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6 महीने से काम कर रहा था नोएडा सेक्टर 44 पुलिस चौकी का गिरोह
बिहार के बेगूसराय के रहने वाले 47 वर्षीय जगदीश कुमार (बदला हुआ नाम) फरीदाबाद में अपने परिवार के साथ रहते हैं. 9 जून की शाम 7 बजे जगदीश अपने बेटे की होंडा सिटी कार से फरीदाबाद से नोएडा की तरफ आ रहे थे. महामाया फ्लाईओवर के पास एक महिला ने उनसे लिफ्ट मांगी. जगदीश ने गाड़ी रोक कर महिला को कार में बिठाया. महिला ने जगदीश कुमार से छलेरा मार्केट तक छोड़ने को कहा.
जगदीश बताते हैं, “गाड़ी में बैठने के बाद महिला खुद के बेरोज़गार होने का रोना रोने लगी और कोई नौकरी दिलाने के लिए कहने लगी. मैं बस उसकी बातें सुनता रहा. जल्द ही हम छलेरा मार्केट तक पहुंच गये. मैंने उससे गाड़ी से उतरने के लिए कहा. उसने कहा थोड़ा और आगे छोड़ दीजिये. गंतव्य पर उसे छोड़कर मैं निकला ही था कि महिला गाड़ी से उतर कर बहुत तेजी से पीछे भागी. मैं हैरान हुआ पर आगे निकल गया. मैं अभी कुछ दूर गया था कि पुलिस की एक जिप्सी मेरी कार के आगे आकर खड़ी हो गयी. पुलिस की गाड़ी से एक कॉन्स्टेबल उतरा और उसने मेरी गाड़ी की चाभी निकाल ली. वह बोला कि मैंने उस लड़की का रेप करने की कोशिश की है. मैं हक्का-बक्का रह गया. मैं उससे कुछ देर बहस करता रहा, लेकिन वो नहीं माने और मुझे ड्राइविंग सीट से हटाकर बगल में बैठा दिया और गाड़ी लेकर सेक्टर 44 स्थित पुलिस चौकी पहुंच गये.”
कुमार के मुताबिक चौकी पर जो चल रहा था वह और भी डराने और परेशान करने वाला था. जिस महिला को उन्होंने लिफ्ट दी थी, वह चौकी में मौजूद थी. कुमार बताते हैं, “वो चिल्ला-चिल्लाकर मुझ पर छेड़खानी करने और रेप करने की कोशिश का आरोप लगा रही थी. मैं कुछ समझ ही नहीं पा रहा था. वहां एक शराब में धुत कॉस्टेबल भी मौजूद था. वो बार-बार मुझे मारने के लिए दौड़ रहा था. उसने मेरा फोन छीन लिया. तभी वहां चौकी इंचार्ज सुनील शर्मा पहुंचा. चौकी इंचार्ज को जब पता चला कि मैं बिहार से हूं तो बोला, अरे हम भी सिवान से ही हैं. जगदीशजी को कोई हाथ नहीं लगायेगा. आप इलाके के आदमी हैं. मैं मैनेज करता हूं.”
यह सब चल ही रहा था तभी चौकी में एक नौजवान ने प्रवेश किया. कुमार के मुताबिक वह खुद को महिला का वकील बताकर उन्हें धमकी देने लगा. बार-बार जेल भेजने की धमकी दे रहा था. ये सब चल ही रहा था कि चौकी इंचार्ज एक व्यक्ति के साथ पहुंचा. उसका परिचय इलाके के सम्मानित व्यक्ति अवानाजी के रूप में कराया.
चौकी इंचार्ज सुनील शर्मा ने कुमार से कहा, “भाई मामला बिगड़ता जा रहा है. मैं कोशिश कर रहा हूं कि सलट जाये. ये लोग 12 लाख रुपये मांग रहे हैं. नहीं देने पर एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रहे हैं. मैं इसमें कुछ कम करा सकता हूं. मैंने उनसे कहा कि इतने पैसे नहीं दे सकता हूं. 12 लाख से कम होते-होते वे एक लाख पर आये.”
जगदीश बताते हैं, “ये ऐसा मामला था जिसका ज़िक्र मैं अपने परिजनों से शर्म के मारे नहीं कर सकता था. मैंने अपने एक रिश्तेदार से एक्सीडेंट की बात करके 40 हज़ार रुपये मंगाये. बाकी पैसे दूसरे दिन देने के लिए कहा. उन्होंने मुझे तो छोड़ दिया, लेकिन मेरी गाड़ी वापस नहीं की. दूसरे दिन पत्नी के गहने गिरवी रखकर मैं उन्हें 60 हज़ार रुपये देने जा रहा था. अचानक मेरे मन में आया कि नोएडा में मेरे एक जानने वाले हैं. उनसे मिलकर एक बार घटना के बारे में बताऊं. मैं उनके पास गया और पूरी कहानी उन्हें बतायी. पूरी बात सुनने के बाद मेरे परिचित हैरान हो गये. उन्होंने बताया कि ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले बिलकुल इसी अंदाज़ में उनके एक जानने वाले के साथ भी घटी थी. उन्होंने फोन करके उस शख्स को बुलाया जो अप्रैल महीने में बिल्कुल इसी तर्ज़ पर उस महिला और पुलिस चौकी वालों के जाल में फंसा था. बिलकुल एक ही तरीका इस्तेमाल किया गया था.”
