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कैराना में हुकुम सिंह की बेटी को टिकट न देना बीजेपी को पड़ सकता है भारी
“आपके तकलीफ में कोई काम आया हो, हर दुख में आपके साथ खड़ा रहा हो, उसके साथ ग़लत हो तो आपको बुरा लगेगा न? हमें भी बुरा लग रहा है. बीजेपी ने बुआ जी ( मृगांका सिंह) को टिकट नहीं दिया है. हमें इसका दुख है. हम न खुद बीजेपी को वोट देंगे और न किसी रिश्तेदार को देने देंगे.” यह कहना है कैराना के कंडेला गांव के रहनेवाले संजय निरवाल का.
दरअसल बीजेपी ने लंबे समय तक कैराना की राजनीति में वर्चस्व रखनेवाले हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह की जगह कैराना के गंगोह विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रदीप चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है. जिसके बाद से कैराना के लोगों में इसको लेकर नाराज़गी देखने को मिल रही है. नाराज़ लोगों में से जहां कुछ बीजेपी को वोट देने से इंकार करते हैं, वहीं कुछ का कहना है कि हम वोट बीजेपी को देंगे और हमें उम्मीद है कि बीजेपी विधानसभा में मृगांका को टिकट देगी.
टिकट कटने के सवाल पर न्यूज़लॉन्ड्री से बात करते हुए मृगांका सिंह कहती हैं, ‘मुझे पूरा भरोसा था कि मुझे अवसर और आशीर्वाद अवश्य मिलेगा, परंतु ऐसा नहीं हुआ. यहां पर षड्यंत्रकारी शक्तियां लगी हुई थीं, जो शृंखला बनाकर मेरे प्रति दुष्प्रचार कर रही थीं. वे अपने उद्देश्य में सफल हुईं और मुझे टिकट नहीं मिल पाया. एक बेटी को षड्यंत्र के द्वारा वंचित किया गया.’
हालांकि, मृगांका सिंह प्रदीप चौधरी के लिए वोट मांग रही हैं. वो कहती हैं कि मैं पार्टी की समर्पित कार्यकर्ता हूं और पार्टी जो जिम्मेदारी देगी उसे निभाने की कोशिश करूंगी. लेकिन स्थानीय लोगों की मानें, तो मृगांका सिंह कभी नहीं चाहेंगी कि प्रदीप चौधरी जीत जायें. प्रदीप चौधरी का कैराना से जीतना हुकुम सिंह परिवार की राजनीति खत्म होना होगा.
कौन हैं षड्यंत्रकारी?
मृगांका सिंह अपने खिलाफ षड्यंत्र की तो बात करती हैं, लेकिन षड्यंत्रकारी कौन है, ये बताने से इनकार कर देती हैं. लेकिन मृगांका के घर पर उनका इंतज़ार कर रहे बीजेपी से जुड़े एक बुजुर्ग नेता नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं कि मृगांका का टिकट योगी सरकार के दो मंत्री सुरेश राणा, धर्मसिंह सैनी और मुज़फ़्फ़रनगर से बीजेपी सांसद संजीव बालियान ने यूपी बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र पांडेय के साथ मिलकर कटवाया है. इनका दावा है कि इसके लिए काफ़ी पैसे भी दिये गये हैं.
सुरेश राणा कैराना लोकसभा क्षेत्र के थानानगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और योगी सरकार में गन्ना मंत्री हैं.
मृगांका सिंह का टिकट कटवाने में सबसे ज़्यादा लोग सुरेश राणा का नाम ले रहे हैं. इस संबंध में जब हमने मृगांका से पूछा, तो वो कहती हैं कि “मैं किसी का नाम नहीं ले रही, लेकिन जल्द ही उचित प्लेटफॉर्म पर तमाम षड्यंत्रकारियों का पर्दाफाश करूंगी.”
