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पीआईबी की मान्यता और फ़ेक न्यूज़ का बहाना
फेक न्यूज़ प्रसारित करने पर पत्रकार अपनी मान्यता से हाथ धो बैठेंगे- सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए जरूरी नियमावली में 2 अप्रैल को यह संशोधन प्रस्तावित किया गया था. अब इस आदेश को वापस ले लिया गया है. चूंकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रालय से कहा है कि वे यह निर्णय प्रेस संस्थाओं को लेने दें.
यह संशोधन सोमवार शाम को पीआईबी (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) के एक्रिडेशन गाइडलाइन्स में जोड़ी गई थी. इसके बाद मीडिया के हर हिस्से से इसके खिलाफ बयान आने लगे, हंगामा मच गया. इसकी आलोचना में पहले पन्ने से लेकर संपादकीय तक लिखे गए. पत्रकारों ने इसे तानाशाही और सोशल मीडिया ने इसे फ्री स्पीच की आजादी के खिलाफ बताया.
लेकिन इन सब का मतलब क्या है? यहां नीचे हम यह बताने की कोशिश करेंगे कि मान्यता प्राप्त पत्रकार होने का मतलब क्या है, क्या सुविधाएं दी जाती हैं और क्या चीज़ें दांव पर हैं.
मान्यता प्रदान करने वाला प्राधिकरण
विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों को मान्यता देने के लिए सेंट्रल प्रेस एक्रिडेशन कमेटी (सीपीएसी) भारत सरकार द्वारा नियुक्त की जाती है. इसके अध्यक्ष पीआईबी के मुख्य निदेशक होते हैं और इसमें अधिकतम 19 सदस्य होते हैं. पीआईबी भारत सरकार की प्रमुख एजेंसी है जो सरकार से जुड़ी सूचनाओं को आधिकारिक रूप से जारी करती है, और संबंधित विषय पर सरकार को भी सूचना देती है. सामान्य शब्दों में पीआईबी केंद्र सरकार की सूचनाओं को फैलाने का एक जरिया है.
वर्तमान समय में दैनिक जागरण के प्रशांत मिश्रा, टाइम्स नाउ की नविका कुमार, एबीपी न्यूज के कंचन गुप्ता, पॉयनियर के जे.गोपालकृष्ण और एएनआई की स्मिता प्रकाश इसकी सदस्य हैं और इसके चेयरमैन एपी फ्रैंक नोरोन्हा हैं.
यह समिति 2 साल के लिए गठित की जाती है और इसके विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के एसोसिएशन पत्रकारों के संगठन द्वारा किए गए नामांकन के आधार पर बनती है. इस समिति की बैठक आम तौर पर तीन महीने में एक बार होती है.
मान्यता प्राप्त होने का मतलब
भारत सरकार की नियमावली के मुताबिक, “सरकार से सूचना व खबरें प्राप्त करने के स्रोत, लिखित या सांकेतिक, पीआईबी के प्रेस विज्ञप्ति या भारत सरकार की संस्थाओं से जानकारी प्राप्त करने वाले मीडियाकर्मी को मान्यता.”
यह मीडियाकर्मी को सेंट्रल प्रेस एक्रिडेशन रूल्स, 1999 और सेंट्रल प्रेस एक्रिडेशन कमेटी के अनुसार मिलता है. जबकि पीआईबी एक्रिडेशन दिल्ली-एनसीआर के पत्रकारों या उन राज्यों के पत्रकारों को मिलता है जहां ऐसी ही एक्रिडेशन नियमावली हो.
मान्यता प्राप्त पत्रकार होने का मतलब क्या है?
मान्यता प्राप्त पत्रकार होने का मतलब सिर्फ मीडिया से जुड़े होने का पहचान पत्र नहीं है.
इसके निम्नलिखित फायदे हैं:
1. मान्यता प्राप्त पत्रकारों के पास आधिकारिक मान्यता के इंडेक्स और फोन डायरेक्टरी भी उपलब्ध होती है. (हालांकि ये सब पीआईबी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं)
2. मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सरकार की गतिविधियों से जुड़े अपडेट्स नियमित रूप से मिलते रहते हैं क्योंकि यह पत्रकार सरकार की मेलिंग लिस्ट का हिस्सा होते हैं.
3. मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कस्टम ड्यूटी में छूट मिलती है जिसके तहत वे अपने प्रोफेशनल सामान जैसे कि लैपटॉप, टाइपराइटर और फैक्स मशीन का आसानी से निर्यात कर सकते हैं.
4. एक मान्यता प्राप्त पत्रकार को उसके और उसके परिवार के लिए जर्नलिस्ट वेलफेयर स्कीम के तहत मुआवजा मिलता है. यह स्कीम एक फरवरी, 2013 से लागू हुई थी. इस स्कीम के फंड की व्यवस्था सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय करता है जिसके तहत पत्रकार के परिवार अत्यंत ही कठिन परिस्थियों जैसे कि पत्रकार की मौत हो जाने पर परिवार को 5 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है.
5. एक मान्यता प्राप्त पत्रकार को रेलवे टिकट में भी 50 प्रतिशत की छूट मिलती है. यह छूट पत्रकार के परिवारजनों को भी मिलती है जो एक साल में 2 बार इस छूट का लाभ ले सकते हैं.
6. मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के अंतर्गत सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ मिलता है.
7. सरकारी कार्यक्रमों, मंत्रालयों की गतिविधियों और संसद भवन की कार्रवाई को कवर करने का अधिकार मिलता है.
मान्यता प्राप्त पत्रकार होने के और भी फायदे हैं जैसे कि प्रेस लाउंज, वरीयता के आधार पर टेलिफोन कनेक्शन, PIB द्वारा आयोजित प्रेस टूर में हिस्सा लेने का मौका, इसके साथ ही शहरी विकास मंत्रालय द्वारा आवास की सुविधा भी मिलती है.
किसे मिलता है यह कार्ड?
इस कार्ड के लिए वही संवाददाता या कैमरामैन मान्य होंगे जिनके पास कम से कम पांच साल का पत्रकारिता का अनुभव होगा. जबकि एक स्वतंत्र पत्रकार को पंद्रह साल के अनुभव के बाद ही कार्ड दिया जा सकता है. किसी संस्थान के लिए यह मान्यता सिर्फ एक वर्ष के लिए रहती है जिसे समय-समय पर रिन्यू करवाना पड़ता है.
मान्यता प्राप्त करने के लिए संवाददाता या कैमरामैन को वर्तमान अथवा पुराने सैलरी स्लिप, बाईलाइन की क्लिपिंग, एक्रिडेशन लेटर, शैक्षिक व व्यवसायिक अनुभव के प्रमाण पत्र, फोटो व पीआईबी की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म जमा करना होता है. इसके अलावा एक स्वतंत्र पत्रकार को चार्टड अकाउंटेंट के सत्यापित इन्कम सर्टिफिकेट जमा कराना होता है.
ऐसे संस्थान जिन्हें मान्यता चाहिए उन्हें अखबारों का आरएनआई सर्टिफिकेट, प्रसार संख्या संबंधी दस्तावेज, पिछले छह महीनों के संस्करण आदि को प्रमाण के तौर पर जमा कराना होता है.
वेब मीडिया संस्थाओं के लिए, सब्सक्राइबर के डिटेल, साइट अपडेट का प्रमाण, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट आदि की जरूरत होती है. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए जरूरी दस्तावेज की सूची यहां देखी जा सकती है.
2018 तक, मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संख्या 2,403 है.
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