अपराध स्थल
नोएडा सेक्टर 44 की पुलिस चौकी पर सन्नाटा पसरा हुआ है. चौकी से महज़ कुछ दूरी पर बिहार के रहने वाले अनिरुद्ध सिंह चाय की रेहड़ी लगाते हैं. अक्सर चौकी में अनिरुद्ध ही चाय आदि पहुंचाते थे. सोमवार को हुई पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी के बाद से आसपास के लोग हैरान है.
अनिरुद्ध सिंह कहते हैं, ”सोमवार को मेरे दुकान के आगे से ही तीन पुलिस वालों को गिरफ़्तार किया गया. पहली बार देखा कि पुलिस वाले को ही पुलिस वाले गिरफ़्तार कर रहे हैं. जब गिरफ़्तारी का कारण पता चला तो मैं हैरान रह गया. खाकी वर्दी पहन कर यही लोग पाप कर रहे थे. मुझे कभी लगा नहीं कि ये लोग ऐसी हरकत करते होंगे.”
लिफ्ट मांगने के बहाने लोगों से वसूली करने के मामले में सेक्टर 44 थाने के चौकी इंचार्ज सुनील शर्मा सहित कुल 15 लोग गिरफ़्तार किये गये हैं. इनमें एक सब इंस्पेक्टर, तीन सिपाही, पीसीआर के तीन ड्राइवर और दो महिलाएं शामिल हैं. वहीं एक महिला अभी भी फरार बतायी जा रही है.
गिरोह में शामिल महिलाएं एमिटी पुलिस चौकी से गुज़रने वालों से लिफ्ट मांगती थी, जिसके बाद लोगों पर छेड़खानी और रेप का आरोप लगाकर संगठित तरीके से वसूली की जाती थी. गिरफ़्तारी के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. गैंग में शामिल सभी सदस्य दिल्ली-एनसीआर के ही रहने वाले हैं.
क्या है पूरा मामला?
यूपी पुलिस का यह भी एक चेहरा है जहां वो खुद ही गिरोह बनाकर लोगों को फंसाने और उनसे वसूली का धंधा चला रही थी. इस गिरोह में पुलिस वालों के साथ ही कुछ आम लोग भी शामिल थे. लोगों को फंसाने के लिए गैंग में महिलाओं को भी शामिल किया गया था.
गैंग में शामिल लड़कियां महामाया फ्लाईओवर के आसपास राहगीरों से लिफ्ट मांगती थीं. लिफ्ट लेने के बाद गाड़ी उस जगह पर रुकवाती थीं जहां पर पुलिस की पीसीआर वैन खड़ी रहती थी. गाड़ी से उतरने के बाद लड़कियां भागते हुए पीसीआर के पास जाती थी और पीसीआर में मौजूद पुलिसकर्मियों से कहती थीं कि उनके साथ गाड़ी चालक ने छेड़खानी की और रेप करने की कोशिश की.
महिला की शिकायत के बाद पीसीआर में मौजूद यूपी पुलिस के जवान तथाकथित अभियुक्त और पीड़िता को पुलिस चौकी में लेकर आते थे. चौकी पर लाने के बाद पहले से लिखित स्क्रिप्ट के अनुसार कुछ लोग लड़की पक्ष से आ जाते थे. एक कथित सम्मानित व्यक्ति अवाना भी समझौता करवाने के लिए पहुंच जाता था. लड़की पक्ष का एक वकील भी पहुंच जाता था जो तथाकथित अभियुक्ति को बार-बार ये कहकर डराता था कि वो रेप का मामला दर्ज़ कराने जा रहा है. चौतरफा दबाव बनाकर ये लोग अपने शिकार से पैसे की वसूली करते थे.
इस मामले के बारे पर गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी वैभव कृष्ण ने विस्तार से मीडिया को जानकारी दी. वैभव के मुताबिक ये गैंग लगभग छह महीने से काम कर रहा था. अनुमान है कि अब तक इन्होंने 20 लाख से ज़्यादा रुपये लोगों को फंसाकर वसूला है. सबसे ज़्यादा छह लाख रुपये एक व्यक्ति से लिया गया है.
वैभव कृष्ण के मुताबिक वसूली के पैसों में इनका हिस्सा पहले से तय होता था. लोगों से पैसे मिलने के बाद 40 प्रतिशत चौकी इंचार्ज लेता था, 30 प्रतिशत अंकित (गिरोह का मास्टरमाइंड जो अपनी पत्नी के साथ गिरोह में शामिल था. अंकित ऐसे ही मामले में दो बार जेल जा चुका है) को मिलता था, 10 प्रतिशत देशराज अवाना (खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताकर समझौते में भूमिका निभाता था), बाकी का बीस प्रतिशत गिरोह के अन्य लोगों में बंटता था.