सुरेश राणा और धर्मसिंह सैनी पर जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उनका कहना है कि बाबूजी ( हुकुम सिंह ) की राजनीतिक वर्चस्व के आगे इनकी बिलकुल नहीं चलती थी. बाबूजी के निधन के बाद इन्होंने साजिश रचनी शुरू कर दी. ये लोग उपचुनाव में भी नहीं चाहते थे कि टिकट मिले, लेकिन लोगों की मांग पर और सहानुभूति का वोट मिल जाये इसके लिए बीजेपी ने टिकट दे दिया. मृगांका ये चुनाव 44,618 वोटों से हार गईं. कैराना, शामली से तो बहुत बढ़त के साथ जीतीं, लेकिन मृगांका को सबसे कम वोट धर्मसिंह सैनी और सुरेश राणा के ही इलाके में मिले.
सुरेश राणा के विधानसभा क्षेत्र थानानगर में मृगांका को तबस्सुम बेगम से 28, 117 वोट कम मिले, वहीं धर्मसिंह सैनी के विधानसभा क्षेत्र नाकुर से 15, 159 वोट मृगांका को कम मिले थे.
शामली गन्ना मिल में हमारी मुलाक़ात ज़मीर नाम के एक शख्स से हुई. ज़मीर कहते हैं कि बाबूजी ( हुकुम सिंह) के कारण हम बीजेपी को वोट देते थे. मैं ही नहीं, यहां हजारों मुसलमान बाबूजी को वोट देते थे. हमें तो बाबूजी को वोट करना था, भले वो किसी भी पार्टी में रहें, लेकिन इसबार हम तबस्सुम हसन को वोट करेंगे.
विपक्षी बना रहे हैं मुद्दा
हुकुम सिंह की बेटी को टिकट नहीं दिया गया, इस मामले को महागठबंधन के लोगों ने मुद्दा बना दिया है. इसके जरिये विपक्ष उन वोटों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहा है, जो लोग बीजेपी से नाराज़ हैं. मृगांका को टिकट नहीं मिला, इस सवाल पर कैराना की सांसद तबस्सुम हसन कहती हैं, मृगांका जिले की बेटी हैं. उसके साथ यहां के कुछ नेताओं ने अन्याय किया है. वो चुनाव मैदान में होतीं, तो शायद मेरे लिए बड़ी चुनौती होती, लेकिन फिर भी मैं कह रही हूं, उसके साथ धोखा हुआ है.
तबस्सुम हसन ने ही पिछले साल कैराना उपचुनाव में मृगांका सिंह को हराया था.
स्थानीय पत्रकार वरुण पांवर की मानें, तो बीजेपी को बहुत नुकसान नहीं होने जा रहा है. वरुण कहते हैं कि दो स्थितियों में ही बीजेपी को नुकसान हो सकता था. पहला, अगर मृगांका सिंह बगावत करतीं और दूसरा, बीजेपी गुर्जर समुदाय से अलग किसी और समुदाय के किसी शख़्स को टिकट दे देती. लेकिन मृगांका बीजेपी के लिए प्रचार कर रही हैं तो नुकसान की संभावना नहीं है.
सुरेश राणा पर लग रहे आरोप पर वरुण कहते हैं कि टिकट सुरेश राणा ने कटवाया है, ऐसा तो नहीं कह सकते लेकिन ये ज़रूर है कि हुकुम सिंह और सुरेश राणा की कभी नहीं बनती थी. हुकुम सिंह ने सुरेश राणा की राजनीति रोकनी चाही थी.
मृगांका सिंह के टिकट कटने के बाद लोगों की नाराज़गी पर शामली बीजेपी अध्यक्ष पवन तरार कहते हैं, “जी पहले लोगों में नाराज़गी थी, लेकिन लोगों को अब समझा लिया गया है. तमाम लोग पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता हैं. पार्टी के आदेश पर मृगांका समेत सभी चुनाव प्रचार में जुट गये हैं.”
मृगांका का टिकट काटे जाने में सुरेश राणा समेत बाकी नेताओं की भूमिका पर पवन तरार कहते हैं कि किसकी भूमिका थी यह मुझे नहीं पता, लेकिन पार्टी ने जो निर्णय लिया है वो हमने मंजूर किया और हम प्रदीप चौधरी को जिताने के लिए जी-जान से लगे हुए हैं. कैराना सीट बीजेपी जीत रही है.”
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