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’23 मई को मोदी सरकार बनने के बाद, कमलनाथ सरकार की उल्टी गिनती शुरू’
एक तरफ जहां लोकसभा चुनाव के बाद आये तमाम एग्ज़िट पोल में कांग्रेस बुरी स्थिति में दिख रही है, वहीं मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराने की बातें चलने लगी हैं. सोमवार सुबह ही मध्य प्रदेश में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने कमलनाथ सरकार के अल्पमत में चले जाने का दावा किया और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को चिट्ठी लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है.
आपको बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में लंबे समय से सत्ता में काबिज़ बीजेपी की सरकार को हटाकर कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी. 230 विधानसभा सीटों वाले मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने 114, बीजेपी ने 109, सपा ने एक, बीएसपी 2 और चार निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज़ की थी. निर्दलीय और बसपा-सपा के समर्थन से प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी थी.
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही बीजेपी ने कहना शुरू कर दिया कि कमलनाथ सरकार अपने पांच साल पूरे नहीं कर पायेगी. वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, ‘ये सरकार बेहद आसानी से नहीं गिरने वाली है. 23 मई को लोकसभा नतीजे में अगर मध्य प्रदेश में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो जाता है, तब कांग्रेस सरकार पर असर होगा. लेकिन कमलनाथ बड़े माहिर खिलाड़ी हैं और अगर बीजेपी के लोग सोचते हैं कि कमलनाथ चुप रहेंगे तो ऐसा नहीं है. तमाम संभावनाओं को देखते हुए वो भी बीजेपी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश करेंगे. दूसरी बात, यहां कांग्रेस के विधायकों की निष्ठा पार्टी के साथ-साथ कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सिंधिया परिवार के प्रति है. एक बार को वे कांग्रेस को धोखा देने के बारे में सोच सकते हैं, लेकिन इन्हें धोखा नहीं दे सकते हैं’.
किदवई न्यूज़लॉन्ड्री से आगे कहते हैं, ‘बीजेपी को सरकार बनाने के लिए एकसाथ 30 से 35 विधायकों को तोड़ना होगा. जिसके बाद ये लोग मामले को लेकर इलेक्शन कमीशन चले जायें और पांच साल इसी में निकाल दें. मध्य प्रदेश में ऐसे कई मामले हो भी चुके हैं. दूसरा रास्ता, ये चार निर्दलीय विधायक हैं और सपा-बसपा के जो लोग हैं, उन्हें तोड़ दें.
मध्य प्रदेश में लंबे समय तक पत्रकारिता करने वाले वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीक्षित रशीद किदवई की बातों से इत्तेफ़ाक़ रखते हुए कहते हैं, “23 मई को अगर नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते, तो कमलनाथ सरकार के गिरने की संभावना बन सकती है. उस स्थिति में बीजेपी, कांग्रेस के छह-सात विधायकों को इस्तीफा दिला सकती है. जिसके बाद बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों की संख्या में कमी आ जायेगी. उसके बाद ये सरकार बना लेंगे. गवर्नर तो इनकी हैं ही. बीजेपी कब से राजनीतिक नैतिकता का पालन करने लगी. प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के साथ ही ये लोग उसे गिराने की तैयारी में लग गये थे. लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रशासन को बीजेपी के नेता धमकी देते रहते थे कि ज्यादा मत इतराओ, जल्द ही हमारी सरकार आने वाली है. कमलनाथ सरकार के गिने-चुने दिन बचे हुए हैं.”
राकेश दीक्षित का मानना है कि कांग्रेस के विधायक भी टूट सकते हैं. जहां कुछ लोग कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को शायद एक भी सीट न मिले, यहां तक बातें हो रही हैं कि छिंदवाड़ा से कमलनाथ के बेटे और गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हार सकते हैं, लेकिन दीक्मेषित का अनुमान है कि कांग्रेस आठ से दस सीटें जीत सकती है. अगर ऐसा होता है तो सरकार नहीं गिरेगी.
मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता रवि सक्सेना कहते हैं, “भारतीय जनता पार्टी के नेता अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. एग्जिट पोल के नतीजों से अतिउत्साही होकर कोई विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए कह रहा है तो कोई राज्यपाल को पत्र लिख रहा है. बीजेपी के नेता सत्ता के लालच में इतने अंधे हो गये हैं कि इनमें किसी भी बात की समझ ही नहीं बची है. मुझे तो लगता है कि जब से सत्ता से बाहर हुए हैं, गोपाल भार्गव, शिवराज सिंह और कैलाश विजयवर्गीय जैसे लोग जल बिन मछली की तरह तड़प रहे हैं. हमारी सरकार सुरक्षित है. इन लोगों को तड़पते रहने दीजिये. हमारी सरकार गिरने का दूर-दूर तक अंदेशा नहीं है.”
मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए कहते हैं, “23 मई को नतीजे आ जायें और हमारी सरकार बन जाये, उसके बाद हम इस पर (कमलनाथ सरकार गिराने पर) विचार करेंगे. लेकिन एक बात तो तय है कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार आपसी अंतर्विरोधों से घिरी हुई है. लोकसभा चुनाव तक जैसे-तैसे इस अंतर्विरोध को कांग्रेस ने दबाये रखा, लेकिन नतीजों के बाद अंतर्विरोध खुलकर सामने आयेंगे. उसके बाद सरकार गिरना तय हो जायेगा. कांग्रेस सरकार को समर्थन देने वाली मायावती तीन बार लिखित और मीडिया के माध्यम से सरकार को धमकी दे चुकी हैं.”
कांग्रेस की स्थिति सही रहती है तो क्या सरकार गिराने में दिक्कत आयेगी, इस सवाल पर रजनीश अग्रवाल कहते हैं, “इसकी तो संभावना ही नहीं है. कांग्रेस यहां से बुरी तरह से हारने जा रही है. गुना की सीट पर आपने महाराजजी (ज्योतिरादित्य सिंधिया) की हालत देखी. सालों से जहां से जीतते आ रहे हैं, जहां लोग उनके महल की छाया में रहते हैं, वहां महाराजजी और उनके परिवार को कितनी सभाएं करनी पड़ीं. कांग्रेस यहां बुरी तरह से हारने जा रही है. 23 मई के नतीजे के बाद कमलनाथ सरकार की कुर्सी के पाये हिलने लगेंगे और उसके बाद सरकार का जाना तय हो जायेगा.”
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