिलाफ हर तरीके से संघर्ष कर भी रहे हैं. लेकिन अब इसके साथ-साथ कोरोना का मुद्दा भी आ गया है, जो दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है. भारत अभी फेस-2 में है और कोशिश हो रही है कि ये फेस-3 में न पहुंचे, लोगों में न फैले. और हम इसके बारे में चारों तरफ सुन रहे हैं. लेकिन अगर हम इसे सुनकर भी अनसुना कर रहे हैं तो ये गलत बात है. चेन्नई में भी वहां के लोगों ने इस खतरे को देखते हुए अपना प्रदर्शन स्थगित कर दिया है. इस खतरे पर राजनीति करने की बजाए सभी को इस मुहिम के साथ जुडकर इसकी रोकथाम पर काम करने की जरूरत है.
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