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सुधीर मिश्रा: यारों ऐसे जाना कि अमर हो जाना
सुधीर मिश्रा जाने भी दो यारों की शुरुआती टीम के सदस्य रहे, कुंदन शाह के करीबी दोस्त थे. मिश्रा ने दस साल पहले कुंदन शाह और जाने भी दो यारों के बारे में यह राय जाहिर की थी- “नेहरूवियन सपना तब बुझ चुका था और राजनैतिक नेताओं की जमात राक्षसों में बदल चुकी थी. हर आदमी भ्रष्ट था और हमारा शहर अब उन्हीं भ्रष्ट राजनेताओं और अफ़सरानों के कब्ज़े में था. भू-माफ़ियाओं के साथ मिलकर उन्होंने पूरी व्यवस्था को एक कूड़ेदान में बदल दिया था. और इन्हीं सब के बीच दो फ़ोटोग्राफ़र दोस्त अपनी ज़िन्दगी के लिए संघर्ष कर रहे थे. लेकिन इस भ्रष्ट दुनिया में न तो उन्हें प्यार मिला और न ही अपनी नैतिकता बचाने की जगह ही मिली. कुंदन शाह की दुनिया में ’प्यासा’ का शायर और नाचनेवाली, और खुद उनके दो युवा फोटोग्राफ़र, सभी गर्त में हैं. सभी की किस्मत में अंधे कुएं में ढकेला जाना लिखा है और हम इस त्रासदी को देख हंसते हैं.”
आज दस साल बाद वो अपने साथी को किस तरह याद करते हैं? सुनिए ये पोडकास्ट.
कुंदन शाह की आखिरी फिल्म “पी से पीएम तक” 2014 में आई. इस फिल्म की नायिका थीं मीनाक्षी दीक्षित. मीनाक्षी की यह पहली हिंदी फिल्म थी. कुंदन शाह के साथ अपने अनुभव को मीनाक्षी इस पोडकास्ट में साझा कर रही हैं.
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