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मध्य प्रदेश के नेताओं, नौकरशाहों के खिलाफ याचिका दायर करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता की मौत
रविवार को भोपाल में एक आरटीआई कार्यकर्ता की मौत हो गई. मरने वाले ने अपने इलाके के ताकतवर भाजपा विधायक और शिवराज सिंह चौहान के कई करीबी नौकरशाहों के खिलाफ आरटीआई याचिका दायर कर रखी थी. मृतक मनोज त्रिपाठी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में अपने घर की छत से गिरकर हुई.
त्रिपाठी भोपाल के कोलार इलाके में स्थित सर्वधाम कॉलोनी के द्वारका हाइट्स बिल्डिंग में रहते थे. 2 नवंबर की रात संदिग्ध परिस्थितियों में वो अपने पांच मंजिला घर की छत से गिर गए थे. उनके शरीर की कई हड्डियां टूट गई थी. आनन फानन में उन्हें शाहपुरा स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया. त्रिपाठी दो हफ्तों से ज्यादा समय से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे. रविवार को उनकी मौत हो गई.
त्रिपाठी के परिजनों का कहना है कि 2 नवंबर की रात वो किसी से फोन पर बात करते हुए छत पर चले गए और फिर वहां से नीचे गिर पड़े. परिवारवालों का कहना है कि जब वे भागकर उनके शरीर के पास पहुंचे तो उसे घेरकर 3-4 पुलिस वाले खड़े थे.
न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत करते हुए उनके एक रिश्तेदार अंजनी पांडेय ने बताया, “मैं उन्हें, उनके घर पर छोड़कर अपने घर लौट रहा था. तभी मुझे फोन आया कि ऐसी दुर्घटना हुई है. मैं वापस भागकर उनके घर पहुंचा. वहां पहले से ही पुलिस वाले मौजूद थे.”
त्रिपाठी अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं. उनकी पहचान एक आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में थी. इस घटना से तीन दिन पहले उन्होंने कोलार इलाके के विधायक और मध्य प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा के खिलाफ एक शिकायत दर्ज करवाई थी. 29 अक्टूबर, 2018 को त्रिपाठी ने यह शिकायत भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत, मध्य प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त वीएएल कांतराव और भोपाल के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सुदम खाड़े को भेजी थी.
अपनी शिकायत में त्रिपाठी ने लिखा था कि विधायक रामेश्वर शर्मा 7000 वर्गफीट ज़मीन पर जबर्दस्ती कब्जा करके उस पर अवैध निर्माण करवा रहे हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी गई शिकायत में उन्होंने मांग की थी कि शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और आवश्यक क़ानूनी कार्रवाई की जाय. अपनी शिकायत के साथ उन्होंने हड़पी गई भूमि के दस्तावेज और उसका मानचित्र भी संलग्न किया था. न्यूज़लॉन्ड्री के पास उन दस्तावेजों की प्रति उपलब्ध है.
पूर्व में त्रिपाठी ने एसके मिश्रा, मंगला मिश्रा, अनुपम राजन और अनिल माथुर के खिलाफ भी शिकायत दर्ज करवाई थी. ये सभी लोग वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश के जन संपर्क निदेशालय से जुड़े हुए हैं. उन्होंने अपनी शिकायत भोपाल के एसपी और आर्थिक अपराध शाखा में करके उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. इन सभी अधिकारियों के ऊपर आरोप है कि वे सरकारी पैसा कुछ फर्जी न्यूज़ वेबसाइट्स को विज्ञापन के रूप में दे रहे हैं और इसके जरिए धांधली में लिप्त हैं.
इसके अलावा त्रिपाठी ने मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी राधेश्याम जुलानिया के खिलाफ भी भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत दर्ज करवा रखी थी.
यह जानना महत्वपूर्ण है कि साल 2016 में त्रिपाठी ने भोपाल में राज्यपाल निवास के सामने खुद को आग लगाकर आत्मदाह की कोशिश की थी. त्रिपाठी की मांग थी कि तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव को व्यापम मामले में कथित लिप्तता के कारण गिरफ्तार किया जाय.
इस संबंध में हमने कोलार पुलिस थाने के एसएचओ सुनील शर्मा से संपर्क कर त्रिपाठी की मौत की संदिग्ध परिस्थितियों के बारे में जानने की कोशिश की. शर्मा ने बताया, “वह शराब के नशे में थे इसी कारण छत से नीचे गिर गए. उनकी मौत में कुछ भी संदेहास्पद नहीं है.” थोड़ा और खोजबीन करने पर शर्मा ने कहा, “मैं इस बारे में इससे ज्यादा बात नहीं कर पाऊंगा. हम पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं.”
भोपाल के एक सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे कहते हैं, “उन्होंने नगर निगम, जल संसाधन और लोक निर्माण विभाग से जुड़े कई उल्लेखनीय काम किए थे. इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. वे लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ काम कर रहे थे. उनकी मौत को आंख बंद कर स्वीकार नहीं किया जा सकता. उनकी मौत के पीछे कुछ तो गड़बड़ है.”
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