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सीबीएसई लीक: पुरानी गलती और कभी न सीखने की आदत
यकीन कीजिए, अगर 14-15 अगस्त 1947, की मध्यरात्रि को नेहरू अपना लोकप्रिय भाषण ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ देने की तैयारी में हों और उसी समय लॉर्ड माउंटबेटेन उनसे माइक्रोफोन छीन लें और बोलें, “मैं आप सबों से माफी मांगता हूं, दरअसल ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता कानून का एकमात्र ड्राफ्ट चोरी हो गया है. इसलिए आप सब कृपया अपने घर जाएं और कुछ महीने और इंतजार करें, इन दौरान हम ड्राफ्ट दुबारा तैयार कर लेंगे.”
दिल्ली की रोमांचित भीड़ और जो देश भर से लोग रेडियो पर सुन रहे होंगे उन्हें सदमा लगेगा. वे सब एकसुर में चीखेंगे- “यह सही नहीं है.”
ठीक ऐसी ही भावनाएं लाखों सीबीएसई के 10वीं और 12वीं के छात्रों के मन में पेपर लीक की ख़बर के बाद होंगी. उन्हें दुबारा गणित और अर्थशास्त्र की परीक्षा देनी होगी.
मामला इतना गंभीर क्यों हैं?
भारत में स्कूल जाने वाले हर बच्चे को एक परीक्षा जो मालूम है, वह है बोर्ड की परीक्षा. ये परीक्षाएं स्कूल के 10 व 12 साल पूरे होने पर ली जाती हैं. ये परीक्षाएं इसलिए भी अहम हो जाती हैं क्योंकि इन अंकों के आधार पर कॉलेजों में दाखिले होते हैं.
यह हमेशा से माना जाता (जबकि यह पूरी तरह गलत है) रहा है कि बोर्ड परीक्षाएं ही स्कूली जीवन का सबकुछ हैं. यही कारण है कि इन परीक्षाओं का दबाव न सिर्फ छात्र बल्कि उनके अभिभावक व परिजनों को भी महसूस होता है. यह कहना गलत न होगा कि बोर्ड की परीक्षा छात्र के साथ-साथ पूरा परिवार दे रहा होता है. ऐसी परिस्थितियों में बोर्ड परीक्षा के समापन का मतलब स्वतंत्रता मिलने से कुछ कम नहीं होता.
दोष किसे दिया जाए?
पेपर लीक का सारा आरोप सीधे सीबीएसई को दिया जाएगा. आज के वक्त में सुरक्षा का मतलब सिर्फ प्रश्न पत्र पेटियों की सुरक्षा करना नहीं होता बल्कि डिजिटल सुरक्षा भी है जिसमें प्रश्न पत्रों के हार्ड ड्राइव की भी सुरक्षा की जानी होती है. अवैध तरीकों से प्रश्न पत्र हासिल करने के हजारों तरीके हैं. सीबीएसई का सर्वर हैक करने से लेकर सुरक्षाकर्मी को प्रश्न पत्र का फोटो खींच लेने तक, इसके हजारों तरीके पैदा हो गए हैं. सीबीएसई की इस सुरक्षा चूक के चलते छात्रों और अभिभावकों की कई रातों की नींदें खराब होंगी.
अब क्या?
जांच के साथ साथ सीबीएसई ने दसवीं के गणित और बारहवीं के अर्थशास्त्र की परीक्षा दुबारा लेने का आदेश दिया है. 12वीं की परीक्षा की तारीख 25 अप्रैल घोषित हो गई है जबकि हाईस्कूल की परीक्षा तारीख घोषित होना अभी बाकी है. इस फैसले पर कई तरह के सवाल उठाए गये हैं. अभिभावकों के समूह ने सीबीएसई के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है जिसमें अपील की जा रही है कि परीक्षा दुबारा न ली जाए. एक और तथ्य कि पेपर गणित की होना है, अपने आप में सबकी चिंता बढ़ा देता है. कई बच्चों के लिए गणित कठिन विषय होता है. गणित की परीक्षा खत्म होने पर बच्चों के चेहरों और दिमागों से बड़ा बोझ हट जाता है.
बच्चों के लिहाज से यह अन्यायपूर्ण भी लगता है कि आईसीएसई और स्टेट बोर्ड के बच्चे अपने घरों और रिश्तेदारों का यहां छुट्टियां मना रहे हैं. उन्हें दुबारा परीक्षा नहीं देनी है. उनके बोर्ड सुरक्षित परीक्षा करवा पाने में कामयाब रहे हैं. यह तर्क दिया ही जा सकता है कि पेपर लीक की ज्यादातर घटनाएं स्टेट बोर्ड्स में होती हैं पर यह प्रशासन की नज़रों में नहीं आता. इस बार सिर्फ सीबीएसई के बच्चों पर ही दुबारा परीक्षा देने का भार पड़ा है.
खैर, जो हो गया सो हो गया. इन परिस्थितियों में सीबीएसई के पास सिर्फ एक ही तार्किक हल है- पुन: परीक्षा. जिन लोगों को लीक पेपर से अनैतिक लाभ हुआ था, दुबारा परीक्षा लेकर ही बाकी बच्चों की भरपाई की जा सकती है. दुबारा परीक्षाएं लेना भला कितना भी चिंतनीय हो, कॉलेज दाखिला प्रक्रिया के पहले इसे कर लेना चाहिए. साथ ही यह भी ध्यान रखना होगा कि बच्चों के दिमाग में विषय तरो-ताज़ा रहे और उन्हें किसी अतिरिक्त तैयारी करने की जरूरत न करनी पड़े.
सीखने के लिए सबक
बेशक बच्चों के लिए यह जीवनभर का सबक होने वाला है कि मेहनत के बावजूद, बिना अपनी किसी गलती के भी चीजें उनके मुताबिक नहीं हुई. कम उम्र में ही ऐसे सबक सीख लेना भी अच्छा ही है.
व्यवस्था के लिए बड़ा सबक है कि परीक्षा प्रक्रियाओं को निकट भविष्य या कभी भी हल्के में न ले. कुछ साल पहले, जब बिहार बोर्ड के टॉपर्स कुछ बुनियादी सवाल के जबाव नहीं दे पाए थे, यह साबित करता है कि सिर्फ सीबीएसई की व्यवस्था सड़ी हुई नहीं है. एसएससी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होना बताते हैं कि सरकारी रोजगार प्रदान करने वाली संस्थाएं भी बेहतर स्थिति में नहीं हैं.
जल्द से जल्द जांच और आरोपियों को सज़ा मिलना जरूरी है. भारत की परीक्षा प्रक्रियाओं के इर्द-गिर्द सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जानी चाहिए. यह सिर्फ छात्रों की परीक्षा नहीं है. यह हमसब की भी परीक्षा है.
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