Newslaundry Hindi
जेएनयू: ‘मैंने कहा कि मीडिया से हूं, पुलिस वालों ने पीटना शुरू कर दिया’
“जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के अंदर रविवार की शाम हुई हिंसा का चक्र जब थमा तब मैंने कैंपस के अंदर घुसने की कोशिश की. खुद को सुरक्षित करने के लिए मैं कैम्पस के अंदर खड़े पुलिस वालों के पास गया ताकि कोई हमला न कर दे. पुलिस वालों ने मुझे पहचान पूछा. मैंने कहा मैं पत्रकार हूं, लेकिन मेरी बात सुनने के बाद छह-सात पुलिसकर्मियों ने मुझे गिराकर मारना शुरू कर दिया. जैसे-तैसे मैं उनसे बच कर भागा,” यह कहना है, इंडो-एशियन न्यूज़ सर्विस (आईएएनएस) से जुड़े पत्रकार अनन्या का.
5 जनवरी की शाम जेएनयू में 50 से ज़्यादा की संख्या में घुसे नकाबपोश उपद्रवियों ने साबरमती हॉस्टल समेत कई हॉस्टलों में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को बुरी तरह से पीटा. घटना के वक़्त मौजूद रहे छात्रों ने बताया कि नकाबपोश लोगों के हाथों में कई तरह के खतरनाक हथियार थे जिससे वे छात्रों पर हमला कर रहे थे. हॉस्टल के अलग-अलग कमरों में जाकर उन्होंने छात्रों को निशाना बनाया.
जेएनयू में 5 जनवरी की पूरी रात क्या हुआ यहां पढ़ें…
जेएनयू में हो रहे विवाद को कवर करने पहुंचे कई पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया. कुछ पत्रकारों को गेट के बाहर प्रदर्शन कर रहे हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने निशाना बनाया तो कुछ पुलिस की हिंसा के शिकार हुए.
आईएएनएस के पत्रकार अनन्या को दिल्ली पुलिस के जवानों ने पीटा बिना किसी कारण के. न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए अनन्या बताते हैं, “मैं हिंसा के दौरान कैंपस में ही था. जब माहौल थोड़ा सही लगा तो मैं आठ बजे के करीब साबरमती हॉस्टल से बाहर निकला. वहां से निकलने के बाद मैं दूसरे हॉस्टल की स्थिति देखने जा रहा था कि किसी और हॉस्टल में तो ऐसा कुछ नहीं हुआ है. जब मैं वापस लौटा तो मुझे पुलिस वाले दिखे. मुझे लगा कि पुलिस वालों के साथ रहने पर मैं थोड़ा सुरक्षित रहूंगा. जहां दिल्ली पुलिस खड़ी थी मैं वहीं जाकर खड़ा हो गया.”
अनन्या आगे बताते हैं, “मेरे उनके पास खड़ा होने पर पुलिस वालों ने एतराज किया तो मैंने उनसे कहा कि मैं मीडिया से हूं. सुरक्षा के लिए आप लोगों के पास खड़ा हूं ताकि मैं अपना काम कर सकूं. उन्होंने दोबारा पूछा मीडिया से हो. मैंने हां बोला तो वे मुझे थोड़ा पीछे ले गए और गिराकर मारने लगे. मुझे सात-आठ पुलिसकर्मी मार रहे थे. मैं उनमें से किसी को पहचान नहीं सका क्योंकि वहां पूरा अंधेरा था.”
अनन्या बताते हैं, “पुलिस ने मुझे मारने के बाद धमकाते हुए कहा कि जल्द से जल्द यहां से निकल जा.”
इंडिया टुडे के पत्रकार को नक्सली बताकर प्रदर्शनकारियों ने मारा
जेएनयू गेट के बाहर स्ट्रीट लाइट लगभग तीन घन्टे तक ऑफ था. पुलिसकर्मियों के सामने नेताओं और पत्रकारों को भीड़ मार रही थी. स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव को मीडिया और पुलिस के सामने भीड़ ने गिरा दिया और उनपर हमला किया. वहीं कई पत्रकारों को भी भीड़ ने निशाना बनाया.
जेएनयू गेट के बाहर बवाल हो रहा था. भीड़ हिंसक होकर लोगों पर हमले कर रही थी लेकिन पुलिस खामोश थी. इसको लेकर इंडिया टुडे के पत्रकार ने जब अपने चैनल को फोन पर बताना शुरू किया तभी भीड़ ने उन पर हमला कर दिया.
इंडिया टुडे के पत्रकार ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बस ये कहा था कि पुलिस कुछ कर नहीं रही और लोग हिंसक हो रहे हैं. इतना कहना था कि भीड़ ने नक्सली, आतंकी कहते हुए रिपोर्टर और उसके कैमरामैन को मारना शुरू कर दिया.
न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए रिपोर्टर ने कहा, “भीड़ ने ना सिर्फ मुझ पर हमला किया बल्कि जब वहां से भागा तो मेरे पीछे दौड़े और मुझे मारते रहे. वे मुझे गालियां दे रहे थे. अब तक जेएनयू और जामिया के छात्र हमारी मुखालफत करते थे. लेकिन कभी हमला नहीं किया लेकिन यहां तो भीड़ हमें मारना चाहती थी.”
इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर न्यूज़लॉन्ड्री से बात की. इसलिए हम उनका नाम नहीं लिख रहे हैं.
जेएनयू गेट के बाहर कई पत्रकारों को निशाना बनाया गया. फोन से फ़ोटो डिलीट कराए गए.
न्यूज़लॉन्ड्री के रिपोर्टर आयुष तिवारी से प्रदर्शनकारियों ने भारत माता की जय के नारे लगाने को बोला. आयुष जब तक कुछ बोलते तभी एक दूसरा प्रदर्शनकारी अपने साथी को वापस लेकर चला गया.
दिल्ली पुलिस की उपस्थिति में पत्रकारों और नेताओं पर हुए हमले को लेकर न्यूज़लॉन्ड्री ने जेएनयू में मौजूद रहे दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारियों से कई दफा सवाल किया. हर बार वे सवाल को टालते रहे. आखिर में पुलिस ने बस ये कहा कि यहां सब कुछ नॉर्मल है.
Also Read
-
IE investigation: Ex-CEC calls dissent ‘unprecedented’, but some media outlets fall for ‘sources’ again
-
From vanguard to bystanders: What happened to teachers’ collective voice?
-
‘Found out after video went viral’: Father of Jamui assault survivor says ‘arrest is not enough’
-
BAPS: The Hindu organisation at the heart of Modi’s cultural diplomacy
-
The men building AI want us to fear it. We should – but not for the reasons they give