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अन्नपूर्णा देवी: एक अपूर्ण कथा
कुछ घटनाएं इतनी दफ़े और इतनी तरह से कही-सुनी जाती हैं कि अफ़साना से मिथक बन जाती हैं. ऐसा ही एक किस्सा है भारत रत्न और सर्वकालिक महान सितारवादक पंडित रविशंकर के बारे में. अगर इनके बारे में और बताया जाय तो हिंदुस्तान के पहले ग्रैमी अवार्ड विजेता थे. दुनिया भर में भारतीय शास्त्रीय संगीत को मशहूर और मक़बूल करने का सबसे ज्यादा श्रेय इन्हीं को है. बॉलीवुड से बावस्तगी की बात कहें तो पंडित रविशंकर को हम “सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा” और सत्यजीत रे की कालजयी फिल्म “पाथेर पांचाली” के म्युज़िक कम्पोज़र के तौर पर जानते हैं.
हमने वह विहंगम दृश्य भी देखा जब ऋषिकेश में बीटल्स के लीड गिटारिस्ट जार्ज हैरिसन, पंडित रविशंकर से बेहद विनम्रता से सितारवादन की बुनियादी सिख ले रहे हैं. हीनता के ग्रंथि से पीड़ित हम लोगों के लिए ऐसे वाकये गुरूर से भर जाने का मौका देते हैं. यूनाइटेड स्टेट्स और यूरोप में जिसके कंसर्ट में हजारों लड़कियां जुनून और आह्लाद में बेकाबू हो जाती हैं, वो पंडितजी के पैरों में बैठकर सितार पर बेसिक बोल और सरगम सीख रहा है. इसे “राग और रॉक” का संगम कहा गया. जार्ज हैरिसन के शब्दों में रविशंकर “द गॉडफादर ऑफ़ वर्ल्ड म्युज़िक” थे. ख़ैर ये कहानी फिर कभी.
अभी जो किस्सा बताने जा रहा हूं वो पंडित रविशंकर और उनकी पहली पत्नी अन्नपूर्णा देवी के बारे में है, जिसकी परिणति उनकी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी में खिंचाव के रूप में हुई. अन्नपूर्णा उनके गुरु महान अलाउद्दीन खान की बेटी और सुरबहार व सुरसिंगार की लिविंग लीजेंड हैं.
पहली पत्नी? जी हां. पंडित रविशंकर के बहुत सारे अफेयर्स और कई बीवियां थीं. रविशंकर और सू जोन्स की बेटी नोरा जोन्स मशहूर अमेरिकी सांग राइटर और सिंगर हैं. उनकी एक और बीवी सुकन्या से उनकी बेटी हैं प्रसिद्ध सितारवादक अनुष्का शंकर. अन्नपूर्णा से भी उनको एक बेटा था शुभेन्द्रु शंकर, जो एक उदीयमान संगीतकार थे. दुर्भाग्यवश उनकी असामयिक मौत हो गयी. वो भी एक अलग कहानी है. पंडितजी खुद स्वीकार करते थे कि परंपरागत अर्थों में वो नैतिक नहीं हैं.
तो हमारा किस्सा यूं है कि मैहर, जहां वो अपने गुरु से 6 साल तक संगीत सीखते रहे, वहां से निकलने के बाद रविशंकर ने देश भर में प्रस्तुतियां देना शुरू किया. यहां इसका जिक्र जरुरी है कि जब पंडित रविशंकर पेरिस से मैहर बाबा अलाउद्दीन खान के पास सितार सीखने आये थे, अन्नपूर्णा देवी सुरबहार और सुरसिंगार में पारंगत हो चुकी थीं. अन्नपूर्णा के कई शिष्य आज के प्रख्यात संगीतकार हैं, मसलन निखिल बनर्जी, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, नित्यानंद हल्दीपुर, अमित रॉय और बसंत कबरा.
इन प्रस्तुतियों में बहुधा जुगलबंदी भी होती थी. रविशंकर अक्सर बाबा अलाउद्दीन के बेटे अली अकबर खान (सरोद मैस्ट्रो) के साथ सरोद और पत्नी अन्नपूर्णा के साथ सुरबहार की अपने सितार के साथ जुगलबंदी करते थे. इन जुगलबंदियों को संगीत के जानकार सर्वकालिक महान जुगलबंदियों की श्रेणी में रखते हैं. यह 1950 के दशक की बात है.
लेकिन इस परीकथा का दुखान्त है. इन प्रस्तुतियों में अन्नपूर्णा देवी को स्रोताओं और आलोचकों की तारीफें ज्यादा मिलने लगीं. कंसर्ट के बाद भी ज्यादातर लोग उनके इर्द गिर्द जमा हो जाते थे. अन्नपूर्णा बताती हैं कि इस वजह से पंडितजी असुरक्षित महसूस करने लगे. जिसके नतीजे में उनकी शादीशुदा जिंदगी में दिक्कतें शुरू हो गईं. लीजेंड उस्ताद आमिर खान का दिलचस्प आकलन है कि अन्नपूर्णा देवी, अलाउद्दीन खान का 80 प्रतिशत, अली अकबर खान 70 और पंडित रविशंकर 40 प्रतिशत थे.
जब घर में कलह और टकराव बढ़ने लगा तो शादी बचाने की खातिर अन्नपूर्णा देवी ने बाबा अलाउद्दीन खान और अपने आराध्य मैहर देवी के सामने जिंदगी में कभी प्रस्तुति ना देने की कसम खाई. मगर उनका यह त्याग और समर्पण भी इस शादी को बचा नहीं पाया. 1961 में आखिरकार दोनों अलग हो गए.
हालांकि 1970 के दशक में वायलिनिस्ट येहुदी मेहुनिन और बीटल्स बैंड वालों की गुज़ारिश पर 1970 के दशक में इंदिरा गांधी ने अन्नपूर्णा देवी से निवेदन किया कि ये विश्वप्रसिद्ध संगीतकार उनकी प्रस्तुति देखना चाहते हैं. केवल तब प्रधानमंत्री की गुज़ारिश पर अन्नपूर्णा देवी ने उन लोगों को अपना रोजाना का रियाज़ देखने की अनुमति दी थी. टेक्निकली वो उनकी आख़िरी परफॉर्मेंस कही जा सकती है.
अभी मैं उस्ताद आशीष खान (अली अकबर खान के बेटे) जो ज्यादातर यूएसए में ही रहते हैं, से बात कर रहा था तो उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को उनके जन्म दिवस पर कोलकाता में आशीष खान स्कूल ऑफ वर्ल्ड म्यूजिक में एक भव्य कंसर्ट का आयोजन हुआ. उन्होंने उसके कुछ फुटेज भी साझा किए. आशीष खान खुद बचपन से ही बाबा और अपनी बुआ अन्नपूर्णा देवी से सीखते रहे हैं. उन्होंने बताया कि बाबा कहते थे कि अन्नपूर्णा में लालच नहीं है. संगीत उसकी महत्वाकांक्षा का साधन नहीं, बल्कि साधना है, इसीलिए वो इसकी बेहतर हकदार है.
हालांकि बहुत साल बाद 2012 में अपनी आत्मकथा “रागमाला” में पंडित रविशंकर ने अफ़सोस के साथ कहा कि उन्हें अन्नपूर्णा देवी के साथ निबाह लेना चाहिए था. माना जाता है कि ऋषिकेश मुखर्जी की मशहूर फिल्म “अभिमान” भी इसी वाकये से प्रेरित थी, जिसमें आज के मेगास्टार अमिताभ बच्चन और जया बच्चन ने अभिनय किया था.
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