कैसे पकड़ा गया गैंग?
अप्रैल में गिरोह की एक महिला ने सेक्टर 37 में रणविजय कुमार (बदला हुआ नाम) से लिफ्ट लिया था. उनसे खुद को गरीब और बेरोज़गार बताकर नौकरी दिलाने की बात की. रणविजय नौकरी दिलाने की कोशिश करने लगे. इस दौरान महिला उनसे मिलने भी आयी. रणविजय ने महिला को कुछ लोगों से मिलाया भी. एक दिन रणविजय से महिला मिलने आयी. रणविजय उसे अपने एक परिचित के पास नौकरी दिलाने के लिए ले गये. तब उनकी गाड़ी में उनका एक दूर का जानने वाला भी था. तभी महिला ने रेप की कोशिश का आरोप लगाते हुए पुलिस के पास पहुंच गयी. इस मामले में रणविजय से गिरोह के लोगों ने 3 लाख पचास हज़ार रुपये लिए.
रणविजय और जगदीश ने फैसला किया कि नोएडा के एसएसपी के पास जायेंगे. एसएसपी वैभव कृष्ण ने जगदीश से कहा, “आप जाओ, पैसे देना और उसी वक़्त मुझे फोन कर देना. मैं आसपास में ही रहूंगा. बातचीत के अनुसार ही जगदीश चौकी पहुंचे और गिरोह के सदस्यों को पैसे दिये, जिसके बाद वहां पहुंचे एसएसपी वैभव कृष्ण ने पुलिसकर्मियों को गिरफ़्तार कर लिया. जगदीश की गाड़ी और एक लाख रुपया अभी भी फंसा हुआ है. जो शायद जल्द ही उन्हें मिल जायेगा.
यूपी पुलिस की छवि
योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद यूपी में धड़ल्ले से एनकाउंटर शुरू हुआ. जिसमें यूपी पुलिस के जवानों पर फ़र्ज़ी तरीके से एनकाउंटर करने का आरोप लगा. एक मामला नोएडा में भी सामने आया जिसमें पुलिस ने एक जिम ट्रेनर जितेंद्र नाम के युवक को गोली मार दी थी. जिसके बाद परिजनों ने फर्जी एनकाउंटर का मामला पुलिस पर दर्ज़ कराया था. इस मामले में पुलिस की भूमिका पर कई तरह के सवाल उठे.
इस नये खुलासे ने यूपी पुलिस की छवि को आम लोगों में और ख़राब कर दिया है. नोएडा सेक्टर 19 में रहने वाली संजना रावत कहती हैं, “पुलिस के लोगों को पहले से ही शक से देखा जाता रहा है, लेकिन इस खुलासे के बाद आम लोगों का भरोसा पुलिस पर और कम होगा. दूसरी बात ज़रूरतमंद शख्स को अब कोई भी व्यक्ति लिफ्ट देने से बचेगा.”
नोएडा पुलिस के जवान इस पूरे विवाद पर बातचीत से बचते नज़र आये. हमने कई सीनियर/जूनियर अधिकारियों से पूछा कि इस मामले के बाद क्या पुलिस पर लोगों का भरोसा कम होगा, तो लगभग सबने नहीं में ही जवाब दिया.
सेक्टर 39 थाने में काम करने वाले एक पुलिस सिपाही बताते हैं, “आपके ही पेशे (पत्रकारिता) में कई लोग अनैतिक काम करते हैं. ख़बरों के लिए पैसे लेते हुए पकड़े जाते हैं. जबकि आपका काम लोगों के पक्ष में लिखना है. क्या लोगों का पत्रकारिता पर भरोसा कम हुआ है. आज भी जो बेहतर पत्रकार हैं अपना काम कर रहे हैं. पेशे से बेईमानी करने वाले दो-चार लोग होते हैं. उन दो-चार के चक्कर में पूरे विभाग पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. पुलिस पेशे में भी बहुत ईमानदार लोग हैं. इस विवाद से लोगों में अविश्वास बढ़ेगा, लेकिन भरोसा खत्म नहीं होगा.”
नोएडा सेक्टर 39 थाने के एसएचओ राजेश कुमार शर्मा का भी ऐसा ही कुछ कहना है, “मुझे लगता है कि इस मामले के बाद लोगों का भरोसा पुलिस पर बढ़ेगा. लोगों के मन में ये बात आयेगी कि पुलिस वाले अपने लोगों को नहीं छोड़ रहे हैं तो दूसरे अपराधियों को कैसे छोड़ेंगे. नोएडा पुलिस किसी भी तरफ के अपराध करने वाले को, चाहे वो कोई भी हो छोड़ने वाली नहीं है.”
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